“निरहुआ” जीतेगा या हारेगा ये वक्त बतायेगा, पर उसने खुद को घाघ समझनेवाले पांच पत्रकारों को एक वैचारिक संघर्ष में जरुर धूल चटा दिया
ये जो पत्रकार होते हैं न, जो दिल्ली में बैठते हैं, जो रुपयों के बंडल देखते ही, उछलकर एक चैनल से दूसरे चैनलों की डाल पर बैठ जाते हैं, जो अपने आका के इशारों पर विभिन्न चैनल्सों में डांस व एक्टिंग करते हैं और एक विशेष दल के लिए जिससे उनके आका जुड़े होते हैं, या जिनसे उनका काम सध रहा होता हैं, उसके पक्ष में हर कुकर्म करने को तैयार रहते हैं, ये खुद को बहुत ही चालाक और एक नंबर के धूर्त समझते हैं,
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