ये जो तुम पत्रकारिता का धौंस दिखा रहे हो न, ये पत्रकारिता नहीं, बल्कि अपराध है…
यह आज के दौर में चल रही जो पत्रकारिता है, वह दरअसल पत्रकारिता नहीं, शत प्रतिशत व्यवसाय है और जहां व्यवसाय होगा तो उसमें मानवीय मूल्य व चरित्र नहीं दिखेगा, उसमें सिर्फ और सिर्फ कुटिलता दिखेगी, जिस कुटिलता के आधार पर कितना धन कमाया गया, सिर्फ इसी पर विचार किया जायेगा, दूसरी मानवीय मूल्य धरे के धरे रह जायेंगे। यह बातें मैं ऐसे ही नहीं कर रहा हूं, इधर जो पत्रकारों का हुजूम जो विभिन्न प्रेस कांफ्रेसों में कुकुरमुत्ते की तरह दिखाई पड़ रहे हैं या जो भेड़िया धसान अखबार, चैनल व पोर्टल खुल रहे हैं।
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