बेटिकट यात्रा करनेवाले गुंडों के रहमोकरम पर, शुरु होती हैं रांची जंक्शन से रेलयात्रियों की रेलयात्रा

भारतीय रेल के सलोगन ‘यात्रा मुस्कान के साथ’ के झांसे में जब आयेंगे, तब आप मुसीबत में ही पड़ेंगे, इसलिए मुस्कान को घर पर छोड़ आइये और यात्रा के दौरान ट्रेन में सवार गुंडों के रहमोकरम पर रेल यात्रा करिये, अगर आप गुंडों से टकरायेंगे और ये सोचेंगे कि आरपीएफ के लोग, आपको बचाने आयेंगे, आपको सुरक्षित यात्रा कराने में सहयोग करेंगे, तो इसका मतलब है कि आप निहायत आला दर्जे के मूर्ख है।

भारतीय रेल के सलोगन ‘यात्रा मुस्कान के साथ’ के झांसे में जब आयेंगे, तब आप मुसीबत में ही पड़ेंगे, इसलिए मुस्कान को घर पर छोड़ आइये और यात्रा के दौरान ट्रेन में सवार गुंडों के रहमोकरम पर रेल यात्रा करिये, अगर आप गुंडों से टकरायेंगे और ये सोचेंगे कि आरपीएफ के लोग, आपको बचाने आयेंगे, आपको सुरक्षित यात्रा कराने में सहयोग करेंगे, तो इसका मतलब है कि आप निहायत आला दर्जे के मूर्ख है।

वह मैं इसलिए कह रहा हूं कि आप की यात्रा जहां से शुरु हुई और जहां तक आपको यात्रा करनी है, उस यात्रा के दौरान स्टेशन तो आपको मिलेंगे, पर कोई सुरक्षाकर्मी या कोई रेलकर्मी नहीं मिलेगा, जिस टीटीई की ड्यूटी भी रहेगी तो वह अपनी जान बचाने के लिए किसी एसी बॉगी के कोने में कोर्ट उतारकर दुबका होगा, क्योंकि आप तो कभी-कभार रेलयात्रा करेंगे और बेचारे टीटीई को तो रोज ऐसे लोगों को झेलना हैं।

कल यानी 22 अक्टूबर की बात है, रांची से पटना की ओर जानेवाली 12366 डाउन रांची पटना जनशताब्दी एक्सप्रेस अपने नियत समय 2.25 दोपहर में, रांची जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर तीन से खुली। ट्रेन खुलने के पूर्व ही पचास-साठ की संख्या में बिना टिकट यात्रा करनेवाले गुंडों का समूह ट्रेन के किसी एक बॉगी को कब्जे करने की फिराक में था, जिसे देखकर इस ट्रेन से यात्रा करनेवाले यात्रियों के हाथ-पांव फूल गये।

ट्रेन के खुलने के दो मिनट पहले ही, सभी ट्रेन के बॉगी नंबर डी 12 एवं डी 13 में प्रवेश कर गये, तथा अपने-अपने सीट पर बैठे रेलयात्रियों को तंग करना शुरु किया, भीड़ में से एक ने कहा कि जितने लोग हो, सभी सीट पर बैठ जाओ, फिर क्या था, सभी ने अपने-अपने सीटों पर बैठे लोगों को खिसका कर, अनुचित ढंग से बैठकर, रेलयात्रियों को परेशान करना प्रारम्भ किया, रेलयात्रियों को लगा कि आनेवाले समय में मुरी स्टेशन पर जब टीटीई या आरपीएफ के जवान दिखेंगे तो शिकायत करेंगे, पर कोई नजर ही नहीं आया।

इसी बीच दो लड़कियां बोकारो में डी 12 नंबर बॉगी में चढ़ी, जिस पर अवैध यात्रा कर रहे गुंडों ने फब्तियां कसनी शुरु कर दी। बार-बार फब्तियां कसने से परेशान लड़कियों ने कई बार, इन गुंडों को चेताया, पर क्या मजाल इन गुंडों पर कोई असर पड़े। गाड़ी इसके बाद चंद्रपुरा होते हुए जैसे ही गोमो जंक्शन पहुंची, गोमो स्टेशन पर इस बॉगी में सवार हो रहे, रेलयात्रियों के साथ इन गुंडों ने बदतमीजी की।

पचास-साठ की संख्या में चढ़े इन गुंडों से रांची से पटना तक इस ट्रेन से यात्रा कर रहे लोग परेशान दीखे, पर इनकी परेशानी को कम करनेवाला, इन 412 किलोमीटर की दूरी तय करने के बावजूद कही दिखाई नहीं पड़ा, लोग मॉब लीचिंग के कही शिकार न हो जाये, इस डर से खुद को एडजस्ट करते रहे, उनकी गंदी हरकतों को देखते रहे, सहते रहे, पर एक शब्द नहीं बोले, क्योंकि उन्हें इस बात का डर सता रहा था कि कहीं ये सभी मिलकर, उन पर हमला न कर दें, क्योंकि कई बार इन गुंडों ने ऐसी वारदात करने की धमकी दी थी।

अब सवाल उठता है कि रांची रेल मंडल बताये कि जब उसकी ट्रेन रांची से रवाना हो रही है, तो ट्रेन रवाना होने के पूर्व, उसके स्टेशन से रेलयात्री बिना भय के यात्रा प्रारम्भ कर सकें, इसके लिए क्या तैयारी की हैं? क्या रेलयात्री भय के साये में रेलयात्रा करेंगे? क्या रांची रेल मंडल सीसीटीवी खंगालकर, यह देखने का प्रयास करेगी कि वे कौन लोग थे? जिन्होंने रेलयात्रियों को परेशानी में डाला, और बार-बार उन्हें परेशानी में डालते रहे, क्या जो लोग वैध टिकट लेकर यात्रा कर रहे थे? वे मूर्ख हैं और जो बिना टिकट के यात्रा कर रहे हैं, वे बहुत तेज हैं, वे गुंडे अपनी ताकत के बल पर, रेलयात्रियों को परेशान करेंगे। अगर ऐसा ही है तो फिर ‘यात्रा मुस्कान के साथ’ का बोर्ड हटाइये और लिखिये ‘यात्रा दर्द भरी दास्तान के साथ’।

Krishna Bihari Mishra

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