SDO बाढ़ एवं बख्तियारपुर पुलिस की कारगुजारियों से परेशान हैं करनौती का एक परिवार

बख्तियारपुर पुलिस भी कम थोड़े ही हैं, आदमी कहीं भी रहे, उसे केस में फंसाना है, फंसा देगा, अब वो आदमी जिसे केस में फंसाया गया, वो कितना भी अच्छा आदमी क्यों न रहे, झेलते रहे और अपना काम इस बख्तियारपुर पुलिस के चक्कर में बर्बाद करता रहे। ताजा मामला पटना के बख्तियारपुर थाना के करनौती गांव का है, जहां बख्तियारपुर पुलिस ने बिना जांच किये ही एक जमीन विवाद में दोनों पक्षों को घसीट लिया हैं, जिन का एक जमीन के टुकड़े पर विवाद हैं।

बख्तियारपुर पुलिस भी कम थोड़े ही हैं, आदमी कहीं भी रहे, उसे केस में फंसाना है, फंसा देगा, अब वो आदमी जिसे केस में फंसाया गया, वो कितना भी अच्छा आदमी क्यों न रहे, झेलते रहे और अपना काम इस बख्तियारपुर पुलिस के चक्कर में बर्बाद करता रहे। ताजा मामला पटना के बख्तियारपुर थाना के करनौती गांव का है, जहां बख्तियारपुर पुलिस ने बिना जांच किये ही एक जमीन विवाद में दोनों पक्षों को घसीट लिया हैं, जिन का एक जमीन के टुकड़े पर विवाद हैं। यह नया कारनामा एसडीओ बाढ़ के आदेश पर हुआ, जबकि 2015 में इसी एसडीओ कोर्ट बाढ़ ने दोनों पक्षों को आदेश दिया था कि इस वाद का निष्पादन हेतु स्वत्व न्यायालय में दायर करें, इस वाद की कार्यवाही समाप्त की जाती है, फिर 2018 में, इसी मामले में एसडीओ बाढ़ को अपने ही आदेश के खिलाफ जाने की आवश्यकता क्यों पड़ गई?  

सच्चाई यह है कि उक्त जमीन, मौजा – करनौती, खाता नंबर 399, खेसरा नं. 1010, थाना नं. 133, रकवा 5 डिसिमिल, पर स्व. बिन्देश्वरी प्रसाद सिंह का कब्जा है,  स्व. बिन्देश्वरी प्रसाद सिंह ने यह जमीन 17 अप्रैल 1979 को उषा देवी, पति – भगवान दास से खरीदी थी, पर इधर स्व. धर्मनाथ सिंह के भतीजे श्रवण कुमार सिंह का कहना है कि उक्त प्लाट के ढाई डिसिमिल जमीन उनके चाचा स्व. धर्मनाथ सिंह ने खरीदी थी।

इस संबंध में यह मामला, बख्तियारपुर पुलिस के अप्राथमिकी संख्या 02/2015 के प्रेषित आवेदन के आधार पर धारा 144 की कार्रवाई एसडीओ कोर्ट में प्रारम्भ की गई, जहां एसडीओ कोर्ट ने 24.09.2015 को दोनों पक्षों से न्यायालय में जाकर स्वत्व दायर करने का आदेश दिया।

इसी बीच जब मामला एसडीओ कोर्ट में चल रहा था, तब थाना प्रभारी के अनुरोध पर बख्तियारपुर के अंचलाधिकारी ने अपने अंचल निरीक्षक रणधीर कुमार सिंह से पूरे मामले की जांच कराई थी, जिसमें अंचल निरीक्षक रणधीर कुमार सिंह ने अपने निष्कर्ष में यह कहा था कि उक्त विवाद, कागजात एवं सामाजिक अनुशास्त के मद्देनजर एवं वर्तमान तथ्य जो प्रकाश में आती है, विवादित भूखण्ड पर बिन्देश्वरी प्रसाद सिंह एवं उनके वारिसान का अधिकार वैध है।

आश्चर्य इस बात की है कि किसी भी जमीन के वाद-विवाद की स्थिति में अंचलाधिकारी कार्यालय ही मान्य करता है कि उक्त जमीन पर किसका कब्जा है या नहीं, वह कब्जा वैध है या अवैध, पर अंचलाधिकारी के अंचल निरीक्षक के जांच प्रतिवेदन को भी बख्तियारपुर पुलिस फिलहाल नहीं मान रही और जमीन को विवादित मानकर चल रही है, तथा इस मामले में भा.दं.सं की 107/116 के अंतर्गत संबंधित व्यक्तियों पर कार्रवाई करने की अनुमति अनुमंडलाधिकारी से मांग ली। जिन पर 107/116 लगाया गया है, वे हैं – प्रथम पक्ष – श्रवण कुमार सिंह, तथा दूसरा पक्ष – सुनील सौरभ, सुधीर कुमार, बब्लू सिंह, सिन्टू सिंह, जबकि उक्त जमीन पर धारा 144 लगाते हुए दोनों पक्षों को भी समेट लिया गया है, तथा 144 में नवल सिंह को अलग से जोड़ दिया गया है।

बताया जाता है कि नवल सिंह पत्रकार हैं, जो रांची में रहते हैं, सुनील सौरभ भी पत्रकार हैं, जो गया में रहते हैं, सुधीर सिंह गया के एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करते हैं, बब्लू सिंह रांची में रहते हैं तथा ये एक मीडिया हाउस के मालिक हैं। इधर करनौती के ग्रामीणों का कहना है कि उक्त जमीन पर कोई विवाद ही नहीं है, बल्कि विवाद पैदा किया जा रहा है, ये जमीन बिन्देश्वरी प्रसाद सिंह के वारिसों का हैं, सीओ कार्यालय भी इस बात को मानता है, रही बात अगर किसी को दिक्कत है तो 2015 में एसडीओ कोर्ट ने कह ही दिया कि जिनको विवाद लगता है, वे कोर्ट जाये, उसके बाद भी अब नये सिरे से एसडीओ बाढ़ का इसमें दिलचस्पी लेना, बहुत कुछ कह दे रहा है।

ग्रामीण, बख्तियारपुर पुलिस एवं एसडीओ बाढ़ की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हैं, वे कहते है कि बख्तियारपुर पुलिस सब कुछ जानती है, पर वो अनजान बनकर, वो गलतियां कर रही है, जिसकी इजाजत कानून भी नहीं देता। किसी भी व्यक्ति को बेवजह फंसाने की कुचेष्टा को कानून भी इजाजत नहीं देता, इसलिए बख्तियारपुर पुलिस एवं एसडीओ बाढ़, सत्य को जमीन पर उतारने की कोशिश करें, न कि मामले को उलझाने में दिलचस्पी रखे।

इसी बीच बख्तियारपुर पुलिस की कारगुजारियों पर, एवं एसडीओ बाढ़ के क्रियाकलापों पर आक्रोश व्यक्त करते हुए, एक शिकायत पत्र बब्लू सिंह ने पुनः अनुमंडलाधिकारी बाढ़ को सौंपा है, तथा उस पत्र के माध्यम से अनुमंडलाधिकारी बाढ़ से न्याय की गुहार लगाई है। क्या एसडीओ बाढ़ तथा बख्तियारपुर पुलिस बब्लू सिंह को न्याय दिला पायेगी, या जो बिहार में एक नये प्रकार का शासन चला है, जनता को परेशान करने का, उन्हें फंसाने का, उसमें ये बब्लू सिंह उलझकर रह जायेंगे?

Krishna Bihari Mishra

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