CM ने दिये CID जांच के आदेश, क्या आरोपी सफेदपोश और पुलिस अधिकारी नपेंगे?

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बहुचर्चित मानगो रेप केस के सीआइडी जांच के आदेश दिये हैं, तथा एक महीने के अंदर इसकी जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा है, हालांकि दुष्कर्म की पीड़िता इस मामले की सीबीआई जांच चाहती है, हम आपको बताते चलें कि इस कांड में समाज के कई संभ्रांत लोग एवं पुलिस पदाधिकारी भी शामिल है।

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बहुचर्चित मानगो रेप केस के सीआइडी जांच के आदेश दिये हैं, तथा एक महीने के अंदर इसकी जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा है, हालांकि दुष्कर्म की पीड़िता इस मामले की सीबीआई जांच चाहती है, हम आपको बताते चलें कि इस कांड में समाज के कई संभ्रांत लोग एवं पुलिस पदाधिकारी भी शामिल है। आरोप एमजीएम थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी एवं डीएसपी पर भी हैं, हालांकि इस मामले को दबाने की भरपूर कोशिश की गई, पर पीड़िता और नानक सेठ की हिम्मत की दाद देनी होगी, कि वे अब तक टूटे नहीं हैं, और वे हर हाल में न्याय पाने के लिए संघर्ष करने से पीछे नहीं हट रहे हैं।

आश्चर्य की बात है कि मानगो थाने में दर्ज प्राथमिकी के बाद पुलिस अपने ढंग से जांच करती रही और पीड़िता की बातों पर ध्यान ही नहीं दिया, वह हर बात तथा उन लोगों के बारे में बताती रही, जिन्होंने उसके साथ दुष्कर्म किया, तथा देह व्यापार में ढकेला, पर पुलिस उन सभी को बचाने का ज्यादा प्रयास की, तथा हद तो तब हो गई कि पुलिसकर्मी भी इस पीड़िता को अपना हवस का शिकार बनाने से नहीं चूके।

पीड़िता बताती है कि दुष्कर्म के दौरान वह कई बार गर्भवती हुई और उसका  जमशेदपुर के ही एक नर्सिंग होम में गर्भपात भी कराया जाता था, दुष्कर्म के दौरान, उसे एक महिला इंजेक्शन भी लगाती थी, जिसे पुलिस ने एक बार पकड़ा भी था, पर पीड़िता के समक्ष उसे नहीं लाया गया, छोड़ दिया गया, पूरे मामले से पता चलता है कि शायद पुलिस को सब मालूम है कि कौन-कौन लोग इस धंधे में शामिल हैं, वह सभी को बचाना चाहती है तथा खुद भी पाक साफ रहना चाहती है।

पुलिस की केस –डायरी में इस मामले को लेकर हुए घालमेल पर सहारा सिटी में रह रहे नानक सेठ ने राज्यपाल को पत्र भी लिखा था, जिसमें उन्होंने कुछ सवाल भी उठाए थे, तथा न्याय की गुहार भी लगाई थी।

