भाड़ में जाये अब भाजपा का नीति-सिद्धांत, अगर कोई भ्रष्ट या अनैतिक हैं तो क्या, हम कौन से दूध के धुले हैं?

तुम कार्यकर्ता हो, तुम संघ के स्वयंसेवक हो, तुम गालियां ही खाने के लिए बने हो और जब तक जिन्दा रहोगे, देश और पार्टी के नाम पर गालियां खाते रहो और हम तुम्हारी छाती पर पांव रखकर देशसेवा का ढोंग कर, अपने परिवार अथवा प्रेमी-प्रेमिकाओं का भरण-पोषण करते रहेंगे, अपने जीवन-स्तर को बेहतर बनाते रहेंगे, और रही बात तुम पर कृपा की, तो ये तुम्हारी किस्मत है,

“तुम कार्यकर्ता हो, तुम संघ के स्वयंसेवक हो, तुम गालियां ही खाने के लिए बने हो और जब तक जिन्दा रहोगे, देश और पार्टी के नाम पर गालियां खाते रहो और हम तुम्हारी छाती पर पांव रखकर देशसेवा का ढोंग कर, अपने परिवार अथवा प्रेमी-प्रेमिकाओं का भरण-पोषण करते रहेंगे, अपने जीवन-स्तर को बेहतर बनाते रहेंगे, और रही बात तुम पर कृपा की, तो ये तुम्हारी किस्मत है, कभी किस्मत अच्छी रही तो तुम्हें हम याद कर लेंगे, नहीं तो ईश्वरीय इच्छा मानकर गलियों-कूचों में भौंकते रहो, और जब हम उस रास्ते से गुजरेंगे तो तुम जिन्दाबाद का नारा लगा दिया करना। समझा चला है, भाजपा का  कार्यकर्ता बनने, संघ का स्वयंसेवक बनने।”

ये सोच हैं आज के भाजपाइयों का, ये सोच ऐसे ही नहीं बना है, ये सोच बना है, देश के तमाम तरह की गंदगियों को आत्मसात करने की नई प्रवृत्तियों के जन्म लेने से। ये नई भाजपा है, जरा ध्यान दीजियेगा इस नई भाजपा में इसमें आज के नेता कहेंगे कि भाजपा गंगा हैं, इसमें जो भी आता है, पवित्र हो जाता है, पर उसे मालूम नहीं कि निरन्तर गंगा में मल-मूत्रों के मिलने से जैसे गंगा आचमन तो दूर स्नान करने लायक भी नहीं रही, ठीक उसी प्रकार भाजपा भी अनैतिक, यौन शोषकों, भ्रष्ट व्यक्तियों, संस्कार व चरित्रहीनों को लगातार आत्मसात् करने से ऐसी हो गई, कि एक सत्यनिष्ठ व्यक्ति भाजपा से उतनी ही घृणा करने लगा है, जितना गंगा के निकट जाकर भी वह गंगा को स्पर्श करना भी उचित नहीं समझता।

जरा देखिये न। जो राजद के नेता, जब तक लालू प्रसाद ताकतवर थे, उनके रहते कोई दिन ऐसा नहीं, जिस दिन उन्होंने संघ और भाजपाइयों को गाली न दी हो, आज वे भाजपा के सिरमौर हो रहे हैं, और जिन्होंने भाजपा को ताकत दी, वे दांत-निपोड़ रहे हैं। हाल ही में 14 सितम्बर को भाजपा वाले अपने प्रदेश कार्यालय में मिलन समारोह आयोजित किये थे, जिसमें पता चला कि जिस सांसद को कभी संसद में प्रश्न पूछने के लिए नोट गिनते हुए पाया गया था, जिन्हें बाद में बर्खास्त किया गया, ऐसे महान नेता मनोज भुइयां को माला पहनाने तथा उनके संग फोटो खिंचवाने के लिए भाजपाइयो का दिल मचल रहा था।

