जिन्हें ‘योग’ का एबीसीडी नहीं पता, वे योग करने का दावा और कुछ इस पर फतवे भी दे देते हैं

अगर कोई योग को लेकर फतवा जारी करता है, तो उसकी मूर्खता पर गुस्साइये नहीं, बल्कि हंसना सीखिये, क्योंकि उसे पता ही नहीं कि योग क्या है? और ये भी सच्चाई है कि दुनिया का कोई जीव बिना योग किये नहीं रह सकता, अगर वह ईश्वर को प्राप्त करना चाहता है। ईश्वर को प्राप्त करने के लिए उसे योग करना ही पड़ेगा, योग के शरण में जाना ही पड़ेगा, दुनिया का कोई भी इंसान बिना योग के ईश्वर को प्राप्त किया ही नहीं, ये शाश्वत सत्य है।

न तो कसरत योग है और न ही कसरत कभी योग हो सकता है। रामदेव जो आजकल योगगुरु या बाबा रामदेव के नाम से जाने जाते है, या आजकल भारत के प्रमुख उद्योगपतियों में शुमार है, वे भी योग नहीं करते, बल्कि कसरत करते/कराते हैं और इसी कसरत में किसी को कुछ शारीरिक बीमारी या दर्द ठीक हो गई तो इसका मतलब ये नहीं कि योग से वह शारीरिक बीमारी या दर्द ठीक हो गया। कभी किसी के पेट में दर्द हो गया और तकिये का सहारा लेने के बाद अगर वह पेट की दर्द में उसे राहत महसूस हो रहा है या उसे आराम मिल गया तो इसका मतलब ये नहीं हो गया कि तकियासन योग करने से पेट दर्द में आराम मिल गया और आप पेट दर्द से बचने के लिए तकियासन योग शुरु कर दें।

अगर कोई योग को लेकर फतवा जारी करता है, तो उसकी मूर्खता पर गुस्साइये नहीं, बल्कि हंसना सीखिये, क्योंकि उसे पता ही नहीं कि योग क्या है? और ये भी सच्चाई है कि दुनिया का कोई जीव बिना योग किये नहीं रह सकता, अगर वह ईश्वर को प्राप्त करना चाहता है। ईश्वर को प्राप्त करने के लिए उसे योग करना ही पड़ेगा, योग के शरण में जाना ही पड़ेगा, दुनिया का कोई भी इंसान बिना योग के ईश्वर को प्राप्त किया ही नहीं, ये शाश्वत सत्य है।

तो फिर योग क्या हैं?

महान ऋषि पतन्जलि के योग सूत्र को हम देखे तो पायेंगे…

कि उनके द्वारा दिये गये योगसूत्र में लिखा है…

योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः

अर्थात्, चित्त को विभिन्न वृत्तियों अर्थात् आकारों में परिणत होने से रोकना ही योग है,

आखिर यह कैसे संभव है…

यह संभव है, जब हम योग करते है, तो निरोध की अवस्था में द्रष्टा पुरूष अपने अपरिवर्तनशील स्वरूप में अवस्थित रहता है, जबकि निरोध की अवस्था छोड़कर दूसरे समय में द्रष्टा वृत्ति के साथ एकरूप होकर रहता है।

अब राफिया नाज या बाबा रामदेव बताएं कि क्या वे पतंजलि के इस सूत्र में स्वयं को समाहित कर चुके हैं? क्या टीवी अथवा अखबारों में काम करनेवाले पत्रकारों को पतंजलि के इस योगसूत्र की परिभाषा या वैशिष्ट्यता मालूम है? और जब मालूम नहीं हैं तो फिर ये बेतलब का बवाल पूरे राज्य या देश में क्यों फैला रहे?

