अपनी बात

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जो आप 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के दिन करेंगे, वह केवल व्यायाम है, न कि योग

इसमें कोई दो मत नहीं कि जो आप 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के दिन करेंगे, वह केवल व्यायाम है, न कि योग, तो फिर योग है क्या? योग कसरत करने का नाम नहीं, योग व्यायाम करने का नाम नहीं, योग हाथ-पांव या सिर-गाल हिलाने का नाम नहीं। योग का मतलब है चित्त को विभिन्न वृत्तियों अर्थात् आकारों में परिणत होने से रोकना, जिसे उपनिषद ने कह डाला – योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः। तदा द्रष्टुः स्वरुपेSवस्थानम्।

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खेल को खेल ही रहने दें, उसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखें, खेल में कोई किसी का बाप नहीं होता

आज रांची से प्रकाशित एक अखबार ने पाकिस्तान के उपर भारत की शानदार जीत को राजनीतिक चश्मे से देखने में ज्यादा रुचि दिखाई। आम-तौर पर जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट का मैच होता हैं तो इस मैच को देखने का नजरिया लोगों को बदल जाता है, और यह सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट में ही देखने को मिलता है, जबकि भारत-पाकिस्तान के बीच केवल क्रिकेट ही नहीं, बल्कि और भी कई मैच खेले गये हैं,

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IPRD झारखण्ड ने बताई राज्य के लोक-कलाकारों की औकात, अब ठेकेदार निर्धारित करेंगे उनके भविष्य

एक कलाकार न तो पैसों का मोहताज होता है और न ही किसी ठाठ-बांट का, अपनी कलाकारी दिखाने के दौरान उसे जो भी मिल गया, उसी से वो खुश रहने की कला जानता हैं, तभी तो वो कलाकार है, पर राज्य के होनहार मुख्यमंत्री रघुवर दास और उनके आगे-पीछे घुमनेवाले लोगों की बात करें, तो उन्हें लगता है कि दुनिया की सारी ज्ञान उनके चरण-कमलों में आकर ही दम तोड़ देती हैं।

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भगवान बिरसा के नाम पर आज का रांची बंद पूर्णतः विफल, बिरसा के अनुयायियों ने जताई चिन्ता, दिखा आक्रोश

कल जिस प्रकार लाल झंडे और हरे झंडे का सम्मिश्रण और मशाल जुलूस रांची में दिखा था, जैसा जनाक्रोश देखने को मिला था, उससे लगा था कि आज रांची बंद का व्यापक असर देखने को मिलेगा, पर आज ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला, बंद का आंशिक असर देखा गया। शायद बंद करानेवालों को इस बात का आभास था कि सरकार और उनके नुमाइंदे तथा पुलिस उन्हें बेवजह निशाना बनायेगी,

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तालिबानी भाषा बोलने का अधिकार सिर्फ CM रघुवर को हैं, कृपया विपक्षी नेता ऐसी भाषा का प्रयोग न करें?

आज रांची से प्रकाशित बहुत सारे अखबारों में खबर पढ़ने को मिले, जिसमें भाजपा प्रवक्ता का बयान है कि राज्य में तालिबानी राज लाना चाहते हैं हेमन्त सोरेन। समाचार में लिखा है कि भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने हेमन्त सोरेन के उस ट्विट की आलोचना की है, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री के लिए अपशब्दों का प्रयोग करते हुए कहा था कि उन्हें रस्सी से बांधकर राज्य के बाहर छोड़ना चाहिए।

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बेचारे प्रदीप यादव, आज भाजपा में होते तो न उनके पीछे पुलिस होती और न ही वे कोई चुनाव हारते, निश्चय ही आराम से वे बम-बम कर रहे होते

बेचारे प्रदीप यादव, आज भाजपा में होते तो न उनके पीछे पुलिस होती और न ही वे कोई चुनाव हारते, निश्चय ही आराम से वे बम-बम कर रहे होते, सरकार उनकी जय-जयकार कर रही होती, उन्हे बचाने के लिए पूरा सिस्टम उनके आगे-पीछे लगा देती, उनके पीछे अगर कोई केस भी लगा होता तो उन केसों को हटाने के लिए जोर लगा दी होती।

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भगवान बिरसा की प्रतिमा के एक हाथ को असामाजिक तत्वों ने तोड़ डाला, पूरे राज्य में भड़का जनाक्रोश

अभी एक सप्ताह भी नहीं हुए, पूरा झारखण्ड गत् 9 जून को भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि मना रहा था, राज्य सरकार और उनके अधिकारी तथा कई भाजपा नेता भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर रहे थे और सेल्फियां ले रहे थे, उसे फेसबुक पर लगा रहे थे और आज देखिये क्या हो रहा है, रांची के लालपुर स्थित समाधिस्थल कोकर में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा की हाथ तोड़ डाली गई हैं।

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झारखण्ड की जनता बिजली न मिलने से हलकान और राज्य के CM को PM मोदी के कार्यक्रम की चिन्ता

मानना पड़ेगा, झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास और यहां के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की सोच को। राज्य की जनता बिजली न मिलने से हलकान है, भीषण गर्मी और बिजली गायब रहने से पूरे झारखण्ड में कोहराम मच हुआ है, पर राज्य के मुख्यमंत्री को इसकी चिन्ता नहीं हैं, फिलहाल उनका सारा फोकस राज्य की राजधानी रांची में 21 जून को होनेवाले अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस तथा उसमें भाग ले रहे पीएम मोदी के कार्यक्रम पर केन्द्रित है।

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2019 विधानसभा चुनाव में रघुवर को सबक सिखाने की बात करनेवाले सुदेश,अब उन्हीं से सबक सिखने में लगे

झारखण्ड में एक से एक नेता है, वे कब क्या बोलेंगे और क्या कर देंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता, जैसे आपको मालूम ही होगा, कि झारखण्ड में एक मुख्यमंत्री है रघुवर दास, उन्होंने एक जनसभा में कहा कि अगर हम दिसम्बर 2018 तक झारखण्ड में 24 घंटे बिजली नहीं दे पाये, तो वे 2019 में वोट मांगने जनता के पास नहीं जायेंगे, दिसम्बर 2018 भी बीत गया, राज्य में बिजली के लिए हाहाकार हो रहा है,

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स्वर्णिम काल का ढिंढोरा पीटनेवालों, अपने रघुवर को कहो कि वह बिहार के CM नीतीश से कुछ सीखे

आजकल झारखण्ड भाजपा में एक से एक रघुवर भक्त हो गये हैं, उन्हें झारखण्ड की जनता के दुख से कोई मतलब नहीं हैं, वे तो अपने प्रभु राज्य के सीएम रघुवर की भक्ति में ही स्वयं को अनुप्राणित महसूस कर रहे हैं, इसके लिए कोई रघुवर के शासनकाल को स्वर्णिम काल कह दे रहा हैं, तो किसी को रघुवर में अद्भुत शासक नजर आने लगा है, जबकि सच्चाई यह भी है कि इस राज्य में जो लोग रह रहे हैं,

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