वो आखिरी call और सपना (पार्ट – वन)
वो आखिरी बात जो भूलती नहीं और अब ये बात कोई भूलेगा नहीं कि जो चला गया उसके अधूरे सपनों को कोई और नहीं बल्कि उसकी जीवनसंगिनी ही पूरा करेगी। आपलोग सोच रहे होंगे कि मैं किसकी बात कर रही हूं। इस कोरोना काल में प्रति पल अपने मित्रों, परिचितों, शुभचिंतकों को खोते रहने के माहौल में कुछ लोगों का यूं चले जाना बहुत खल गया। झारखण्ड से 35 पत्रकारों को कोरोना ने छीन लिया। सबको तो नहीं जानती मगर दो लोग थे जिन्हें जानती थी, जिनसे जुड़ी थी। ये दोनों ऐसे चले गए कि मैं नि:शब्द और निस्तब्ध रह गई।
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