Author: Krishna Bihari Mishra

अपनी बात

काश, यही उदारता सरकारी स्कूलों में पढ़नेवाले अत्यंत निर्धन बच्चों पर भी स्पीकर और सरकार दिखाती…

कल हजारीबाग के किसी माननीय के स्कूल में पढ़नेवाले बच्चे झारखण्ड विधानसभा के मानसून सत्र का दृश्यावलोकन करने पधारे थे, इन बच्चों का स्वागत बड़े शानदार ढंग से हो रहा था, क्योंकि ये बच्चे साधारण सरकारी स्कूलों के नहीं, बल्कि एक माननीय द्वारा संपोषित स्कूल के थे। बारी-बारी से उक्त माननीय द्वारा विभिन्न दलों के प्रमुख नेताओं को इन बच्चों के पास बुलाया जाता और माननीय उन बच्चों के साथ बड़ी अदब से फोटो खिंचाते। 

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धर्म

आधुनिक भारत के महान अवतार महावतार बाबाजी जो ईश्वरीय कार्य के लिए सहस्राब्दियों से आज भी जीवित हैं

आपको आश्चर्य होगा कि इस पृथ्वी पर और खासकर भारत के उत्तर में हिमालय में स्थित बद्रीनाथ की गुफाओं में पिछले सहस्राब्दियों से एक महामानव आज भी स्थूल शरीर के रुप में हमारे बीच विद्यमान है, जो महावतार बाबाजी के नाम से जाने जाते हैं। महावतार बाबाजी का सबसे पहला परिचय महान आध्यात्मिक गुरु परमहंस योगानन्द जी ने 1946 ई. कराया था, जब उन्होंने इसकी सबसे पहली चर्चा “ ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी” में की।

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अपनी बात

धिक्कार ऐसी सरकार को, जहां हल्की बारिश में पांच साल की बच्ची नाले में बह कर दम तोड़ देती है

पांच साल रघुवर सरकार को होने जा रहे हैं, ये सरकार बहुत बड़े-बड़े काम किये है, आलीशान विधानसभा भवन, न्यायालय भवन एवं प्रेस क्लब बनाये हैं, जमकर इन सब का ढोल पीटा जा रहा हैं, लोग खूब भाजपा के झंडे उड़ा रहे हैं, पर पांच साल की छोटी सी बच्ची फलक आज ट्यूशन से लौट रही थी, उसे क्या पता था कि सरकार ने उसके लिए एक अच्छी सी सड़क जिस पर वो चलकर अपने घर और ट्यूशन के लिए आया जाया करें, उसके लिए कोई प्रबंध ही नहीं की।

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अपनी बात

राजधानी की दुर्गति के लिए सीपी सिंह दोषी और बिजली संकट के लिए कौन दोषी है पोद्दारजी?

सीपी सिंह ने राजधानी की दुर्गति कर दी, इसकी जिम्मेदारी से वे बच नहीं सकते और आपके सीएम रघुवर ने पूरे झारखण्ड की क्या कर दी, ये तो पोद्दार साहेब आपने बताया ही नहीं। भाई मेरा तो सवाल साफ है कि सी पी सिंह के प्रति जो उदारता आपने दिखाई, डॉयलॉग्स बोले। वो उदारता, आपने अपने प्रिय मुख्यमंत्री रघुवर दास पर क्यों नहीं दिखाई?

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राजनीति

वनाधिकार कानून पर जब सरकार को JMM ने सदन में घेरा, सरकार स्टैंड क्लियर नहीं कर पाई, हंगामे की भेंट चढ़ा सदन

झामुमो के साथ संपूर्ण विपक्ष ने राज्य सरकार को आज वनाधिकार मुद्दे पर जबर्दस्त रुप से घेरा। झामुमो जानना चाहता था कि आखिर भारतीय वन कानून 1927 में जो संशोधन की बात आ रही हैं, और इसके लिए जो ड्राफ्ट केन्द्र ने राज्य सरकार को भेजा है, जिसे आये हुए ढाई से तीन महीने बीत गये, उस ड्राफ्ट पर राज्य सरकार का स्टैंड क्या है? पर राज्य सरकार सदन में अपना स्टैंड क्लियर नहीं कर सकी,

