CM रघुवर रिम्स इतिहास रचने नहीं, बल्कि नाराज डाक्टरों के समक्ष पश्चाताप के आंसू बहाने गये थे

मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति संख्या 444/2019, जिसे रिम्स रांची से जारी किया गया है, उस प्रेस विज्ञप्ति में समाचार जारी करनेवाले अधिकारी ने गजब का शीर्षक दिया है। शीर्षक है – मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रचा इतिहास। सब हेडिंग में उसने लिखा है – आप चिकित्सकों को धरती पर भगवान का रुप माना जाता है। आप अपने कर्म से खुद को संतुष्ट करें, दुनिया की परवाह न करें, गरीब मरीजों की उम्मीद हैं आप – रघुवर दास, मुख्यमंत्री झारखण्ड।

मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति संख्या 444/2019, जिसे रिम्स रांची से जारी किया गया है, उस प्रेस विज्ञप्ति में समाचार जारी करनेवाले अधिकारी ने गजब का शीर्षक दिया है। शीर्षक है मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रचा इतिहास। सब हेडिंग में उसने लिखा है आप चिकित्सकों को धरती पर भगवान का रुप माना जाता है। आप अपने कर्म से खुद को संतुष्ट करें, दुनिया की परवाह न करें, गरीब मरीजों की उम्मीद हैं आप रघुवर दास, मुख्यमंत्री झारखण्ड।

यानी मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा जारी यह प्रेस विज्ञप्ति के दो सब हेडिंग ये बताने के लिए काफी है कि रिम्स के चिकित्सकों ने राज्य के मुख्यमंत्री की क्या हालत कर दी है? और मुख्यमंत्री की इस दुर्दशा पर पर्दा डालने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय ने एक हेडिंग से पूरे समाचार की दिशा ही बदल दी, जो शत प्रतिशत झूठ है। किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री या कोई बड़ा अधिकारी, जब किसी संस्थान में कार्यरत लोगों से बातचीत करता है, तो उससे इतिहास नहीं बनती, इतिहास बनती है उसके कार्यप्रणाली में आये सुधार और जनता को मिलनेवाली राहत से।

जिसका रिम्स में सर्वथा अभाव है, और इसकी भी कोई  गारंटी नहीं कि आनेवाले समय में रिम्स में सुधार हो ही जायेगा, क्योंकि यहां सुधार नहीं होने की पहली गड़बड़ी है, राज्य के स्वास्थ्य विभाग को चला रहे स्वास्थ्य मंत्री का सही नहीं होना तथा सीएम रघुवर दास द्वारा बिना किसी की बात सुने, ऐसी बयान जारी कर देना, जो किसी के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने के लिए काफी है, ऐसे में डाक्टर भला क्या करेंगे, वे अपने आत्मसम्मान बेचकर तो काम नहीं ही करेंगे, इसलिए वे भड़क गये और जब उन्होंने भृकुटि तानी तो जनाब आ गये, रिम्स के डाक्टरों से बात करने यानी वो कहावत हैं न, अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे।

दरअसल मामला यह है कि पिछले दिनों राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रिम्स डाक्टरों के खिलाफ एसीबी जांच की घोषणा तथा प्राइवेट प्रैक्टिस पर बयान जारी किये थे, जो रिम्स के डाक्टरों को बहुत बुरा लगा था, इस बयान से रिम्स के डाक्टर इतने नाराज हुए कि कई तो रिम्स से दूरियां बनाने की ठान ली, अब चूंकि रिम्स में ऐसे भी जरुरतमंद डाक्टरों का अभाव है, कोई आना नहीं चाहता, भ्रष्टाचार इतना है कि उस भ्रष्टाचार के आगे भी डाक्टरों का जीना हराम है, ऐसे में कोई डाक्टर क्यों यहां अपनी सेवा देगा और सेवा के बदले किसी की बात भी सुनेगा।

जैसे ही रिम्स के डाक्टरों की नाराजगी और रिम्स छोड़ने की बात सीएम रघुवर दास के कानों तक पहुंची, इन्होंने डाक्टरों से बात करने का मन बनाया, और लीजिये मौका मिल गया आज के दिन का, मुख्यमंत्री अपने अधिकारियों के साथ डाक्टरो से मिले, उन्हें खुब पोहलाया, उन्हें बताया कि लोग आपको भगवान मानते है, आप आराम से काम करिये, कहीं कोई दिक्कत नहीं होगी, जो समस्याएं हैं वो जल्द ही समाप्त कर दी जायेगी और लीजिये इसी को मुख्यमंत्री सचिवालय ने इतिहास बना दिया, भला ये इतिहास हैं तो फिर इतिहास क्या है?

आजकल हमारे राज्य में मुख्यमंत्री रघुवर दास को अपने लोगों से खुद की प्रशंसा सुनने की लत लग गई है, और यहीं लत राज्य ही नहीं, बल्कि भाजपा और खुद मुख्यमंत्री के लिए परेशानी का सबब बनने जा रही है, जिसे मुख्यमंत्री समझ नहीं रहे, मूर्खों की जमात हर बात पर उन्हें वाह-वाह करती जा रही है, उन तक सही बात नहीं पहुंचने दे रही हैं, और अपनी हरकतों से उन्हें कहीं का नहीं छोड़ रही हैं

अब जरा मुख्यमंत्री खुद ही चिन्तन करें कि क्या उन्होंने डाक्टरों से बात कर, कोई इतिहास बनाया है, और जब इतिहास बनाया ही नहीं, तो सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग से इस प्रकार की हेडिंग लगाकर समाचार क्यों प्रेषित किया गया, आखिर वो कौन व्यक्ति है, जो आजकल इस प्रकार की खबरों को खबर न बनाकर महिमामंडित कर रहा है, सामान्य जन की बात करें तो मक्खन लगा रहा है, आखिर इस मक्खन लगाने से किसका भला हो रहा है, मुख्यमंत्री का, जनता का, डाक्टरों का या उस व्यक्ति का, जो इसी के लिए जाना जाता है।

Krishna Bihari Mishra

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महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर उनके स्वच्छता अभियान का संसद परिसर में माखौल उड़ाना सहीं नहीं

Mon Jul 15 , 2019
यह तो महात्मा गांधी द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान चलाये गये पवित्र स्वच्छता अभियान का माखौल उड़ाना है, और वह भी तब जब हम विश्ववंद्य महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाने जा रहे हैं, कितने शर्म की बात है, संसद जहां महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित है, संसद जहां कहीं भी गंदगी दिखाई नहीं देती, वहां लोकसभाध्यक्ष के साथ कई सांसद मिलकर स्वच्छता अभियान का नाटक कर रहे हैं, ऐसा नाटक जो उन्हें करना भी नहीं आता।

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