वो मोदी है, वो सत्ता को ठोकर मार सकता है, पर स्वयं द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय को वापस नहीं ले सकता

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बिहार में एक लोकोक्ति है – अक्ल बड़ा या भैंस, तो जो मूर्ख होते हैं, वे अपनी बुद्धि के अनुसार बोल देते है कि –भैंस, क्योंकि उन्हें काला भैंस ही अक्ल के सामने बड़ा दिखाई पड़ता है। ये मूर्ख भैस को बड़ा दिखाने में एक से एक तर्क भी देते हैं, कहते है कि भैंस दूध देती है, जिसे पीकर हम बलवान होते है, गोबर देती है, जो बहुत उपयोगी होती है, इसलिए अक्ल से बड़ी तो भैंस है।

ठीक उसी प्रकार आज कुछ लोगों से पूछिये कि देश बड़ा या धूर्त राजनीतिज्ञों के समर्थन में चल रहा आज का किसान आंदोलन, तो वे भी अक्ल बड़ा या भैंस के बड़ा के तर्ज पर तर्क देते हुए कहेंगे कि धूर्त राजनीतिज्ञों के समर्थन में चल रहा किसान आंदोलन, वो किसान आंदोलन जिसने अपनी सार्थकता उसी दिन खो दी, जब उसने लाल किले पर गुंडागर्दी मचाई, लाल किले को निशाने पर लिया।

वहां धार्मिक प्रतीक चिह्न वाले झंडे फहरा दिये, जवानों पर तलवार भांजे, लाठियां चलाई, ट्रैक्टर चलवा दिये और कुछ तथाकथित पत्रकारों ने इसी दौरान गलत खबरें भी प्रसारित कर दी कि जवानों की गोली से एक किसान की जान चली गई, पर सच्चाई क्या था? उस किसान की जान ट्रैक्टर पलटने से हो गई थी।

इसी बीच किसानों के नेता राकेश टिकैत खुद क्या बोल रहे हैं और कैसे अपनी ही बातों से पलट जा रहे हैं, उनको खुद नहीं पता। कल तक तो वे कह रहे थे कि लाल किले की घटना में भाजपाइयों का हाथ है, और जब लाल किले की घटना को लेकर दिल्ली पुलिस सख्त हुई, सीधे धर-पकड़ होने लगी तो अब ये कह रहे है कि जब तक पकड़े गये किसानों को सरकार छोड़ती नही बात शुरु करने या आंदोलन खत्म करने का सवाल ही नहीं होता।

अब बात यहां ये आती है कि जब लाल किले पर गुंडई करनेवाले भाजपाई ही थे और सरकार भाजपा ही वालों पर कार्रवाई कर रही हैं तो अब आपको क्या दिक्कत है? ये दिक्कत ही बता देती है कि किसान आंदोलन दरअसल तथाकथित किसानों का आंदोलन बन चुका है, जिनका न तो कृषि कानूनों से मतलब है और न ही किसानों से, ये सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती दे रहे है, और शायद इन्हें नहीं पता कि

वो मोदी है, वो सत्ता को ठोकर मार सकता है, पर स्वयं द्वारा लिए गए निर्णय को वापस नहीं ले सकता, ये बातें किसान आंदोलन को हवा दे रहे लोगों को ही नहीं, पूरी दुनिया को समझ लेनी चाहिए और ये बातें दुनिया को समझ में आ गई, पर भारत के कुछ लोगों को समझ में नहीं आई है, जल्दी समझ में आ भी जायेगी।

आश्चर्य इस बात की भी है कि किसानों के आंदोलन को आजकल वे लोग भी हवा दे रहे हैं, जिनको किसान शब्द का अर्थ ही नहीं मालूम, जिन्होंने पोर्न फिल्मों से खुद की पहचान बनाई है, यहां बात हो रही है – रिहाना और मिया खलीफा की, भाई मेरे देश में आज जैसे महानुभावों की दिलचस्पी क्यों? और जब विश्व के महानतम बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने भारत की संप्रभुता को चुनौती देनेवालों को सावधान रहने को कहा तो जो भारत में रहनेवाले कट्टर मोदी-विरोधी है, वे भी सचिन तेंदुलकर पर टूट पड़े।

भाई किसान आंदोलन को समर्थन करनेवालों पहले खुद को ये बताओ कि तुम्हारा एजेंडा क्या है? अगर तुम्हारा एजेंडा मोदी का विरोध करना है, चाहे मौका कुछ भी हो, तब तो तुम्हारा इलाज करना मोदी को बहुत अच्छी तरह आता है, और अगर तुम्हारा एजेंडा देश के किसान हैं तो फिर ये भी मान लो कि किसान केवल भारत के पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर-प्रदेश में ही नहीं रहते, वे भारत के अन्य राज्यों में भी रहते हैं और वे आज भी इस मुद्दे को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं, और न तो वे इसे लेकर महापंचायत बुला रहे हैं और न ही कोई हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं, जो आप कर रहे हैं या करवा रहे हैं।

