शर्म आनी चाहिए ऐसे पत्रकारों को, जो हेमन्त सरकार को जनता के समक्ष नीचा दिखाने के लिए षडयंत्र रच रहे हैं
वो पत्रकार है, वो नेताओं से मिलकर, हेमन्त सरकार को कटघरे में रखने का प्रयास करता है। वो मार्केंटिंग आफिसर, अंचलाधिकारी यहां तक की उपायुक्त को भी नहीं समझता। वो न्यूज संग्रह नहीं करता, बल्कि वो न्यूज क्रिएट करता/कराता है, वह अपने लोगों को बड़े रौब से कहता है कि तुम्हें केन्दुआ चौक पर पचास आदिवासियों को खाली थाली लेकर खड़ा करवा देना हैं, वह आठ बजे सुबह का टाइम भी देता है,
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