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रांची में EC के निर्देशों की खुली अवहेलना, आचार संहिता लागू होने के बावजूद BJP के दिवार लेखन को जिला प्रशासन ने नहीं हटाया

देश में आचार संहिता लागू हुए पूरे सात दिन बीत गये, पर रांची में आचार संहिता का उल्लंघन बदस्तूर जारी है, आज भी रांची में कई स्थानों/जगहों के दीवारों पर सत्तारुढ़ दल यानी भाजपा नेता द्वारा कभी पूर्व में किये गये दीवार लेखन बड़े पैमाने पर दीख रहे हैं, जो भाजपा के प्रचार-प्रसार में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। आश्चर्य तो यह है कि भाजपा के एक नेता द्वारा किये गये ये दिवार लेखन, मंदिरों के दीवारों यानी सार्वजनिक स्थलों पर स्पष्ट रुप से दिखाई पड़ रहे हैं,

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झारखण्ड में भाजपा के लिए माहौल ठीक नहीं, नेताओं के चेहरे पर उड़ रही हवाइयां, कार्यकर्ताओं में भी उत्साह की कमी

लगातार भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में मीटिंग का दौर चल रहा हैं, कभी प्रदेश संगठन धर्मपाल तो कभी प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा बैठक ले रहे हैं,  और बैठक में वे लोग इनको घेर कर बैठ रहे हैं, जो भाजपा के लिए एक वोटर तक तैयार नहीं कर सकते, जो एक कार्यकर्ता तक को तैयार नहीं कर सकते। आश्चर्य हैं खुब गप्पे हो रही हैं, मैदान मार लेने की बात की जा रही हैं, हवाई किले बनाये जा रहे हैं, पर सच्चाई कुछ दुसरा ही हैं,

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वामदलों का एक ही मकसद भाजपा हराओ, पांच सीटों पर लड़ेंगे और बाकी सीटों पर अन्य दलों को देंगे समर्थन

भाकपा माले राज्य कार्यालय में आज सभी प्रमुख वामदलों की आवश्यक बैठक संपन्न हो गई। बैठक में सभी ने निर्णय लिया कि इस बार उनका मकसद सिर्फ भाजपा को परास्त करना है और इसके लिए सभी एकजुट होकर काम करेंगे। वामदलों का कहना था कि जिन-जिन झारखण्ड के लोकसभा सीटों पर उनका पलड़ा भारी है, वहां वे अपना कैंडिडेट देंगे तथा आशा करेंगे कि जो भाजपा विरोधी पार्टियां हैं,

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पुलवामा के बाद, कोई अपने बेटे के रिसेप्शन तीन-तीन जगह कराने में मस्त, तो कोई शहीदों के परिवारों को आनन्द देने में मस्त

भाई दुनिया में एक से एक आदमी है, एक से एक संस्था है, अगर कोई चाह लें कि किसी को मदद करना हैं, तो भला उसकी चाह को कौन रोक सकता हैं, कहा भी गया है, जहां चाह वहां राह और जो कभी अच्छा चाहा नहीं, वह भला किसी का क्या भला चाहेगा? फिलहाल कश्मीर के पुलवामा में जो घटना घटी, उससे कई देशवासी अभी भी व्यथित हैं, कई भारतीय परिवार तो उस हिंसक घटना से प्रभावित शहीद परिवारों के साथ आज भी तन-मन-धन के साथ खड़े हैं,

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चीन लगातार चौथी बार 130 करोड़ भारतीयों के मुंह पर मारा करारा तमाचा, फिर भी भारतीयों की नींद नहीं टूट रही

जिस देश के लोगों में गैरत नाम की चीज नहीं होती, उस देश के लोगों को चीन और पाकिस्तान जैसा चिरकूट देश इसी प्रकार जूतियाता हैं, और वह देश जब तक पूरी तरह नष्ट नहीं हो जाता, जूते खाता हुआ जीवन व्यतीत करता हैं। भारत से बहुत ही छोटा हैं जापान, जहां के नागरिक और वहां की सरकार देश-प्रेम से ऐसे ओत-प्रोत होते हैं कि वे चीन की छाती पर हमेशा कील ठोकते रहते हैं और चीन की हिम्मत नहीं होती कि वह जापान को आंख तरेर कर भी देख सकें।

