ये सिर्फ BJP में ही नहीं, बल्कि अन्य पार्टियों ने भी इस प्रकार के कार्य कर अपने पक्ष में तालियां बटोरी हैं

ये सिर्फ भाजपा में ही नहीं होता, बल्कि बहुत सारी पार्टियों ने भी इस प्रकार के कार्य कर अपने पक्ष में तालियां बटोरी हैं, ये अलग बात है कि आप उनके द्वारा किये गये अच्छे कामों को इस फेसबुक और व्हाट्सएप युग में भूल गये। पर याद रखिये जब आप अन्य पार्टियों के द्वारा किये गये अच्छे कामों को भूलते चले जायेंगे, तो यकीन मानिये आप एक व्यक्ति अथवा उस पार्टी विशेष के गुलाम हो जायेंगे,

ये सिर्फ भाजपा में ही नहीं होता, बल्कि बहुत सारी पार्टियों ने भी इस प्रकार के कार्य कर अपने पक्ष में तालियां बटोरी हैं, ये अलग बात है कि आप उनके द्वारा किये गये अच्छे कामों को इस फेसबुक और व्हाट्सएप युग में भूल गये। पर याद रखिये जब आप अन्य पार्टियों के द्वारा किये गये अच्छे कामों को भूलते चले जायेंगे, तो यकीन मानिये आप एक व्यक्ति अथवा उस पार्टी विशेष के गुलाम हो जायेंगे। 

जो चाहते है कि आप उनके इशारों पर नाचें, जब वे आपको जो कहें, और आप करते चले जायें, ऐसे में हो सकता है कि आपको कुछ, थोड़े से पल के लिए आनन्द की प्राप्ति हो जाये, पर निःसंदेह आपको भविष्य में दुखों का सामना करना ही पड़ेगा, इसे आप गांठ बांध लीजिये।

इन दिनों एक तस्वीर बहुत जोरों से वायरल हो रही हैं। यह तस्वीर है पहली बार ओड़िशा के बालेश्वर से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते प्रताप चंद्र षडंगी की, जनाब अब मोदी सरकार में राज्य मंत्री भी बन चुके हैं, बताया जाता है कि उनकी सरलता व सादगी ही उनकी पहचान है। प्रताप चंद्र षड़ंगी की कुल चल-अचल संपत्ति करीब 13 लाख है।

उन्होंने बीजद के करोड़पति प्रत्याशी जिनकी संपत्ति करीब 72 करोड़ हैं, उन्हें हराया। इसी सीट पर एक और प्रत्याशी थे, जो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े, उनकी चल-अचल संपत्ति 104 करोड़ रुपये की है। हमेशा सफेद कुर्ता पायजामा और हवाई चप्पल तथा कंधे पर झोले लटका कर चलना, इनकी पहचान है। दो बार विधायक रहने के बावजूद उनके पास कोई अपना वाहन नहीं है।

कमाल है, जिस भाजपा के लोग और उनके समर्थक, प्रताप चंद्र षड़ंगी की सादगी को लेकर ढोल पीट रहे हैं, जरा उन्हीं से पूछिये कि उन्हीं की तरह उनके अन्य नेता क्यों नहीं जिंदगी जी रहे हैं, स्वयं जो संघ के वरीय पदों को सुशोभित कर चुके हैं और जो वर्तमान में राजनीति के चरमोत्कर्ष पर हैं, उनकी सादगी आज कहां चली गई, कल तक दो जोड़ी कमीज और पायजामा पर जीवन व्यतीत करनेवाले लोग, आज एक विशेष या सामान्य समारोहों के लिए भी अलग प्रकार का ड्रेस क्यों बनवा रहे हैं? क्या है इसका जवाब, चिन्तन करिये, समझने की कोशिश करिये और लोगों को भी समझाएं।