इसका मतलब है कि न तो इन्हें योग से मतलब है और न ही राफिया नाज से, इन्हें तो मतलब है कि इसके नाम पर जो दुकानदारी चल रही है, उसका फायदा कैसे उठाया जाये।

चूंकि अपना देश धर्म के नाम पर ज्यादा संवेदनशील है। ये सच्चाई है कि भारत में 98 प्रतिशत लोग धर्म के मूल स्वरुप को जानते ही नहीं और न जानने की कोशिश करते हैं, इन 98 प्रतिशत लोगो को एक प्रतिशत बेवकूफ उल्लू बनाने का ठेका लेते हैं और जो एक प्रतिशत बचे, वे इन सबसे अलग ईश्वर की प्राप्ति के लिए निरंतर ध्यान में लगे रहते हैं, क्योंकि वे धर्म के मूल स्वरुप को जानते हैं। जरा देखिये, बेवकूफ बनानेवाले लोगों की हरकतों का कारनामा और चैनलों के टीआरपी का खेल, अपने देश में किसी मुस्लिम लड़की ने थोड़ा बहुत कसरत क्या कर लिया तो लो हो गया बवाल, मिल गया पत्रकारों को मसाला, कोई न कोई बेवकूफ या मूर्ख मिल ही जायेगा, जिसको लगेगा कि इससे इस्लाम खतरे में हैं, और उसका विरोध करने वाले भी मिल जायेंगे, ईंट-पत्थर चलाने में तो अपने देश के लोग माहिर है ही, और जब सब कुछ हैं तो नेता व पुलिस भी तैयार ही हैं, फसल को काटने और कटवाने के लिए, तो फिर क्या हैं, दुकानदारी शुरु, अमन – चैन खत्म, बिना मतलब की बातों पर बहस शुरु।

राफिया ने योग किया, योग करने से इस्लाम खतरे में आ गया, टीवी पर चलना शुरु, जाहिलों की जमात जो पहले से ही इन टीवीवालों का समूह बुक किये रहता है, चल दिये बेमतलब का बेल तोड़ने। इधर ये सब घटनाएं क्या घटी? राजनीतिज्ञों की बल्ले-बल्ले हो गई, क्योंकि जब- जब ऐसी घटनाएं घटती है, तो सर्वाधिक फायदा इन्हीं को होता हैं, वे शुरु हो गये, पर इन बेवकूफों को कौन समझाएं, कि फिलहाल सत्ता और अखबारों व चैनलों के बीच महागठबंधन हो गया है, जो 2019 तक तो चलना ही चलना है, ऐसे में जब तक इस प्रकार की जाहिलपन वाली घटनाएं नहीं घटेंगी, और पत्रकार मसाला डालकर जनता के सामने इसे नहीं परोसेंगे तो फिर सत्ता में पुनः वापसी कैसे होगी?  इसलिए आइये मिलकर ऐसे बेकार की बातों पर सारा दिमाग लगायें और पुनः 2019 में भाजपा को सत्ता में लाएं।

मैं तो कहता हूं कि चैनलवालों/अखबारवालों, अगर योग पर तुम्हें इतनी ही माथा पच्ची करनी है और सत्य दिखाना है तो क्यों नही चले आते, देवघर स्थित रिखिया आश्रम जहां एक से एक योग के जानकार संन्यासियों व योगियों का समूह योग द्वारा ईश्वरानुभूति का परम आनन्द प्राप्त कर रहा हैं, क्यों नहीं चले जाते योगदा आश्रमों में जहां संन्यासियों का समूह योग से स्वयं ही नहीं बल्कि पूरे समाज को अनुप्राणित कर रहा हैं, क्यों देश व समाज में विघटनकारियों के लिए फसल तैयार कर रहे हो तुम।

मैं तो आह्वान करुंगा पूरे देश से कि जब कभी टीवी पर ऐसे कार्यक्रम चल रहे हो, जिनमें बेसिर-पैर कि बात करनेवाले मूर्खों का समूह दिखायें पड़ें तो आप टीवी थोड़ी देर के लिए बंद कर दें, अगर टीवी देखना नहीं बंद कर सकते हैं, तो उस समय कम से कम कोई पुरानी अच्छी फिल्में ही देख लें, कम से कम आपका दिमाग खराब तो नहीं ही होगा और उससे देश को नुकसान तो नहीं होगा।

Krishna Bihari Mishra

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