महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर उनके स्वच्छता अभियान का संसद परिसर में माखौल उड़ाना सहीं नहीं

यह तो महात्मा गांधी द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान चलाये गये पवित्र स्वच्छता अभियान का माखौल उड़ाना है, और वह भी तब जब हम विश्ववंद्य महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाने जा रहे हैं, कितने शर्म की बात है, संसद जहां महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित है, संसद जहां कहीं भी गंदगी दिखाई नहीं देती, वहां लोकसभाध्यक्ष के साथ कई सांसद मिलकर स्वच्छता अभियान का नाटक कर रहे हैं, ऐसा नाटक जो उन्हें करना भी नहीं आता।

यह तो महात्मा गांधी द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान चलाये गये पवित्र स्वच्छता अभियान का माखौल उड़ाना है, और वह भी तब जब हम विश्ववंद्य महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाने जा रहे हैं, कितने शर्म की बात है, संसद जहां महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित है, संसद जहां कहीं भी गंदगी दिखाई नहीं देती, वहां लोकसभाध्यक्ष के साथ कई सांसद मिलकर स्वच्छता अभियान का नाटक कर रहे हैं, ऐसा नाटक जो उन्हें करना भी नहीं आता।

इनके कथित नाटक को देख कोई भी सामान्य नागरिक अंदाजा लगा सकता है कि इन्होंने जिंदगी में कितनी बार अपने हाथों में झाड़ू पकड़े और अपने घरों या अपने घर के आस-पास सफाई अभियान में ईमानदारी से हिस्सा लिया। इन कथित ड्रामेबाजों को मालूम होना चाहिए कि महात्मा गांधी के स्वच्छता अभियान में ड्रामेबाजी नहीं थी, वो तो जहां सही मायनों में गंदगी देखते, वहां सफाई अभियान में लग जाते और लोग जब महात्मा गांधी को स्वयं सफाई करते देखते, तो वे खुद भी स्वयं को शर्मसार महसूस करते और सफाई कार्यों में लग जाते।

महात्मा गांधी कहते नहीं थे, और न अखबारों व चैनलों के संवाददाताओं व छायाकारों के सामने झाड़ू लेकर पोज दिया करते, वे तो ईमानदारी से लोगों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाते, बताते कि स्वच्छता के निकट होना मतलब देवत्व के निकट होना है, पर जब संसद में बैठनेवाले महाशय और संसद को चलानेवाले महाशय स्वच्छता अभियान को लेकर ड्रामेबाजी करें तो देश की सही मायनों में वस्तुस्थिति का पता लग जाता है।

सच्चाई यहीं है कि प्रधानमंत्री 2014 से स्वच्छता अभियान को लेकर सजग है, पर स्वच्छता अभियान को अभी तक वह मंजिल नहीं मिली है, जिसका इंतजार है, खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में कहा था, उनके बोल विभिन्न सिनेमाघरों में बड़े-बड़े पर्दों पर सुनने को मिले “क्या हम ऐसा नहीं कर सकते कि महात्मा गांधी के 150वी जयंती के अवसर पर एक स्वच्छ भारत महात्मा गांधी के चरणों मे समर्पित कर, उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दें।” लेकिन आज सच्चाई क्या है, आज पूरा स्वच्छता अभियान ड्रामे का शिकार हो रहा हैं।

आप इन आर्टिकल में दिये गये समस्त फोटों को देखिये, पता लग जायेगा, कि लोकसभाध्यक्ष के साथ ये ड्रामेबाज सांसद क्या कर रहे हैं? सफाई कर रहे हैं, सफाई का नाटक कर रहे हैं, सफाई का पोज दे रहे हैं? और जब सब यहीं ड्रामेबाजी करेंगे तो ये धोखा किसको दे रहे हैं, महात्मा गांधी को, उनके सपनों को, देश को, देश की जनता को या खुद को?

आश्चर्य है, हमारे देश में आजकल ड्रामेबाजी ही प्रमुख हो गया है, क्योंकि अब सेवा कार्य गौण हो गया है, क्योंकि कल तक एक जोड़ी कपड़ों और सामान्य व्यक्ति की तरह जिंदगी जीनेवाला संघ का प्रचारक जब देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने कपड़ों और चेहरों की चमक पर ध्यान देने लगता है तो ड्रामेबाजी ही हर जगह दिखाई पड़ती है, इस सत्य को स्वीकार करना पड़ेगा, दुर्भाग्य है इस देश का इस देश की जनता ने जिस नेता को सर्वाधिक प्यार दिया, उसी नेता ने इस देश की जनता के साथ दगा किया, कई उदाहरण अतीत के गर्भ में है और दूसरा उदाहरण सभी के सामने चल रहा है।

पूरे देश में आजकल भाजपा के नेता, अखबारों-चैनलों-पोर्टलों में काम करनेवाले छायाकारों या खुद ही के मोबाइल से फोटो खीच रहे हैं, और उसे सोशल साइट पर डाल रहे हैं और अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, और इन सारे कामों के पहले क्या होता हैं? साफ जगहों पर ये खुद कचरा फैलाते हैं, नये-नये दस्ताने पहनते हैं, और नये-नये झाड़ू लेकर दो-तीन हाथ चला देते है, ताकि फोटो आ जाये और उसके बाद सारी नौटंकी खत्म और आगे की नौटंकी की तैयारी शुरु।

अगर भाजपा के नेता स्वच्छता अभियान को लेकर चलाई जा रही नौटंकी बंद नहीं की, तो आनेवाले समय में जनता खुद इनके अंदर की गंदगी इस प्रकार साफ करेगी, कि ये कही मुंह दिखानेलायक नहीं होंगे, इसे गिरह पार कर रख लेना चाहिए, क्योंकि फिर उस वक्त कितना भी छाती पीटेंगे, कोई इनकी छाती पीटने से पसीजेगा नहीं, क्योंकि फिर सभी यही कहेंगे, कि ये फिर नौटंकी कर रहा है, पहले हाथ में झाड़ू पकड़ने का नाटक किया और अब हाथों से छाती पीटने का नौंटकी कर रहा है।

Krishna Bihari Mishra

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