अपनी बात

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वो आखिरी call और सपना (पार्ट – वन)

वो आखिरी बात जो भूलती नहीं और अब ये बात कोई भूलेगा नहीं कि जो चला गया उसके अधूरे सपनों को कोई और नहीं बल्कि उसकी जीवनसंगिनी ही पूरा करेगी। आपलोग सोच रहे होंगे कि मैं किसकी बात कर रही हूं। इस कोरोना काल में प्रति पल अपने मित्रों, परिचितों, शुभचिंतकों को खोते रहने के माहौल में कुछ लोगों का यूं चले जाना बहुत खल गया। झारखण्ड से 35 पत्रकारों को कोरोना ने छीन लिया। सबको तो नहीं जानती मगर दो लोग थे जिन्हें जानती थी, जिनसे जुड़ी थी। ये दोनों ऐसे चले गए कि मैं नि:शब्द और निस्तब्ध रह गई।

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एक्सीडेंट में कट गये महिला के दोनों पांव, लॉकडाउन में बच्ची की पढ़ाई और राशन पर भी आफ़त, नम्या फाउंडेशन ने बढ़ाया मदद का हाथ

टेल्को कॉलोनी से सटी तारकंपनी के पुराने क्वार्टर में लाचार जीवन गुजार रही 63 वर्षीय क्रिश्चियन महिला रोमाला पूर्ति की मदद को नम्या फाउंडेशन ने मदद का हाथ बढ़ाया है। यह प्रगति मंगलवार को अंकित आनंद की ट्वीट के कारण हुआ। अंकित ने ट्वीट कर बताया था कि रोमाला पूर्ति और उनकी बेटी अत्यंत ही ग़रीबी के हालात से जूझ रहे हैं। 63 वर्षीय महिला के दोनों पाँव एक दुर्घटना में कट चुके हैं।

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अखबारों-चैनलों के मालिकों/संपादकों के कारनामों का असर, झारखण्ड में श्मशान की ओर चल पड़ी पत्रकारिता

नेता, पत्रकार और अधिकारियों के भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का प्रभाव देखिये, झारखण्ड में श्मशान की ओर पत्रकारिता चल पड़ी है। चित्ता सज चुकी है। बस अर्थी से उसे उठाकर चित्ता पर रख देना है, फिर कोई भी उसमें आग लगा दें, क्या फर्क पड़ता है, चित्ता तो चित्ता हैं, धू-धू कर जल पड़ेगी। जब मैं बड़े-बड़े शिक्षण संस्थाओं में पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे युवाओं/युवतियों व वहां पत्रकारिता का कोर्स करा रहे मगरमच्छों को देखता हूं तो सोचता हूं कि ये मगरमच्छ कौन सी शिक्षा इन्हें दे रहे होंगे और वे युवा ले रहे होंगे?

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फिर गरजे सरयू, पार्टी कार्यालय निर्माण में कमीशन खानेवाले भाजपा नेताओं को “दूध की मक्खी” का दर्जा दे डाला

लीजिये, सरयू राय ने आज फिर दहाड़ा है। इस दहाड़ में भाजपा नेताओं को एक तरह से उन्होंने सबक भी दी है। उन्होंने भाजपा झारखण्ड को संबोधित करते हुए कहा है कि भाजपा के नेता उनके अनाम ट्विट को अपने उपर न लें, बल्कि जो दूध में मक्खी हैं, उसे निकालने का प्रयास करें, क्योंकि ऐसे नेता दूध में पड़ी हुई मक्खी है, जिसके कारण दूध ग्राह्य नहीं होता। उनके टिव्ट में साफ लिखा है कि यह पद के मद में की गई कारस्तानी के मद में की गई कारस्तानी का बखान है,

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बस एक यही काम रह गया था रघुवर जी, आपने वो भी कर दिया, पार्टी कार्यालय निर्माण में भी धोखाधड़ी करने से आप बाज नहीं आये

जमशेदपुर पूर्व में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को विधानसभा चुनाव में धूल चटानेवाले निर्दलीय प्रत्याशी सरयू राय के एक टिव्ट ने भाजपा की चूलें हिला दी हैं। उस भाजपा की, यहां तक की, उस रघुवर दास की, जिनका तकिया कलाम था, भ्रष्टाचार मुक्त शासन वे दे रहे हैं, पर इसी भ्रष्टाचार मुक्त शासन की बात करनेवाले रघुवर दास ने अपने ही पार्टी के साथ कैसे दगा की है, उसका प्रमाण है सरयू राय की यह टिव्ट –

