संतोष जो कल पत्रकार थे, आज डाक्टर बन न्यूरो पंचकर्म थेरेपी पद्धति से लोगों को जीवन दे रहे हैं
संतोष कुमार नहीं साहेब, डा. संतोष कुमार कहिये। इन्होंने गजब कर डाला है, जब पत्रकार थे, तब भी गजब ही करते थे, नेता बने तब भी गजब ही करते थे और लीजिये जब से डाक्टरी संभाली है, तब से बहुत सारे लोगों को इन्होंने जीवन दे दी हैं, शुरु से ही जुनूनी रहे संतोष ने स्वयं को इस प्रकार बदला है, कि मैं सोच भी नहीं सकता कि किसी की जिंदगी में इस प्रकार के बदलाव भी आ सकते है।
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