जहां किसी विश्वविद्यालय का कुलपति, सेवा विस्तार के लिए नेताओं/सरकार की चिरौरी करें, वहां…
जिस देश व राज्य में विश्वविद्यालयों के कुलपति पद की बोली लगती हो, जहां कुलपति बनने के लिए प्राध्यापकों का दल किसी राजनीतिक दल के नेताओं की चिरौरी करता हो, जहां कुलपति बनने के लिए किसी संगठन से जुड़ा रहना आजकल प्राथमिकता हो गई हो, वहां इस बात की कल्पना करना, कि इन संस्थानों से स्वामी दयानन्द, स्वामी विवेकानन्द, रवीन्द्र नाथ ठाकुर जैसे महापुरुष, लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगना, सुभद्रा कुमारी चौहान जैसी कवयित्री तथा मुंशी प्रेमचंद जैसे साहित्यकार निकलेंगे,
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