Author: Krishna Bihari Mishra

अपराध

PM महिला-सशक्तिकरण की बात करते हैं और इनके विधायक उन्हें सड़क पर लात-घूसों से पीटते हैं

आपको पानी मिल या न मिले, बिजली मिले या न मिले, आपके इलाके में सड़कों पर गंदगी ही क्यों न बिखरी हो, ऐसे हालत में इसकी शिकायत भूलकर भी किसी भाजपा नेता के समक्ष न करें और न इससे मुक्ति पाने के लिए सलाह देने का प्रयास करें, अगर महिला हैं तो आपको और भी सख्त  हिदायत दे दी जाती हैं, नहीं तो पिटाने के लिए या अपना सम्मान गंवाने के लिए तैयार रहे, क्योंकि यह मैं ऐसे ही नहीं कह रहा हूं,

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अपनी बात

शर्मनाक, ईद में भी वेतन नहीं मिला, पारा टीचर मो. सिद्दिकी ने धनबाद में किया आत्मदाह का प्रयास

फिलहाल राज्य सरकार, भाजपा कार्यकर्ता और उनके समर्थक लोकसभा चुनाव में भाजपा को झारखण्ड में मिली अपार सफलता से गदगद हैं, प्रतिदिन नवनिर्वाचित सांसदों के नागरिक अभिनन्दन में स्वयं को झोक रखे हैं, पर किसी को यह नहीं पता कि झारखण्ड के पारा टीचरों के परिवारों पर क्या बीत रही हैं? ईद सर पर हैं, पर उन्हें छः महीने से मानदेय नहीं मिला हैं,

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अपनी बात

अविश्वसनीय नीतीश ने मोदी-शाह को दिया जवाब, मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा को नहीं मिला स्थान

बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन ने आठ नये मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिला दी। नीतीश मंत्रिमंडल में नरेन्द्र नारायण यादव, अशोक चौधरी, श्याम रजक, बीमा भारती, राम सेवक सिंह, लक्ष्मेश्वर राय, संजय झा और नीरज कुमार को शामिल कर लिया गया। ये सारे के सारे जदयू कोटे से हैं। नीतीश मंत्रिमंडल के विस्तार के दौरान भाजपा की ओर से एक भी सदस्य को शामिल नहीं किया गया।

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राजनीति

विधानसभा चुनाव में भाजपा को शिकस्त देने के लिए झामुमो पूरी तरह तैयार – हेमन्त सोरेन

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद झामुमो विधायक दल की बैठक आज रांची में संपन्न हो गई। बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने कहा कि उनकी पार्टी की लोकसभा में हार हुई हैं, पर वे हतोत्साहित नहीं हैं, पूरी पार्टी एक बार फिर जोश के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में लग गई हैं, हम संघर्ष करेंगे और जीतेंगे।

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अपनी बात

रांची के सभी प्रमुख अखबारों ने कहा, CS शरणं गच्छामि, IAS शरणं गच्छामि, रघुवरं शरणं गच्छामि

रांची के प्रमुख अखबारों का हाल देखिये, इनके संपादकों के कार्य देखिये और इनकी पत्रकारिता का भी अवलोकन करिये। कल राज्य के मुख्य सचिव की बेटी की शादी की रिसेप्शन पार्टी थी, और इस शादी के रिसेप्शन को सभी अखबारों ने कलरफुल ढंग से किसी ने पांच, तो किसी ने चार कॉलम में, खबर बना दिया और उसे जनता के बीच परोस दिया।

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अपनी बात

अर्जुन मुंडा की राजनीतिक कैरियर को प्रभावित करने के लिए झारखण्ड में कुछ लोग सक्रिय, मुंडा ने फर्जी खबरों से लोगों को किया सचेत

शायद भाजपा में ही कुछ लोगों को तथा उनके कट्टर राजनीतिक दुश्मनों को अर्जुन मुंडा का मोदी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रुप में शामिल होना, अच्छा नहीं लग रहा। जैसे ही उन्होंने जनजातीय मंत्रालय संभाला हैं, उनके विरोधी भी लगता है, सक्रिय हो गये और बड़ी ही सोची समझी रणनीति के तहत एक ऐसी फर्जी खबर सोशल साइट पर वायरल करवा दी, जो अर्जुन मुंडा ने कही ही नहीं।

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अपनी बात

ये सिर्फ BJP में ही नहीं, बल्कि अन्य पार्टियों ने भी इस प्रकार के कार्य कर अपने पक्ष में तालियां बटोरी हैं

ये सिर्फ भाजपा में ही नहीं होता, बल्कि बहुत सारी पार्टियों ने भी इस प्रकार के कार्य कर अपने पक्ष में तालियां बटोरी हैं, ये अलग बात है कि आप उनके द्वारा किये गये अच्छे कामों को इस फेसबुक और व्हाट्सएप युग में भूल गये। पर याद रखिये जब आप अन्य पार्टियों के द्वारा किये गये अच्छे कामों को भूलते चले जायेंगे, तो यकीन मानिये आप एक व्यक्ति अथवा उस पार्टी विशेष के गुलाम हो जायेंगे,

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अपनी बात

जिसने नीतीश पर किया विश्वास, उसने खाया धोखा, नीतीश भारतीय राजनीति के सर्वाधिक अविश्वसनीय नेता

नाम जनता दल यू, पर सही में ये जनता दल यू हैं क्या? सच्चाई है कि यह भी राष्ट्रीय जनता दल व समाजवादी पार्टी के जैसा ही पार्टी है, ये अलग बात है कि उन पार्टियों में पारिवारिक फार्मूला ज्यादा टिकता है, यहां सिर्फ और सिर्फ नीतीश फार्मूला टिकता है, आखिर नीतीश फार्मूला है क्या? इसको समझने के लिए संस्कृत की एक सूक्ति ही काफी है, “एकोsहं, द्वितीयोनास्ति।”

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अपनी बात

कुछ अच्छी बातें अपने दुश्मनों से भी सीख ली जाये, तो क्या हर्ज है? पर क्या भाजपा विरोधी पार्टियां सीख पायेंगी?

भाजपा ने एक बार फिर अकेले 303 सीटें जीतकर सिद्ध कर दिया, कि उसकी ग्राह्यता पूरे देश में अब भी प्रभावी है, कुछ इलाकों में जहां ग्राह्यता नहीं थी, वहां पर भी भारी भरकम जीत ने सारे रिकार्डों को ध्वस्त कर दिये। हमें याद है, जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार बने और संसद में विश्वास मत को लेकर बहस हुए, तो एक स्वर से सभी ने अटल बिहारी वाजपेयी की प्रशंसा की थी पर उनकी पार्टी भाजपा को सांप्रदायिक बताते हुए, उनकी कटु आलोचना भी की थी।

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अपनी बात

लोकतंत्र की खुबसूरती विपक्ष से है, विपक्ष को नजरंदाज करने का खामियाजा जनता को ही भुगतना पड़ेगा

पूरी दुनिया में जो भी देश लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाये हुए हैं, उन देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था वहीं मजबूत हुई, जहां विपक्ष मजबूत हैं, नहीं तो सत्तापक्ष के मनमानेपन रवैये से लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही गहरा आघात लगता है, चूंकि भारत में एक नई प्रकार की लोकतांत्रिक व्यवस्था है, यहां की जनता किसी पर भरोसा करती हैं, तो उसे छप्पड़ फाड़ कर दे देती हैं, और जिससे नाराज होती है, तो उसे धूल चटा देती है।

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