CCTV ने विजय झा के बेटे पर लगे झूठे आरोपों का खोला राज, झूठी FIR करानेवालों पर गिर सकती है गाज

सीसीटीवी बता रहा है कि आरोप लगानेवाली महिला 08.18 बजे रात्रि में श्रीकृष्णा मातृ सदन से निकलती है, और 8.30 बजे कतरास थाने में प्राथमिकी भी दर्ज करा देती है। वह प्राथमिकी में उसके साथ घटित घटना का समय रात्रि के 8 बजे बता रही है। खुद पुलिस ही अपने रिपोर्ट में श्रीकृष्णा मातृ सदन से कतरास थाने की दूरी आधा किलोमीटर बता रही है।

सीसीटीवी बता रहा है कि आरोप लगानेवाली महिला 08.18 बजे रात्रि में श्रीकृष्णा मातृ सदन से निकलती है, और 8.30 बजे कतरास थाने में प्राथमिकी भी दर्ज करा देती है। वह प्राथमिकी में उसके साथ घटित घटना का समय रात्रि के 8 बजे बता रही है। खुद पुलिस ही अपने रिपोर्ट में श्रीकृष्णा मातृ सदन से कतरास थाने की दूरी आधा किलोमीटर बता रही है।

अब सवाल उठता है कि किसी महिला के साथ अगर गलत हुआ है, तो मात्र 12 मिनट में ही उसके साथ घटना भी घट गई, वह आधा किलोमीटर चलकर थाने भी पहुंच गई, लिखित शिकायत भी दर्ज करा दी और पुलिस प्राथमिकी प्रविष्टि भी भर ली,  क्या यह 12 मिनट में संभव है? कहीं ऐसा तो नहीं कि विजय झा के बेटे को फंसाने के लिए साजिशकर्ताओं ने पहले से ही शिकायत पत्र तैयार कर लिया था क्योंकि सारे दृष्टांत तो यहीं बता रहे है?

आखिर श्रीकृष्णा मातृ सदन में 11 सितम्बर को सायं 5 बजे ही आरोप लगानेवाली महिला क्यों बैठ गई थी? आखिर वह तीन घंटे बिना रजिस्ट्रेशन के उसे वहां बैठने की क्या जरुरत थी? वह इस दौरान डेढ़ घंटे किससे बात कर रही थी? आखिर कौन उसे उस वक्त गाइड कर रहा था? आखिर जब विजय झा को जैसे ही मालूम हुआ कि उनके बेटे के खिलाफ झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने का प्रयास हुआ है।

वे खुद कतरास पुलिस को अपने घर बुलाकर, पूरा सीसीटीवी उसके सामने ही खंगलवा देते है और उस सीसीटीवी में घटना के समय से एक घंटा पूर्व और उसके बाद तक जिस पर आरोप हैं, वह घर में मौजूद था, फिर भी इस सत्य को जानते हुए भी किसके दबाव में पुलिस ने धारा 354, 376, 511 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली। आखिर इन्वेस्टिगेशन में उसने क्या देख लिया? कि उसे झूठी प्राथमिकी दर्ज करने को विवश होना पड़ा?

जरा पुलिस यह भी बताएं कि जब प्राथमिकी हिन्दी में लिखी गई है और आरोप लगानेवाली महिला के हस्ताक्षर उर्दू में हैं, तो पुलिस बताएं कि उस महिला के प्राथमिकी को किसने लिखा? किसने उसे पढ़कर सुनाया? किसने उसे समझाया और जिसने यह सब किया, उस व्यक्ति का उसमें तिथि और समय के साथ हस्ताक्षर क्यों नहीं है?

इधर शनिवार को गुहीबांध में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा कतरास मंडल में जैसे ही विजय झा के बेटे का मामला उठा और उसे गिरफ्तार करने की बात लोगों ने शुरु की, सलानपुर निवासी मोर्चा के सदस्य मो. नसीम ने विद्रोह कर दिया, मो. नसीम का कहना था कि उन्हें बताया गया था कि पार्टी की बैठक हैं, पर यहां तो दूसरी बात पर ही मगजमारी हो रही हैं, जो सही नहीं है।

शनिवार को ही मार्क्सवादी स्टूडेंट फेडरेशन के जिलाध्यक्ष विशाल कुमार महतो ने कहा है कि बाघमारा में भाजपा के नेता महिलाओं को आगे कर, अपने विरोधियों को फंसाने का काम कर रहे हैं, इस तरह के अमर्यादित कार्य से समाज में गलत संदेश जा रहा है, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास से ऐसी राजनीति पर रोक लगाने की मांग की।

धनबाद के प्रधानखंता में रांगाडीह कतरास में भी इस मुद्दे पर शनिवार को बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता लखीराम मांझी ने की। बैठक में विजय झा के बेटे पर लगाये गये झूठे आरोप को राजनीति का हिस्सा बताया गया, बैठक में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।

इधर विजय झा ने कांड संख्या 161/2019 के संदर्भ में बाघमारा के पुलिस उपाधीक्षक को एक आवेदन दिया है, उसमें शिकायतकर्ता महिला व उसके गवाहों के मोबाइल कॉल खंगालने तथा इन सबकी लाइ डिटेक्टर टेस्ट कराने का आग्रह किया है, उन्होंने इस टेस्ट में होनेवाले सारे खर्च को स्वयं वहन करने हेतु सरकारी कोषागार में जमा करने को प्रस्ताव दिया है।

Krishna Bihari Mishra

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