प्रभात खबर यानी मैं चाहे वो करुं, मैं चाहे जो करुं, मेरी मर्जी, यानी चुनाव प्रचार थमे या न थमे, वो थमवा देगा

प्रभात खबर हिन्दी अखबारों में देश का पांचवां सबसे बड़ा अखबार बन चुका है, साथ ही वह झारखण्ड का नंबर वन तथा प.बंगाल और बिहार में उसका दूसरा स्थान है, आज इस संबंध में खुद उसने समाचार व विज्ञापन भी प्रकाशित किया है, और इसी खुशी में उसने पृष्ठ संख्या 8 पर अपने राजपाट प्रभात नामक विशेष पृष्ठ पर गजब का समाचार प्रकाशित कर दिया है।

प्रभात खबर हिन्दी अखबारों में देश का पांचवां सबसे बड़ा अखबार बन चुका है, साथ ही वह झारखण्ड का नंबर वन तथा .बंगाल और बिहार में उसका दूसरा स्थान है, आज इस संबंध में खुद उसने समाचार व विज्ञापन भी प्रकाशित किया है, और इसी खुशी में उसने पृष्ठ संख्या 8 पर अपने राजपाट प्रभात नामक विशेष पृष्ठ पर गजब का समाचार प्रकाशित कर दिया है। उसने अपर लीड में हेडिंग दी है “पहले चरण का प्रचार थमा, 29 को मतदान”, सब हेडिंग दी है – “प्रत्याशी और राजनीतिक दल अब केवल जनसंपर्क कर ही मतदान की कर सकेंगे अपील।”

जबकि सच्चाई यह है कि जहां की यह प्रभात खबर बात कर रहा हैं, वहां अभी भी चुनाव प्रचार चल रहा हैं, चुनाव प्रचार अभी थमा नहीं है, बल्कि आज शाम को चुनाव प्रचार थमेगा, अभी भी प्रत्याशी और राजनीतिक दलों का समूह अपना विशेष जनसम्पर्क अभियान चला रखा है। रही बात केवल जनसम्पर्क की तो यह काम आज शाम से शुरु होगा।

इस अखबार को अगर आप ध्यान से देखें तो उस खबर के अंदर में कहीं कोई गड़बड़ियां नहीं हैं, पर हेडिंग देखेंगे तो आपके दिमाग का बत्ती बुझना तय है, इस अखबार की यह कोई पहली घटना नहीं है, यहां इस प्रकार की गड़बड़ियां बराबर देखने को मिलती है, चूंकि जब आप आगे बढ़ते हैं, और आपको एक नंबर पर रहने का गर्व का बोध होने लगता है और आप गलत को सही तथा सही को गलत कहने का दम भरने लगते हैं तो इस प्रकार की गलतियां होने लगती है।

अभी इसी अखबार का एक संपादक, एक समाचार को लेकर, गर्व का बोध कर रहा है कि उसने फलां व्यक्ति को लेकर दो पेज विशेष छापे थे, पर वो भूल रहा है कि उसी समाचार पर कभी विद्रोही24.कॉम उसकी बैंड बजा चुका है, अगर आप विद्रोही24. ब्लॉगस्पाट.कॉम में उस समाचार को प्रभात खबर नाम से सर्च करें तो वह खबर से संबंधित बातें आराम से मिल जायेगी, आप प्रभात खबर द्वारा उस व्यक्ति के महिमामंडन की पोल खुलता उसमें आराम से देख सकते हैं।

दरअसल हमारे यहां पत्रकारिता क्षेत्र में एक बहुत बड़ी गिरावट आई हैं, जो अखबार या चैनल से जूड़े लोग हैं, उन्हें इस बात का गर्वबोध हो गया है कि वे इस जगत के परमेश्वर हो चुके हैं, उन पर कोई अंगूली नहीं उठा सकता, इसलिए वे जो लिख दिये, वह ब्रह्मवाक्य हो गया और फिल्म शोले की तरह, वीरु जय से – जय मैंने कुछ ज्यादा तो नहीं बोल दिया, जय वीरु से – जब बोल ही दिया, तो देख लेंगे, वाली बात चरितार्थ हो रही है, ऐसे भी जब इस अखबार ने हेंडिंग दे ही दिया कि चुनाव प्रचार समाप्त, तो क्या हो गया, वो अखबार देख लेगा, मतलब समझ गये न।

Krishna Bihari Mishra

Next Post

सन् 2019 की ललकार, दिल्ली में मोदी सरकार, या स्टॉप हो गई मोदी सरकार?

Sat Apr 27 , 2019
ये कहानी है 1977 की, उस वक्त मैं सिर्फ दस साल का था। पूरे उत्तर भारत में जनता लहर थी, जब चुनाव परिणाम आये थे, तो उत्तर प्रदेश की सभी 85 सीटों और बिहार की सभी 54 सीटों पर जनता पार्टी का कब्जा हो गया था, उस जनता लहर में सारी वामपंथी पार्टियां और कांग्रेस का सफाया हो गया था। 24 अप्रैल को जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोहरदगा की चुनावी सभा में कहा कि “लहर नहीं ललकार है”, तब मुझे वो नारा फिर से याद आ गया,

You May Like

Breaking News