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जो कानून तोड़े, वो दिल्ली से झारखण्ड आकर उपवास करें, सरकार-प्रशासन को आंखें दिखाएं और जो PM मोदी व कानून का सम्मान करें, वो रांची से जमशेदपुर जाने को तरसे

झारखंड सरकार ने लॉक डाउन में विगत एक माह से अपने चुनाव क्षेत्र से बाहर फँसे विधायकों, सांसदों, मंत्रियों को उनके चुनाव क्षेत्रों में जाने तथा अपने चुनाव क्षेत्रों में सरकार द्वारा चलाये जा रहे कोरोना का सामना करने वाले कार्यों का निरीक्षण करने के बारे में केन्द्र सरकार से मार्गदर्शन माँगा है, क्योंकि राज्य के सारे दलों के विधायक जो लॉकडाउन के कारण रांची में फंस गये थे, वे अपने-अपने इलाकों में जाकर जनता की सेवा करना चाहते थे।

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भाजपाइयों ने शुरु की उपवास की नौटंकी, अपना दीदा देखने के बजाय, CM हेमन्त को नीचा दिखाने की कोशिश

भाजपाइयों ने राज्यस्तर पर उपवास की नौटंकी शुरु कर दी है। इस नौटंकी में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास से लेकर वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश तथा अन्य भाजपाई नेता भी शामिल है, इसमें वे भी शामिल है, जो जूम्मे-जूम्मे एक-दो महीने हुए, भाजपा में शामिल हुए हैं। ये भाजपाई अपने-अपने घरों में, सोफे पर बैठ मुंह पर मास्क लगाए हुए हैं, तो कोई बिना मास्क लगाये, दिवारों पर उपवास का पोस्टर चिपकाकर बैठा है, तथा अपने-अपने मातहतों से इन फोटो को वायरल भी करा रहा है।

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IMA ने पत्रकारों से लगाई गुहार, देश में डाक्टरों के खिलाफ चल रहे अमानवीय कृत्यों पर करें सहयोग, आंदोलन में दे साथ

इंडियन मेडिकल एसोएसिएशन के प्रदेश सचिव डा. प्रदीप कुमार सिंह ने राज्य के सभी प्रमुख पत्रकारों से इस बात के लिए गुहार लगाई है कि वे अपनी लेखिनी से इस प्रकार का माहौल बनाएं, ताकि इस कोरोना संक्रमण काल में मानवता की सेवा कर रहे डाक्टरों को अपमान का घूंट न पीना पड़े। उन्होंने पत्रकारों से जुड़ी एक संस्था को लिखे पत्र में इस बात का जिक्र किया है कि देश में जो कोरोना संक्रमण का दौर चल रहा हैं,

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कोरोना संकट में जरूरतमंदों की सेवा कैसे की जाती हैं, अगर यह सीखना है, तो योगदा संन्यासियों से सीखिये

कोरोना संकट में जरुरतमंदों की सेवा कैसे करनी चाहिए, अगर यह ईमानदारी से सीखना हैं तो योगदा सन्यासियों से सीखिये, इस भयंकर महामारी में सारे प्रमुख कार्यों को छोड़, इन संन्यासियों ने योगदा सत्संग आश्रम के अंदर ही खुद सहायता पैकेट तैयार कर रहे हैं तथा इन सहायता पैकेटों को जरुरतमंदों तक खुद ही पहुंचा रहे हैं, आश्चर्य इस बात की भी है कि वे स्वयं के द्वारा किये गये इस सेवा कार्य का ढोल भी नहीं पीट रहे, जैसा कि और स्वयसेवी/राजनीतिक/एनजीओ से जुड़ी संस्थाएं करती है।

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कोटा व देश के अन्य राज्यों में फंसे झारखण्डियों को वापस घर बुलाने को लेकर कांग्रेस व भाजपा आमने-सामने

खुशी की बात है, कि देश में लॉकडाउन के बाद, अन्य राज्यों में फंसे विद्यार्थियों, युवाओं तथा मजदूरों को लेकर राज्य के राजनीतिक दल इन दिनों मुखर हुए हैं। कोई इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साध रहा हैं तो कोई इसको लेकर राज्य के मुख्यमंत्री से गुहार लगा रहा हैं, पर मुद्दा फिलहाल यही है। कल मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सोशल साइट पर प्रधानमंत्री के समक्ष इसी प्रकार का सवाल खड़ा कर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया था, जिसका परिणाम है कि कांग्रेस और भाजपा में इसको लेकर तीखी नोक-झोक शुरु हो गई है।

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CM हेमन्त ने केन्द्र से पूछे सवाल, जब UP के बच्चों को लाने के लिए बसें भेजी जा सकती हैं तो झारखण्डियों के लिए ऐसा क्यों नहीं?

झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने केन्द्र सरकार से कुछ सवाल पूछे हैं, आखिर वह सवाल क्या है? प्रथम दृष्टया उस सवाल पर अगर नजर डाले, तो मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के सवाल में दम हैं, और इसका जवाब केन्द्र सरकार दे पायेगी, इसकी संभावना हमें कम दिखती है। सच्चाई तो यह भी है कि राज्य के मुख्यमंत्री  हेमन्त सोरेन द्वारा उठाये सवालों का जवाब, प्रदेश के स्थानीय भाजपा नेता भी नहीं दे पायेंगे।

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रांची सदर थाने में भूख से जूझ रहा वो गरीब, हिन्दपीढ़ी के उन अमीरों से कही ज्यादा महान था, जो सरकारी अनाज लेने के लिए पंक्तिबद्ध खड़े थे

गरीब रिक्शावाला का यह कथन, मेरी आत्मा को झकझोर दिया, आम तौर पर जिनके घर में गरीबी और भूख दस्तक देती है, तो लोग ईमान बेच देते हैं, यहां तो कोरोना ने गरीबी का मजाक तो उड़ाया ही, भूख ने कही का नहीं छोड़ा, फिर भी ये आत्मस्वाभिमान और दूसरों के लिए ये उम्दा सोच बता दिया कि उन लाखों के पैकेज उठानेवालों से ये गरीब रिक्शेवाले, सड़कों के किनारे अपनी भूख शांत करनेवाले लाख गुणा बेहतर है, जो इस विपरीत परिस्थिति में भी एक उम्दा सोच के साथ जीने की कोशिश कर रहे हैं।

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जब रांची से प्रकाशित अखबारों के साख पर लगा बट्टा, तब याद आये उन्हें हिन्दपीढ़ी के दद्दा

इन दिनों गजब हो रहा हैं, गजब की पत्रकारिता देखने को मिल रही है, रांची के करीब-करीब ज्यादातर प्रमुख अखबारों में हिंदपीढ़ी से जुड़ी सकारात्मक खबरें देखने को मिल रही है, यही नहीं, अखबारों को हिंदपीढ़ी के लोगों की समस्याओं पर भी नजर पड़ी हैं, वे अपने अखबारों में प्रमुखता से इसे उठा रहे हैं और श्रेय भी ले रहे है कि उनके खबरों का प्रभाव पड़ा, सीएम हेमन्त सोरेन पहुंचे हिन्दपीढ़ी, बांटे खाद्यान्न।

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आप हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते, प्रशासन हमारी मुट्ठी में हैं, आपको किताब तभी मिलेगी, जब आप स्टेशनरी भी लेंगे

आप कुछ भी रहे, आपका कुछ भी रहना, हमारे उपर कोई असर नहीं डालता, क्योंकि हमारे खानदान में आपसे भी बड़ा व्यक्ति उच्च पदाधिकारी रह चुका है, उसके एक इशारे पर हमें सारी फैसिलिटी उपलब्ध हो जाती है, जो आपको किसी जिंदगी में नहीं मिलेगी। अब देखिये न, इस कोरोना के हाहाकार में भी जहां किसी को गाड़ी का पास नहीं मिलता, हमें तो एक गाड़ी का पास भी मिल गया,

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परमहंस योगानन्द की नीतियों को जमीन पर उतारने को लेकर सजग योगदा संन्यासियों ने जरुरतमंदों को दिये खाद्यान्न और कोविड 19 को लेकर लोगों को किया जागरुक

श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित राजयोग के तहत क्रिया योग से विश्व को परिचित कराने वाले श्री श्री परमहंस योगानन्द के वचनों पर अमल करते हुए योगदा सत्संग आश्रम कोरोना वाइरस के दुष्प्रभावों से त्रस्त मानवता की सेवा में लॉकडाउन के आरंभिक दिनों से लगा हुआ है। ज्ञातव्य है कि परमहंस योगानन्द ने कहा था कि आप यदि दूसरों की सेवा में अपना अहम् भूल जाते हैं तो सच मानिए आपके अंदर अपने आप खुशियों का भंडार समा जाएगा।

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