जब खराब सिस्टम के बीच शेषण चुनाव व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकते हैं, केरल कोरोना पर विजय प्राप्त कर सकता है, तो हम झारखण्डी क्यों नहीं?
कभी-कभी जब अखबारों व चैनलों के माध्यम से जो खबरें हम तक पहुंचती है, तो कुछ खबरों को देखकर सिहरन होती है कि आखिर ये घटनाएं एक सभ्य समाज में कैसे घटित हो जाती है? क्या सचमुच सिस्टम फेल हो चुकी है? और अगर सिस्टम फेल हैं तो उसे कैसे सुधारा जा सकता है? उसके लिए कौन-कौन से प्रयास किये जा सकते हैं? लेकिन इसी दरम्यान इसी देश में जहां सिस्टम फेल होने की बात कही जाती है, वही कुछ ऐसी घटनाएं भी घटती है,
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