अफसोस, जिन नेताओं को बात करने की तमीज नहीं, वे हमारे भाग्यविधाता बने हुए हैं, देश चला रहे हैं
जब से नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, और गुजरात में जिस प्रकार गोधरा में हिन्दू कारसेवकों को साबरमती एक्सप्रेस की एक बॉगी में जिन्दा जला दिया गया और उसकी प्रतिक्रिया स्वरुप पूरे गुजरात में दंगा भड़की, उसके बाद से भारत में कुछ पत्रकारों और राजनीतिज्ञों ने उनके साथ ऐसी प्रतिक्रियात्मक भेदभाव शुरु की, जिसकी जितनी निन्दा की जाय कम हैं, ऐसा नहीं कि यह देश में पहली और अंतिम प्रकार का दंगा था, इसके पूर्व भी इस देश ने कई दंगे झेले हैं।
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