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अपनी बात

सदन से ज्यादा चमक-दमक में ज्यादा रुचि ले रहे हैं सत्तारुढ़ दल के मंत्री व नेता

एक समय था माननीयों की सादगी चर्चा का विषय रहा करती थी, लोग दूर से ही देख कर भांप लेते कि वो व्यक्ति माननीय यानी विधायक या सांसद है, क्योंकि उनका पहनावा-ओढ़ावा ही ऐसा होता, जो औरों से अलग हटकर होता, खादी इनकी विशिष्टता में पंख लगा देती, खादी के वस्त्रों से ही इनका तन ढका हुआ होता और वे बेहद खास लगते, अब तो लगता है कि माननीयों के पहनावे-ओढ़ावे में खादी ही समाप्त हो गया है।

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राजनीति

विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री समेत पूरे सरकार के तेवर ढीले कर दिये नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने

आज विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी समेत सारी सरकार के तेवर ढीले कर दिये। सदन में आज का प्रश्नकाल शुरु होने के पहले अपने विधायकों तथा विपक्षी दलों के अन्य नेताओं के साथ विभिन्न तख्तियों को लेकर नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने सबसे पहले विधानसभा के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया।

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अपनी बात

ए के राय को राजनीतिक संत कहकर श्रद्धांजलि देनेवालों, एक दिन उनके जैसा बनकर भी तो दिखाओ

धनबाद के दामोदर नदी स्थित मोहलबनी घाट पर एक चिता धू-धू कर जल रही थी, ये चिता थी महान आदर्शवादी, वामपंथी विचारक एवं एक राजनीतिक संत ए के राय की। यह धू-धू कर जलती चिता धीरे-धीरे ए के राय के शव को अपने आगोश में लेकर धू-धू कर जल रही थी, उस चिता के आस-पास हजारों की संख्या में लोग अपने प्रिय नेता ए के राय को श्रद्धांजलि देने के लिए जूटे थे, जिनमें ज्यादा वे लोग थे जो मजदूरी करते है, ए के राय से बहुत ही अनुराग करते थे

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राजनीति

सोनभद्र में आदिवासियों के जनसंहार के खिलाफ रांची में ‘नागरिक प्रतिवाद’ 

सोनभद्र में आदिवासियों के जनसंहार के खिलाफ आज रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम के आह्वान पर विभिन्न सामाजिक जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने नागरिक प्रतिवाद  किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सभी वक्ताओं ने सोनभद्र आदिवासी जनसंहार कांड को देश के संविधान और लोकतन्त्र पर हमला बताते हुए कहा कि वर्तमान सत्ताधारी दल के शासन में आदिवासियों के साथ साथ उनके जल-जंगल-ज़मीन के अधिकारों पर सबसे अधिक हमले बढ़े हैं।

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अपनी बात

संजय सेठ ने की पहल, छोटे स्कूल वैन पर प्रतिबंध समाप्त, रांची के हजारों बच्चें आज नहीं जा सकें स्कूल

रांची में आज हजारों स्कूली बच्चें अपने-अपने स्कूल जाने से वंचित रह गये, क्योंकि उन्हें स्कूल ले जाने के लिए आनेवाले छोटे स्कूली वैन आये ही नहीं, इधर छोटे स्कूली वैन के नहीं आने से इनके अभिभावक भी दिन भर परेशान रहे, उनके सामने चिन्ता इस बात की थी कि जहां उनका घर हैं, वहां बड़ी बसें आ नहीं सकती और जहां बसे आती हैं, वहां से लेकर उनके घर की दूरी दो से तीन किलोमीटर है, ऐसे में वहां तक उनके बच्चे जायेंगे कैसे?

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