राजधानी की दुर्गति के लिए सीपी सिंह दोषी और बिजली संकट के लिए कौन दोषी है पोद्दारजी?

सीपी सिंह ने राजधानी की दुर्गति कर दी, इसकी जिम्मेदारी से वे बच नहीं सकते और आपके सीएम रघुवर ने पूरे झारखण्ड की क्या कर दी, ये तो पोद्दार साहेब आपने बताया ही नहीं। भाई मेरा तो सवाल साफ है कि सी पी सिंह के प्रति जो उदारता आपने दिखाई, डॉयलॉग्स बोले। वो उदारता, आपने अपने प्रिय मुख्यमंत्री रघुवर दास पर क्यों नहीं दिखाई? सिर्फ इसलिए कि वे राज्य के मुख्यमंत्री है, सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर है, भाजपा के राज्यस्थ नेताओं में शीर्षस्थ पर है, क्योंकि उन्होंने आपको राज्यसभा तक पहुंचा दिया, और चूंकि कोई किसी के लिए कुछ भी करता है तो दीदा में लाज है या नहीं, इसका प्रदर्शन करने के लिए जब भी सीएम रघुवर दास को रगड़ने की बात आती है, आप चुप्पी साध लेते है।

आपको याद है कि इस राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कभी कहा था कि दिसम्बर 2018 तक अगर उन्होंने पूरे राज्य को 24 घंटे बिजली नहीं पहुंचाई तो वे वोट मांगने कहीं नहीं जायेंगे, पर दिसम्बर 2018 बीत गया, वे लोकसभा चुनाव में वोट मांगने गये और लोगों ने उन्हें दिल खोलकर वोट भी दिया, वे लोकसभा की 14 सीटों में से 12 सीटें जीत गये।

भाई, सच्चाई देखा जाये, तो राज्य का कोई भी मंत्री दावे के साथ यह नहीं कह सकता कि उसके विभाग में झोलझाल नहीं है, या उसके विभाग में कामकाज बहुत अच्छा हुआ है, जब राज्य का मुख्यमंत्री ही जनता से झूठे वादे करता हो और अपने वादों से मुकर जाता हो, तो फिर दूसरे से ये सवाल हम क्यों पूछे कि आपने ऐसा क्यों नहीं किया? क्योंकि एक लोकोक्ति है कि जैसेजैसे अगलका हरवा चलता है, ठीक वैसे ही पिछलका हरवा चलता है, जब राज्य का मुख्यमंत्री ही जनता से झूठे वादे करें और उसे पूरा नहीं करे, तो फिर दूसरे मंत्री से सवाल क्यों पूछे, वो तो जगजाहिर है, कि जब राज्य का मुख्यमंत्री ही झूठ बोलने में माहिर है तो वो तो मंत्री ही है।

सच्चाई यह है कि पूरे राज्य में बिजली की स्थिति गंभीर है, बच्चों की पढ़ाई बाधित है, दुर्भाग्य देखिये  राज्य के आधे से अधिक स्कूलों में बिजली ही नहीं है, राज्य के मात्र 47.46 प्रतिशत स्कूलों में ही बिजली कनेक्शन है। उद्योगधंधे तो बिजली नहीं रहने के कारण चौपट ही है, और इधर मुख्यमंत्री रघुवर दास का नया बयान गया कि 31 जुलाई तक रांची में जीरो कट बिजली की डेडलाइन सुनिश्चित कर दी गई है, तो भाई 31 जुलाई आने में अब कितना दिन ही बचा है, जो स्थिति है, फिर इनका बयान झूठ की वेदी पर सजने को तैयार है।

राजनीतिक पंडित बताते है कि दरअसल फिलहाल यहां तो किसी को राजधानी की बेहतरी से मतलब है और ही किसी को आम जनता के परेशानियों से मतलब है, ये फिलहाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लग चुके है और इधर भाजपा में जो लोग जातिवाद की राजनीति करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, वे चाहते है कि व्यवसायी वर्ग का दबदबा भाजपा में बरकरार रहे, और जो अन्य जातियों के लोग है, उन्हें अपमानित किया जाये तथा उन्हें जनता की नजरों में इतना गिरा दिया जाये कि आनेवाले समय में इन महारथियों का पत्ता कट जाये और फिर उनकी जगह कोई नया व्यवसायी ले लें। 

जिसके लिए ये सारे तिकड़म लगाये जा रहे हैं, नहीं तो गलतियां तो यहां के शहंशाह मुख्यमंत्री रघुवर दास भी खूब कर रहे हैं, सबसे बड़ी गलती तो राज्य में बिजली के लिए हो रही माथापच्ची है, पूरे राज्य में लोग बिजली के लिए हाहाकार कर रहे हैं, इसके कारण शिक्षा तो चौपट है ही, उद्योगधंधे भी चौपट है, उसके बाद भी महेश पोद्दार जैसे सांसदों के बयान में, सीएम रघुवर दास के प्रति शहद ही टपकता है, जबकि ऊर्जा मंत्रालय सीएम रघुवर दास के ही कब्जे में हैं और सबसे ज्यादा अगर लोग जिस विभाग से नाराज है, उस विभाग का नाम ऊर्जा विभाग ही हैं, पर महेश पोद्दार जैसे सांसदों को कौन समझाए।