बिना पंक्ति में लगे ही सीएम रघुवर दास ने अपने मतदान केन्द्र पर जाकर किया मताधिकार का प्रयोग

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज अपने मताधिकार का प्रयोग कर दिया, वे सुबह नौ बजे के आसपास अपने मतदान केन्द्र हरिजन हाई स्कूल भालूबासा के मतदान केन्द्र संख्या 21 पर पहुंचे और बिना लाइन में लगे वे मतदान केन्द्र के अंदर प्रविष्ट होकर, मताधिकार का प्रयोग कर दिया। सूत्र बताते है कि जिस मतदान केन्द्र पर सीएम रघुवर दास ने मताधिकार का प्रयोग किया,

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज अपने मताधिकार का प्रयोग कर दिया, वे सुबह नौ बजे के आसपास अपने मतदान केन्द्र हरिजन हाई स्कूल भालूबासा के मतदान केन्द्र संख्या 21 पर पहुंचे और बिना लाइन में लगे वे मतदान केन्द्र के अंदर प्रविष्ट होकर, मताधिकार का प्रयोग कर दिया।

सूत्र बताते है कि जिस मतदान केन्द्र पर सीएम रघुवर दास ने मताधिकार का प्रयोग किया, वहां पहले से उनके परिवार के सदस्य पंक्तिबद्ध थे, पर जब उन्होंने देखा की सीएम रघुवर दास बिना पंक्ति लगे ही मतदान केन्द्र के अंदर प्रविष्ट कर रहे हैं, तो उनलोगों ने भी इसका फायदा उठाया, पंक्ति तोड़ी और वे सीएम रघुवर दास के साथ मतदान केन्द्र में प्रविष्ट होकर मताधिकार का प्रयोग किया।

सीएम रघुवर दास और उनके परिवार के द्वारा पंक्ति को तोड़कर, उसे नजरंदाज कर मताधिकार का प्रयोग करने पर पहले से लगे पंक्तिबद्ध लोगों में से कुछ का कहना है कि यह एक गलत परम्परा की शुरुआत हैं, मुख्यमंत्री हो या सामान्य मतदाता, सभी को मतदान केन्द्र पर एक मतदाता के रुप में खड़े होने चाहिए, न कि अपने पद का दुरुपयोग करते हुए, उसका लाभ उठाना चाहिए।

कुछ मतदाताओं का कहना था कि अपने सीएम रघुवर दास को कम से कम पीएम नरेन्द्र मोदी से तो सीखना ही चाहिए कि अपने मताधिकार का प्रयोग कैसे करना चाहिए? जब पीएम नरेन्द्र मोदी गुजरात के अपने मतदान केन्द्र पर पंक्तिबद्ध होकर मतदान कर सकते हैं तो अपने सीएम रघुवर दास क्यों नहीं।

कुछ मतदाताओं का कहना था कि अगर उन्हें लग रहा था कि पंक्ति लम्बी हैं या जिस मतदान केन्द्र पर मतदाताओं की पंक्ति लम्बी हो सकती हैं तो अपने लिए एक विशेष मतदान केन्द्र की व्यवस्था कर लेते, ऐसे में पंक्ति को तोड़ने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती और उनका काम भी निकल जाता।

लेकिन जिस प्रकार से पंक्ति को नजरदांज कर सीएम रघुवर दास और उनके परिवार के लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया, उसे किसी भी प्रकार से सही नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि इसे आम मतदाता खुद को अपमानित महसूस करता हैं, चुनाव आयोग को चाहिए कि ऐसे मतदाता जो खुद को औरों से अलग समझते हैं, उनके लिए अलग प्रकार का बूथ ही बना दें, ताकि आम मतदाता खुद को अपमानित महसूस नहीं कर सकें।

Krishna Bihari Mishra

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