हाल ही में, इसी साल 7 मार्च 2019 को रांची के मोराबादी मैदान में जिस देव कुमार धान ने भाजपाइयों और आरएसएस को जी भरकर गरियाया था, कहा था कि आदिवासियों को हिन्दू कहनेवालों, वनवासी कहनेवालों तुम्हारा संगठन कितना भी शक्तिशाली क्यों नहीं हैं, हम तुम्हारा जुबान खींच लिया जायेगा, तुम आदिवासी को हिन्दू कहकर मुसलमानों से लड़वाना बंद करो।

उस देव कुमार धान को माला पहनाने के लिए, उससे गले लगने के लिए भाजपाइयों और कुछ संघ के कट्टर समर्थकों का पुरा शरीर पुलकित हो रहा था, जबकि वहीं पर कुछ लोग ऐसे थे, जो भाजपा के इस नये चरित्र का अवलोकन कर रहे थे, और कह रहे थे, “तुम मुझे पहले गाली दो, तुम मुझे खुब जुतियाओ, हमारे स्वयंसेवकों और भाजपाइयों की जुबान खींच लो और जब चुनाव आयेगा तो हम तुम्हारा चरणोदक पीने के लिए नहीं आगे आये तो तुम कहना।”

एक ने कहा कि आप भी पत्रकार महोदय, गजब हैं, कहां से आप चरित्र की बात करते हैं, कौन सा चरित्र, यहां जितना भी लोग हैं, रोज चरित्र का पैजामा बनाता हैं, जो जितना बड़ा झूठा, लबड़ा, चिरकूट, गिरहकट, पॉकेटमार वो उतना बड़ा नेता, देखते नहीं जो मुख्यमंत्री बिजली को लेकर बार-बार जनता को धोखे में रखा, जो रांची से टाटा तक पांच साल में सड़क नहीं बना सका, जो लोगों को पानी तक उपलब्ध नहीं करा सका, जो विधानसभा को ठीक से पूरा नहीं होने के बावजूद भी आनन-फानन में पीएम मोदी को बुलाकर, लोकतंत्र की मर्यादा को तार-तार कर फेंक दिया, उसके लिए लोग घर-घर रघुवर बोलने लगे हैं, तो फिर आप कहां हैं?

सच पूछिये तो ये लोग निर्लज्ज हैं, जनता को तो चाहिए कि धर-धर रघुवर कहकर सीएम रघुवर को पकड़ें और सवालों की झरियां लगा दें, पर अब जनता भी कहां वो चरित्रवान रही। देखियेगा, उसे चुनाव में बकरा, मुर्गा और दारु चाहिए और इन सब में फिलहाल भाजपा सबसे आगे हैं, और वो जो बोल रहा है न कि 65 प्लस, कहीं 81 के 81 न जीत जाये, क्योंकि जनता, नेता व पत्रकार सभी अपने चरित्र रुपी गहने को दो कौड़ियों में बेच चुके हैं, और रही बात देश की, तो जान लिजिये, ये जिंदगी भर पाकिस्तान से ही मुकाबला करता रह जायेगा, कभी विकसित देश नहीं बनेगा, क्योंकि सब को अपनी जोरु और परिवार पसन्द है, अरे अब तो प्रेमिकाओं का भी दिन आ गया है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने तो पहले ही कह दिया कि अब गैरों से शारीरिक संबंध बनना अवैध नहीं हैं। मतलब समझे।

Krishna Bihari Mishra

One thought on “भाड़ में जाये अब भाजपा का नीति-सिद्धांत, अगर कोई भ्रष्ट या अनैतिक हैं तो क्या, हम कौन से दूध के धुले हैं?

  1. party with a difference.angrezee akhbaron ka BJP ke pratti hamesha a punch line hota thha……..jaise jaise rajyon me satta miltee gayee…….party me naye naye log judne lage,jo sangh vicharon ke nahee hote thhe…….mujhe aisa aabhas hone laga hai kee,aane wale samay me………sangh ka party ke upar ankush nahee chalega aur sangh bhi apnee vichar dharaon me kuchh kuchh badlawo karega,kar bhi raha hai……phir bhi Rashtra sarvoparee hai aur rahega.

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