शर्म करो, हिंदपीढ़ी वालों तुम्हारे कारण पूरे रांची की इज्जत की फलूदा निकल रही है, पर एक तुम हो, जैसे लगता है कि न सुधरने की कसम खा रखी है
शर्म करो, हिंदपीढ़ी वालों तुम्हारे कारण पूरे रांची की इज्जत की फलूदा निकल रही है, पर एक तुम हो, जैसे लगता है कि न सुधरने की कसम खा रखी है। इस लॉक डाउन में हिन्दुओं का प्रमुख त्याहोर “रामनवमी” बीत गया। आदिवासियों का त्यौहार “सरहुल” शांति से बीत गया, पर ऐसा क्या है कि “रमजान” का महीना शांति से न निकले। ये रोज-रोज की किचकिच और तुम्हारे इलाके की सुर्खियां बनती अखबारों की फ्रंटलाइन, क्या इससे तुम्हें शर्म नहीं आती या तुमने कसम खा रखी है कि चाहे जो हो जाये, हम वो करेंगे,
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