जो इस कोरोना संक्रमण काल में किसी ने नहीं किया, वो जिंदगी मिलेगी दोबारा फाउंडेशन के अश्विनी ने रांची में कर दिखाया
श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 2, श्लोक संख्या 22, कहता है – वासांसि जीर्णानि यथा विहाय, नवानि गृह्णाति नरोsपराणि। तथा शरीराणि विहाय, जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि देही।। जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर, दूसरे नये वस्त्र धारण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्यागकर, दूसरे नये शरीरों को प्राप्त होता है। और श्रीमद्भगवद्गगीता के इस श्लोक को जमीन पर उतारने का सही प्रयास किया है, रांची की एक संस्था – “जिंदगी मिलेगी दोबारा फाउंडेशन” ने।
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