Author: Krishna Bihari Mishra

अपनी बात

जहां किसी विश्वविद्यालय का कुलपति, सेवा विस्तार के लिए नेताओं/सरकार की चिरौरी करें, वहां…

जिस देश व राज्य में विश्वविद्यालयों के कुलपति पद की बोली लगती हो, जहां कुलपति बनने के लिए प्राध्यापकों का दल किसी राजनीतिक दल के नेताओं की चिरौरी करता हो, जहां कुलपति बनने के लिए किसी संगठन से जुड़ा रहना आजकल प्राथमिकता हो गई हो, वहां इस बात की कल्पना करना, कि इन संस्थानों से स्वामी दयानन्द, स्वामी विवेकानन्द, रवीन्द्र नाथ ठाकुर जैसे महापुरुष, लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगना, सुभद्रा कुमारी चौहान जैसी कवयित्री तथा मुंशी प्रेमचंद जैसे साहित्यकार निकलेंगे,

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अपनी बात

क्या स्वच्छता का जिम्मा सिर्फ सफाईकर्मियों का हैं और आपका काम सिर्फ गंदगी फैलाना

अगर पशु-पक्षी गंदगी फैलाते हैं तो समझ आता है कि उन्हें ज्ञान नहीं, पर जब मनुष्य गंदगी फैलाये और देश का प्रधानमंत्री लोगों से अपील करें कि आप स्वच्छता पर ध्यान दीजिये और उसके बाद भी किसी के कानों पर जूं न रेंगे। जहां पाये, वहां गंदगी फैलाये, तो इसे क्या कहेंगे? स्वच्छता के प्रति दिलचस्पी का न होना या जान-बूझकर, ढिठई के साथ वहीं काम करना, जिसकी इजाजत उस व्यक्ति की आत्मा भी नहीं देती, जो निरन्तर गंदगी फैलाते रहते हैं।

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अपनी बात

शर्मनाक, असरीता के मांदर की थाप पर झूमनेवाले CM एवं राज्यपाल ने अंतिम समय में उसे याद करना भी जरुरी नहीं समझा

भगवान बिरसा मुंडा की परपोती असरीता टूटी को झारखण्डी परम्परा एवं झारखण्डी जोहार के साथ लोगों ने शुक्रवार को अंतिम अश्रुपूर्ण विदाई दी। बड़ी संख्या में उनको दिल से चाहनेवाले मित्र, कुटुम्ब, परिवार और उनके समुदाय के लोग इस अवसर पर मौजूद थे, पर अगर कोई नहीं था, तो वह सरकार थी और सरकार के लोग, शायद उन्हें नहीं पता कि जो दिवंगत हुई है, वह कोई साधारण घर की बेटी नहीं,

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अपनी बात

अमृतसर में रेलवे ट्रैक पर रावण दहन देख रहे लोगों पर चढ़ गई ट्रेन, 50 की मौत, पूरा देश सदमें में

आज विजयादशमी है, पूरा देश विजयादशमी मना रहा था। विजयादशमी अमृतसर के धोबीघाट के जोड़ा फाटक के पास भी मनाया जा रहा था, जहां पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धु की पत्नी नवजोत कौर सिद्धु मुख्य अतिथि के रुप में मौजूद थी। बताया जाता है कि रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में आस-पास के लोग रेलवे ट्रैक पर मौजूद थे, जैसे ही रावण दहन प्रारंभ हुआ, रेलवे ट्रेक पर खड़े लोगों पर से ट्रेन गुजर गई, जिसमें 50 लोगो की मौत हो गई। मरनेवालों में बिहार और यूपी के लोगों की संख्या अधिक है।

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अपनी बात

नास्तिकों/अधर्मियों के झूठ पर, आधुनिक श्रवण कुमारों का करारा प्रहार, कई बेटों ने मां को मां से मिलाया