नानक सेठ ने क्या लिखा था, राज्यपाल को, जरा ध्यान से देखिये –

  1. एसएसपी को लिखित देने के बाद मामले का संज्ञान नहीं लिया गया।
  2. प्राथमिकी के तुरंत बाद अखबार और न्यूज चैनल से पता चला कि कई संगठन (लगभग तीन से चार) एसएसपी-एसपी कार्यालय में प्राथमिकी झूठा का नारा लगाते हुए कि केस झूठा है, ऐसा लगता है कि आरोपियों के कार्यकर्ता होंगे।
  3. प्राथमिकी दर्ज होने के लगभग 20 दिनों बाद न्यूज चैनल के दबाव में गिरफ्तारी होती है।
  4. मात्र तीन लोगों की गिरफ्तारी होती है, जबकि पीड़िता ने कइयों के नाम बताएं।
  5. मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता का उम्र ज्यादा बता दिया गया, (जबकि स्कूल प्रमाण पत्र में पीड़िता नाबालिग है) ताकि पोक्सो एक्ट हटा दिया जाये।
  6. पुलिस द्वारा घटनास्थल की पहचान कराई जाती है, पर एमजीएम थाना की नहीं, जबकि पीड़िता थाना में बलात्कार की घटना को विस्तार से बताई है।
  7. केस में एक महिला आरोपी को पुलिस बुलाती है, लेकिन पुछताछ करके छोड़ देती है, जबकि उस महिला पर संगीन आरोप है।
  8. न्यायालय से परमिशन मिलने के बाद भी तीनों आरोपियों का नार्को टेस्ट नहीं कराया जाता, उनमें से सिर्फ एक का नार्को टेस्ट कराया जाता है।
  9. आरोपी थाना प्रभारी इमदाद अंसारी एवं डीएसपी अजय केरकेट्टा और अन्य पीड़िता के बयान को बदलवाने के लिए नानक सेठ के आवास पर आये थे, जिसका पूरा साक्ष्य वाइस रिकार्डिंग उनके पास मौजूद है, जो प्रशासन को भी उपलब्ध कराया गया है।
  10. पुलिस के कई पदाधिकारियों द्वारा पीड़िता तथा नानक सेठ का विडियो बयान लिया गया, लिखित बयान लिया गया, जिसमें सभी का हस्ताक्षर हैं, पर उसे कोर्ट में जमा नहीं किया गया।
  11. पुलिस ने पीड़िता से एमजीएम थाने में बलात्कार करनेवाले थाना प्रभारी और डीएसपी का, केस डायरी और चार्जशीट में कही जिक्र नहीं किया, जबकि एसपी, डीआइजी, एसएसपी, महिला थाना प्रभारी द्वारा कई फोटो दिखाया गया, जिसमें पीड़िता ने इमदाद अंसारी की पहचान भी की।
  12. इस केस में पुलिस के दो अधिकारी, राजनीतिक हस्ती, असामाजिक तत्व आरोपी है, फिर भी पीड़िता को सुरक्षा का इंतजाम नहीं किया गया।
  13. साकची स्थित नर्सिंग होम में अभियुक्तों द्वारा चार बार गर्भपात कराया गया, पुलिस के सामने पीड़िता ने गर्भपात करानेवाले डाक्टर की पहचान भी की, लेकिन पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि नर्स की स्वीकारोक्ति का विडियो रिकार्डिंग साक्ष्य के तौर पर उपलब्ध है, जिसमें नर्स स्वीकार करती है कि पीड़िता के साथ ऐसा हुआ।

ऐसे कई कमेन्टस के साथ, राज्यपाल को नानक सेठ ने आवेदन दिये हैं, ताकि न्याय मिले, पर न्याय कहीं मिल नहीं रहा। अब तक इस मामले में पुलिस मात्र तीन लोगों को पकड़ी हैं, इन्द्रपाल सैनी, जो नानक का दोस्त था, नानक के घर आया जाया करता था, तथा पीड़िता पर बुरी नजर डाली और उसे अपने हवस का शिकार बनाया, तथा इस देह व्यापार के धंधे में डाला, दूसरा शिव कुमार महतो, जो बिजली मिस्त्री हैं, जिसके संपर्क में पहली बार पीड़िता आयी और तीसरा श्रीकांत महतो, सोसाइटी के माली का दामाद है। बाकी जो 19 लोग, जिसमें एक राजनीतिक दल का कद्दावर नेता का अपना भाई है, तथा अन्य रसूख वाले लोगों को पुलिस बचाने में ज्यादा दिमाग खपा रही हैं।

तभी तो नानक सेठ के एक दोस्त ने न्याय पाने के इस जद्दोजहद पर एक कविता लिख दी –

नाबालिग की इज्जत को सबने लूटा बार-बार

क्या सगा, क्या पराया, सबने किया बलात्कार

अजब शहर है मेरा, न्याय भी नहीं मिलता है यार

कर रहे हैं इंतजार, दर्ज करा के एफआइआर

पुलिस पर कैसे करे ऐतबार

कोतवाल जहां है खुद कसूरवार

पीएम, सीएम, आईओ, एसपी दिखने में सब ईमानदार

फिर भी अपराधी घूम रहे चौक-बाजार

Krishna Bihari Mishra

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