किसी ने धूम-धड़ाके, तो किसी ने सादगी, तो किसी ने इस बार होली खेली ही नहीं
आज होली है। होली यानी उमंग-उत्साह, धूम-धड़ाके का पर्व। कही ढोल-नगाड़े बज रहे हैं, कही झाल-करताल और सभी पर एक ही राग, फगुआ गीत-होली गीत। सभी मस्ती में है। घर के रसोई से लेकर बाहर के बातावरण तक मस्ती ही मस्ती है। मस्ती हो भी क्यों न? सालाना पर्व है, मस्ती का पर्व है, ऐसे में हम मातम क्यों मनाएं? क्यों न झूम जाये, क्योंकि सुप्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन ने कहा है कि जो बीत गई सो बात गई,
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