शर्मनाकः झूठा विज्ञापन छापनेवाला अखबार ही चोर-चोर चिल्ला रहा है
पहले पैसे की लालच में आकर खुद झूठे विज्ञापन छापो और जब आपके अखबार में छपे विज्ञापन को सच मानकर (वो इसलिए क्योंकि आप खुद को अखबार नहीं मानते, आप तो खुद को ‘अखबार नहीं आंदोलन’ कहते हैं), यहां के बेरोजगार युवक अपनी जमा पूंजी लूटा दें, तो फिर अपने ही अखबार में ठगी के मामले का समाचार छापो, और वह भी तब,
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