कुछ तथाकथित वामपंथी, कांग्रेस समर्थित, अथवा मोदी के कट्टर विरोधी पत्रकारों का समूह दिन रात मोदी विरोध में लगकर, उनके अच्छे या बुरे सभी फैसलों पर एक ही समान उत्तर देता है कि मोदी देश के लिए खतरा है, लेकिन ये नहीं बताता कि देश का खतरा कैसे है? क्या इसलिए कि मोदी ने देश में धारा 370 खत्म कर दिया, मोदी ने सदा के लिए राम-जन्मभूमि विवाद ही खत्म कर दिये, भारत-बांगलादेश सीमा विवाद ही सदा के लिए खत्म कर दिया, चीन जैसे उभरते साम्राज्यवादी ताकत को उसकी औकात बता दी और कहा कि तुम अपनी सीमा में रहो।

विदेशी कंपनियों के आगे भारतीय स्वदेशी कंपनियों और देश के नवयुवकों में आत्मनिर्भरता के बीज बोए, धर्मनिरपेक्षता के नाम पर चल रहे धर्मान्तरण के खेल पर नकेल कसा, गरीबों के घर बनवाने शुरु किये, कोविड 19 के समय़ देश के लोगों में उत्साह का संचार करते हुए आज कोरोना का वैक्सीन वह भी मुफ्त में लोगों तक पहुंचा रहे हैं वह भी बिना भेदभाव किये।

दरअसल आप मोदी का विरोध आज से नहीं कर रहे, आप तो जब वह व्यक्ति गुजरात का मुख्यमंत्री था, तभी से विरोध कर रहे हैं और आप जितना विरोध कर रहे हैं, वो उतना ही मजबूत हो रहा है, और वो मजबूत रहेगा क्योंकि देश उन्हीं के हाथों में सुरक्षित हैं, क्योंकि वो अपने लिए गुजरात या देश के अन्य भागों में करोड़ों की जमीन अथवा साम्राज्य नहीं बसाया, जैसा कि राहुल-प्रियंका के परिवारवालों ने किया।

मोदी मीडिया का जप करनेवालों पत्रकारों या लोगों ये भी बताओ कि इन्दिरा गांधी के शासनकाल के समय आकाशवाणी या दूरदर्शन के समाचार कब और कैसे प्रसारित होते थे? राजीववाणी या राजीवदर्शन किसे कहा जाता था, आज तो कई निजी चैनल व सोशल साइट है, आज तो जो भी गलत करेगा, कोई न कोई उसका विरोध में आ ही जायेगा, चाहे कुछ भी हो, लेकिन जरा बताओं, जब ये सब कुछ नहीं था तो फिर क्या था?

हमें तो आज भी याद है कि भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी पर भी आज का वायर का संपादक कड़ी टिप्पणी दूरदर्शन के माध्यम से कर देता था, योगेन्द्र यादव भी किया करते थे, जो विभिन्न परिस्थितियों में अपना चेहरा बदलते रहते है। मृणाल पांडे तो जब हिन्दुस्तान की संपादक थी तो उन्हें कांग्रेस में ही हिन्दुस्तान दिखता था, क्या हम ये सब भूल गये हैं, फिर भी किसी ने ऐसे लोगों पर तीखी टिप्पणियां नहीं की।

लेकिन आजकल जिसे देखो, मोदी पर कुछ लिख दिया तो मोदी भक्त हो गया और जो मोदी के खिलाफ लिख दिया तो वो क्रांतिकारी हो गया, मेरा तो मानना है कि सही हो या गलत, अगर कोई गलत है तो गलत बताओ या सही हैं तो सही, ये क्या आपने अपने दिमाग में बिठा लिया और चल पड़े उसे आजीवन झूठा साबित करने, ये पत्रकारिता नहीं, ये ईर्ष्या है, जलन है, जिसकी कोई औकात ही नहीं, उसके किस्मत में हार ही लिखा है।

यहीं कारण है कि नरेन्द्र मोदी इतना होने के बावजूद चट्टान की तरह टिका है, क्योंकि उसे इसकी परवाह नहीं कि आगे उसे प्रधानमंत्री की कुर्सी मिलेगी या नहीं, वो तो सीधे वहीं कर रहा हैं, जो उसे करना चाहिए, जनता उसे समर्थन भी दे रही है, लीजिये आप कल तक मिया खलीफा और रिहाना पर मचल रहे थे न, जिसे आप जो बाइडेन कहते है उसने भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस कृषि कानूनों का समर्थन कर दिया और पीएम मोदी के किसानों के प्रति संवेदना की भी प्रशंसा कर दी।

अब क्या कीजियेगा, अरे आप कीजियेगा क्या आप तो सुप्रीम कोर्ट तक को नहीं छोड़ा है, उनके जजों पर तीखी टिप्पणियां की है, ऐसे में आप ही जो कहेंगे वहीं सत्य होगा, ये कैसे मान लिया। आप सिर्फ आंदोलनकारी है, आपके साथ आंदोलनकारियों जैसा ही व्यवहार होना चाहिए, पर चूंकि आपने लाल किले को निशाना बनाया, सुप्रीम कोर्ट पर भी तंज कसे, ऐसे में मोदी जी जो भी करेंगे, उन्हें जनता का समर्थन ही मिलेगा, आपको तो मिलने का सवाल ही नहीं, चाहे आप कितना भी भीड़ क्यों न बटोर लें या देश-विरोधी ताकतें आपको क्यों न समर्थन दे दें, देश की जनता को पता है कि देश सही हाथों में हैं। अंततः जाते जाते –

क्यों बे, अपने देश में पोर्न स्टारों की कमी थी, जो ‘रिहाना’ के आगे जाकर ठूमके लगा दिया।

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