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ट्रांसजेंडरों, वृद्धजनों, दिव्यांगों और हाशिए पर पड़े कम्युनिटी को प्राथमिकता के आधार पर हो पूर्वी सिंहभूम में वैक्सीनेशन

 

वैक्सीनेशन की पहुंच को लेकर केन्द्र सरकार की ओर से लगातार जरुरी कदम उठाए जा रहे हैं। सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग और स्वास्थ्य विभाग इन दोनों की तरफ से राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ट्रांसजेंडरों, हाशिए पर पड़े, वृद्धजनों, दिव्यांगों और विशेष रोगों से ग्रस्त लोगों के लिए प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेशन की व्यवस्था करे। पूर्वी सिंहभूम के बगल सरायकेला में विशेष रोगों से ग्रसित लोगों के लिए प्राथमिकता के आधार पर ऐसा किया जा रहा है।

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पंचायत का तुगलकी फरमान, विधवा को किया घर से बाहर, कुणाल षाड़ंगी के एक ट्विट पर सक्रिय हुआ प्रशासन, विधवा को मिली राहत, बोकारो की घटना

जान लीजिये, भाजपा के प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी न तो बोकारो के भाजपा विधायक है और न ही बोकारो(धनबाद संसदीय क्षेत्र में पड़ता है बोकारो) के सांसद, फिर भी बोकारो की एक महिला, उनसे मदद की गुहार लगाती है, वो भी तब जब कोई उसकी मदद के लिए आगे नहीं आता, वह किसी से ट्विट कराकर कुणाल षाड़ंगी से मदद की गुहार लगाती हैं और जो उसके साथ होता है, वो सभी के सामने हैं।

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रांची में झोलाछाप डाक्टरों के सम्मान में जुटे ग्रामीण, किया सम्मान समारोह आयोजित, जमकर की झोलाछाप डाक्टरों की प्रशंसा

रांची में इन दिनों एक समाचार की खुब चर्चा है। ये चर्चा रांची के नेवरी गांव की है, जहां ग्रामीणों ने झोला छाप डाक्टरों को सम्मानित किया है। ग्रामीणों का कहना है कि इन झोला छाप डाक्टरों ने ही ग्रामीणों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, अगर ये नहीं होते तो कोरोना से लड़ रहे ग्रामीणों को बचाना मुश्किल होता। इन ग्रामीणों की यह भी मांग है कि इन झोला छाप डाक्टरों का मनोबल बढ़ाया जाय, उन्हें प्रशिक्षित किया जाय।

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कोरोना काल में सेवा कार्य को लेकर राजनीतिक दीवारें ढहीं, युवाओं ने मिलकर दिया झारखण्ड को सहारा

भले ही कोरोना ने हमारे जन-जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया हो, हमारे अपनों में से कई के जीवन लील गया हो, पर सच्चाई यह भी है कि इस कोरोना ने ऐसे युवाओं को भी हमारे सामने लाकर खड़ा कर दिया, जिससे कोरोना के हालत ही कई स्थानों पर पस्त होते दीखे, हम यह कह सकते हैं कि जब-जब देश या समाज में इस प्रकार की परिस्थितियां बनेगी, जब जीवन पर संकट आयेगा तो निश्चय ही ऐसे युवाओं से लोगों की आस बनेगी, और ये युवा उन आशाओं को पूर्ण करने में कामयाब होंगे।

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अभी तो मुफ्त कफन मिलने की बात है, जल्द ही मुफ्त कफन की चोरी करनेवाले यानी कफनचोर भी हर मुहल्ले में दिखेंगे, दिक्कत क्या है?

हेमन्त जी, ये मुफ्त कफन देनेवाला आइडिया किस महान सलाहकार का है? ऐसे महान विभूतियों का दर्शन जनता को कराइये क्योंकि इनकी कृपा से ही राज्य में जल्द ही कफनचोर भी आनेवाले समय में दिखाई पड़ेंगे, क्योंकि जो भी योजनाएं बनती है, उन योजनाओं का बंटाधार करनेवाले लोगों की उत्पत्ति भी उसी समय हो जाती है, ऐसे में जहां तक मेरा मानना है कि आम तौर पर दुनिया का कोई व्यक्ति सब कुछ कहलाना पसन्द करता हैं, पर कफनचोर कहलाना पसंद नहीं करता, अब राज्य में जल्द ही कफनचोर भी दिखाई पड़ेंगे,

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