बिट्टू बहुत दिनों के बाद दुर्गापूजा की छुट्टी पर घर आया, बिट्टू जब भी आता है, वह अपने घर की चिन्ता करता है, वह घर के एक-एक सामान को देखता है कि किसी चीज की कमी तो नहीं, वो खुद उन चीजों की लिस्ट बनाता है, जिसकी घर में कमी हैं, और चल पड़ता है, उन आवश्यक चीजों को घर लाने के लिए। वह अपनी मां से बहुत प्यार करता है। उसे इस बात की फिक्र रहती है कि उसकी मां को किसी भी चीज के लिए कष्ट न उठाना पड़ें।

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अपनी बात

ऐसा आचरण करने से क्या फायदा, जब आपका संचित/अर्जित पुण्य ही नष्ट हो जाये

कबीर की एक पंक्ति है – माला फेरत जुग गया, मिटा न मन का फेर। कर का मन का छाड़ि के, मन का, मन का फेर।। ये पंक्ति बहुत कुछ कह देती है, अगर लोग इस पंक्ति को समझना चाहे। नवरात्र 18 अक्टूबर को ही समाप्त हो गया और आज विजयादशमी है। विजयादशमी को जयन्ती धारण किया जाता है। शमी का पूजन किया जाता है। अपराजिता पूजा होती है।

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अपनी बात

एक राजनीतिक खूंटे में बंधकर फेंक न्यूज के सहारे अपना भविष्य सुरक्षित करनेवाले पत्रकारों से देश को बचाइये

जब पत्रकार भाजपाई, कांग्रेसी, वामपंथी, बसपाई या अंबेडकरवादी हो जाये, तो समझ लीजिये उससे सर्वाधिक खतरा देश को है, क्योंकि फिर वह जनता के सामने सत्य नहीं परोस पाता, फिर वह उस पशु के समान हो जाता है, जिसके सामने उसका मालिक समय-समय पर रोटी के टूकड़े फेंकता रहता है और वह पशु इसके बदले अपने मालिक को देख संवेदनशीलता दिखाते हुए पूंछ हिलाता रहता है।

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अपनी बात

CM रघुवर की पुलिस से धनबादवासियों का भरोसा उठा, थामी लाठी, कर रहे IPS सुमन गुप्ता को याद

धनबाद के व्यापारियों का राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास की पुलिस से भरोसा उठ चुका है, वे यहां की पुलिस से ज्यादा भरोसा लाठी-डंडों पर कर रहे हैं, फिलहाल यहां चैंबर के पदाधिकारियों ने सभी व्यवसायियों से लाठी-डंडे रखने को कहा है, गत सोमवार को बड़ी संख्या में जिला चैंबर ने धनबाद के स्टेशन रोड और करकेन्द के दुकानदारों के बीच लाठी-डंडें भी बांटे।

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अपनी बात

बाल मंडली की दुर्गापूजा यानी दुर्गापाठ और मानसपाठ के माध्यम से अध्यात्म की ओर प्रथम प्रवेश

भाई वो हमलोगों का जमाना था, जब टमटम की जगह छोटी-छोटी टैक्सियां ले रही थी, बैलगाड़ियों की जगह करीब-करीब ट्रैक्टर और ट्रक ने ले लिए थे। खेतों से रेहट, लाठा-कुड़ी, नहरों से करींग एक तरह से गायब होने के कगार पर थे, और उनकी जगह पर पम्पिंग सेट ने ले लिये थे। उस वक्त न तो किसी के घर में टीवी था और न ही मोबाइल फोन, ले-देकर हमारे मुहल्ले में दो ही के घर में फोन थे, एक नन्दा साव और दूसरे राजेन्द्र प्रसाद के पास।

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अपनी बात

भारी अव्यवस्था, श्रद्धालुओं को परेशानी, न सुरक्षा की फिक्र, न कानून का भय, बोलो दुर्गा माता की जय

कल सप्तमी थी, मैंने सोचा चलो, पूरे परिवार के साथ चलते हैं, विभिन्न रांची की पूजा समितियों एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा किये गये बड़े-बड़े दावों तथा अखबारों एवं चैनलों में आ रहे समाचारों का स्वयं की आंखों से अवलोकन करते हैं, कि सचमुच पूरा रांची दुर्गामय हो गया है, भक्तिमय हो गया है कि वही ढाक के तीन पांत वाली हाल है।

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