इसी झारखण्ड के धनबाद में, सरलता व सादगी की प्रतिमूर्ति है मार्क्सवादी समन्वय समिति के वरिष्ठ नेता ए के राय, क्या उनके पसंगे के बराबर भी भाजपा में आज कोई नेता है, जरा जाकर देखिये उन्हें, कितनी सरलता से रहते हैं, वे तीन-तीन बार विधायक रहे, तीन-तीन बार सांसद रहे, पर आज तक न तो उन्होंने वेतन ली और न ही पेंशन, आज भी उनके चाहनेवाले जो उनके सामने परोस देते हैं, ग्रहण कर लेते हैं, सामान्य ढंग से जीवन जी रहे हैं, जिंदगी और लोगों से कोई शिकायत नहीं, और जो भी बोला सत्य ही बोला, डंके की चोट पर बोला, क्या इनकी सादगी का कोई मोल नहीं।

इसी देश में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री हुए, क्या उनकी सादगी की बराबरी कोई भाजपा का नेता कर सकता है, जरा देखिये प्रधानमंत्री रहते हुए भी साधारण धोती और कुर्ते में जिंदगी गुजार दी, दूसरे देश की यात्राओं पर गये तो लोग उनकी सादगी को देखकर, अचंभित रह गये, जब उनकी पत्नी ने एक बार कहा कि अब तो आप प्रधानमंत्री बन गये, अब एक अपने लिए नई धोती व नये कुर्ते क्यों नहीं ले लेते, ऐसे भी धोती और कुर्ते फटे से दीख रहे हैं, लाल बहादुर शास्त्री कहते है कि हमारे देश में आज भी बहुत सारे लोग हैं, जिनके पास पहनने को कुछ भी नहीं। लाल बहादुर शास्त्री की सच्चाई और सादगी के किस्से तो सुन-सुनकर हम जवान हुए और अब बुढ़ापे की ओर अग्रसर है।

इसी एकीकृत बिहार में एक नेता लालू प्रसाद यादव ने सामाजिक न्याय की ऐसी गंगा बहाई कि उस गंगा में कई लोगों ने डूबकी लगाई, और वैतरणी पार कर गये, पर खुद लालू प्रसाद यादव भ्रष्टाचार की गंगोत्री में ऐसे फंसे कि उनके निकलने की संभावना कहीं दिख नहीं रही, पर हमें पूरा भरोसा है कि जैसे आजादी के पहले किसी अंग्रेज को सजा नहीं हुई, चाहे वह जनरल डायर ही क्यों न हो।

जैसे आजादी के बाद किसी नेता को न्यायालय ने सजा नहीं सुनाई और अगर कोई निचली अदालत ने सजा सुनाई भी तो उपरि अदालत ने उन्हें आखिरकार उन सजाओं से मुक्त कर ही दिया, लालू यादव भी मुक्त हो जायेंगे, क्योंकि हमें भारतीय न्याय-व्यवस्था पर पूरी श्रद्धा हैं,  क्योंकि अपने देश में नेता कभी गलत नहीं हो सकता। खैर ये तो लालू प्रसाद यादव की बात रही। यहीं लालू प्रसाद यादव ने कभी पत्थर तोड़नेवाली महिला, एक दलित महिला भगवतिया देवी को गया से लोकसभा भेज दिया था।

कहने का तात्पर्य यह है कि इस देश में पहली बार ऐसे सांसद नहीं बने, जो सादगी की प्रतिमूर्ति है, ऐसे और भी कई लोग हैं, आपके आस-पास में भी हैं, उन पर नजर दौड़ाइये, बहुत मिलेंगे। आपको ऐसे-ऐसे लोग मिलेंगे, जो किसी राजनीतिक दलों के नेताओं का छुआ हुआ पानी तक नहीं पिया, गिफ्ट तक नहीं लिए, जो भी ईश्वर ने दिया, उसी में संतोष कर जी रहे, आज भी उन पर सरकार और उनके लोग अत्याचार कर रहे हैं, पर वे झूक नहीं रहे, अपना काम कर रहे हैं, ऐसे लोगों की संख्या बहुत हैं, उन्हें भी सम्मान करिये, देखियेगा एक न एक दिन अपना देश जरुर सादगी को अपनायेगा। ये मत भूलिये, इस देश की पहचान ही सादगी है, न कि सूट-बूट टाइ लगाकर, फैशन में चूर रहकर, मेक-अप करनेवाला व्यक्ति या नेता।

Krishna Bihari Mishra

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