RIMS तुम्हारा जवाब नहीं, तुम आज भी लाखों गरीबों-वंचितों के तारणहार और जीवनदायिनी हो
जब भी रांची के अखबारों का पन्ना पलटा, यहीं पाया कि रांची के रिम्स की हालत ठीक नहीं, वहां गंदगी रहती हैं, किसी का इलाज सही नहीं होता। डाक्टरों, जूनियर डाक्टरों की लापरवाही बराबर देखने को मिलती है। लोगों को दवाएं नहीं मिलती,सही उपचार नहीं होता। आम-तौर पर सरकारी अस्पतालों का बराबर यहीं दृश्य अखबारों व मीडिया के लोगों ने दिखाया है।
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