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देश में पहली बार शिशु हत्या और परित्याग को लेकर सिटिजन्स फाउंडेशन और पा-लोना ने की परिचर्चा आयोजित

हमारा मौजूदा  सिस्टम शिशु हत्या और परित्याग को रोकने के लिए कितना सक्षम है, हम उसका बेहतर इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं, इस लड़ाई में हमारे स्टेकहोल्डर्स कौन-कौन हो सकते हैं, ये तय करना बहुत जरूरी है। उक्त बातें आईसीपीएस डाईरेक्टर डी.के. सक्सेना ने कहीं। वह पा-लो ना और सिटिजन्स फाउंडेशन्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे।

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ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम ने जानेमाने एक्टिविष्ट पत्रकार ललित मुर्मू और पुष्पगीत को दी मौन श्रद्धांजलि

ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम द्वारा झारखण्ड के जाने माने एक्टिविष्ट पत्रकार, जनआंदोलनकारी व सामाजिक कार्यकर्ता ललित मुर्मू के असामयिक निधन पर एक स्मृति सभा का आयोजन रांची के भाकपा माले कार्यालय स्थित महेन्द्र सिंह स्मृति भवन में आयोजित किया गया। जहां ललित मुर्मू की तस्वीर पर माल्यार्पण कर, उन्हें व युवा पत्रकार पुष्पगीत के सम्मान में मौन श्रद्धाजंलि अर्पित की गई।

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बड़ी कम समय में, एक अलग छाप बना ली थी, पत्रकार पुष्पगीत ने, कई पत्रकारों ने दी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि

महत्वपूर्ण यह नहीं कौन कितने दिन जिया, महत्वपूर्ण तो यह है कि वह जितने दिन जिया, कैसे जिया। रांची के हर अच्छे पत्रकारों के दिल में धड़कने वाले पुष्पगीत आज हमारे बीच नहीं हैं. पूरा पत्रकार समाज ही नहीं, बल्कि वे सारे लोग दुखी हैं जो किसी न किसी प्रकार से उनसे जुड़े थे, आज उनके मानवीय गुणों की सर्वत्र चर्चा हो रही है।

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जिनके पास प्रतिभा नहीं होती, वह तेजस्वी की तरह टीवी डिबेट से दूर रहने का विपक्ष से अनुरोध करता है

पता नहीं आजकल के नेताओं व पत्रकारों को क्या हो गया हैं? वे जनता को या अपने मतदाताओं को इतना बेवकूफ क्यों समझते हैं? शायद उन्हें आभास हो गया है कि वर्तमान में चैनलों का जो रुख हैं, उससे कहीं उनका नुकसान न हो जाये, जबकि सच्चाई यह है कि जनता खूब जानती है कि मीडिया कैसे और कब-कब किसके इशारे पर डांस कर चुकी हैं और कौन-कौन नेता अपने इशारे पर इन्हें डांस करवाया है।

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CM रघुवर के बेटे के शाही रिसेप्शन में कई लोगों को नहीं मिला खाना, कई पत्रकारों ने लिया रेस्टोरेंट का सहारा

10 मार्च को जमशेदपुर में मुख्यमंत्री रघुवर दास के बेटे ललित दास की शादी के रिसेप्शन की एक छोटी सी विडियो खूब वायरल हो रही है, जो विद्रोही 24.कॉम के हाथ भी लगी है, इस विडियो में साफ दिख रहा है कि सीएम रघुवर के बेटे के रिसेप्सन में भाग लेने के लिए आये लोग खाली प्लेट लेकर विभिन्न स्टॉलों पर दौड़ लगा रहे हैं, पर उन्हें भोजन नहीं मिल रहा, हार-थक कर वे घर लौट रहे हैं,

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