Author: Krishna Bihari Mishra

अपनी बात

प्रेस क्लब की बैठक में कानूनी कार्रवाई को लेकर सहमति नहीं, वयोवृद्ध पत्रकारों ने चेताया क्लब को अपने ही चिराग से खाक होने से बचाएं

मंगलवार को रांची प्रेस क्लब की कार्यकारिणी की बैठक थी। यह बैठक संस्थान में ही आयोजित थी, जिसमें ज्यादातर प्रेस क्लब के अधिकारियों लोगों ने हिस्सा लिया। इसकी जानकारी वरिष्ठ पत्रकार सुशील कुमार सिंह मंटू ने अपने सोशल साइट फेसबुक के माध्यम से दी है। सुशील कुमार सिंह मंटू के कथाननुसार पूर्व में लिए गये निर्णय के तहत बैठक की मिनट्स टू मिनट्स की गतिविधियों की जानकारी सार्वजनिक करनी थी, लेकिन कमेटी में शामिल अधिकारियों ने इसे सार्वजनिक नहीं किया,

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अपनी बात

“बिरसा का गांडीव” तो इस जेठ की दुपहरिया में कई लोगों के तन-बदन में आग लगाकर फागुन की मस्ती में डूबा था, मतलब समझे कि ना समझे

भर फागुन रांची प्रेस क्लब के अधिकारी देवर लगिहे, भर फागुन… जोगी जी धीरे-धीरे रंग लगइहो धीरे-धीरे, गाली दियो धीरे-धीरे… आप कहेंगे कि अरे विद्रोही जी को क्या हो गया, इ तपती जेठ महीने में इनको फगुनाहट कैसे सुझ गया, तो भैया जी लोग, झारखण्डी जनता लोग, विभिन्न अखबारों-चैनलों में काम करनेवाले विद्वान पत्रकारों वो इसलिए कि अभी-अभी रांची से प्रकाशित “बिरसा का गांडीव” नामक अखबार ने हमें बताया है कि आज फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जिसका विक्रमी संवत् 2077 है।

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अपराध

चले थे “उगाही” का दाग मिटाने पर खुद की ईज्जत गवां बैठी रांची प्रेस क्लब वो भी दिन-दहाड़े

रांची प्रेस क्लब में मिशन ब्लू फाउंडेशन, कमलभद्र फैसिलिटीज व प्रेस क्लब द्वारा आयोजित प्रेस कांफ्रेस में अपनी बात रख रही अस्पताल में कार्यरत महिला कर्मचारी और पुरुष कर्मचारी ने जो संवाददाताओं के बीच में बात रखी हैं, वो बातें अकल्पनीय व एक महिला के साथ अपमान की एक नई गाथा कह रही है। आप कह सकते है कि इन तीनों ने जो कांफ्रेस की थी, वो कांफ्रेस ठीक उस लोकोक्ति को साकार कर रही है कि “आए थे हरिभजन को ओटन लगे कपास।”

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राजनीति

जमशेदपुर की तेजतर्रार महिला पत्रकार ने धमकी देनेवाले राज्य के एक मंत्री की चुनौती स्वीकार की, 2024 में देगी जवाब

जमशेदपुर की वरिष्ठ महिला पत्रकार अन्नी अमृता आज आक्रोशित दिखी। आक्रोशित होने का कारण, हेमन्त सरकार में शामिल एक मंत्री द्वारा उन्हें धमकी देना बताया जा रहा है। अन्नी ने इसी आक्रोश में एक पर एक ट्विट करना शुरु किया है, जो उनकी वेदनाओं को स्पष्ट कर दे रही हैं। अगर उनके ट्विट को देखा जाये तो लगता है कि उनके इरादे बुलंद हैं और हो सकता है कि वो 2024 के विधानसभा चुनाव में जमशेदपुर पश्चिम से राज्य के वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री की चूलें हिला दें।

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अपराध

एक और कलंक, रांची प्रेस क्लब का एक अधिकारी –  प्रेस क्लब रुम में एक लड़का और एक लड़की पाई गई

रांची प्रेस क्लब के नाम एक और कलंक जुड़ गया, और इस कलंक के साक्षी बने हैं, रांची प्रेस क्लब के ही अधिकारी व इनके मार्फत रांची प्रेस क्लब में चलाये जा रहे विभिन्न कार्यों में लिप्त अन्य महानुभाव। जिनके बीच व्हाट्सएप्प ग्रुप में हुई बातें और उसके स्क्रीन शॉट्स जो वायरल हैं, उसे आप देखेंगे तो आप माथा पकड़ लेंगे, कि आखिर रांची प्रेस क्लब में ये हो क्या रहा हैं? हम व्हाट्सएप्प ग्रुप की वो बातों को तो यहां दे रहे हैं, पर उस फोटो को नहीं देंगे, क्योंकि यह किसी लड़की और लड़के के भविष्य से जुड़ा मामला है,

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अपनी बात

अभिनन्दन करिये अंकित की टीम को, जिसने बंगलुरु से भटक कर कतरास पहुंचे ‘डीन जोन्स’ को उनके घर पहुंचाया

कुछ दिन पहले की बात है। विद्रोही24 को यह खबर मिली, जो बहुत ही संवेदनशील एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित थी। बंगलूरु से चलकर डीन जोन्स जहां उन्हें पहुंचना था, वे वहां तक तो नहीं पहुंचे, पर पहुंच गये दो हजार से भी ज्यादा किलोमीटर दूर धनबाद के कतरास, जहां इन्हें पहुंचना ही नहीं था। पता चला बंगलुरु से निकलने पर रास्ते में वे नशाखुरानी गिरोह के शिकार हो गये, जिनसे उनके पास रखी हुई सारे कीमती सामान भी चोरी हो गये।

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अपराध

रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों द्वारा इस्तीफा देने-नामंजूर करने की नौटंकी शुरू, उधर पंकज सोनी को बचाने में लगे उससे लाभ लेनेवाले/NGO चलाने वाले पत्रकारों के समूह

जैसे ही कल यानी 04 जून को रांची से प्रकाशित सांध्य दैनिक “बिरसा का गांडीव” ने रांची प्रेस क्लब और एक एनजीओ मिशन ब्लू फाउंडेशन के पंकज सोनी के करतूतों की बखिया उधेड़ी, पूरे सोशल मीडिया में बवाल मच गया, रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों में खलबली मच गई, क्योंकि उनका असली चेहरा लोगों के सामने आ चुका था, करीब-करीब सभी मीडियाकर्मियों ने इस कृत्य की घोर निन्दा की और जमकर अपने विचार सोशल साइट पर प्रकट कर दिये।

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अपनी बात

रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों ने अपने ही बंधु-बांधवों के मुंह पर गैरों से कालिख पुतवाई, उल्लू बनवाया, उगाही के आरोप लगवाएं सो अलग

अभिनन्दन करिये रांची प्रेस क्लब के अधिकारियों का, इन्होंने अपने ही सदस्यों (बंधू-बांधवों) को उल्लू बनाया हैं, इस कोरोना काल में आपदा को अवसर में बदलकर जमकर लूटपाट मचाई हैं, गैरों से अपने मुंह पर कालिख पुतवाई है, पूरे राज्य ही नहीं पूरे देश के लोगों के आखों में धूल झोंककर ईमानदार पत्रकारों की इज्जत लूटी है और जिसका जीता जागता सबूत है, रांची से प्रकाशित सांध्यकालीन अखबार “बिरसा का गांडीव” के आज का अंक।

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अपनी बात

वो आखिरी call और सपना (पार्ट – वन)

वो आखिरी बात जो भूलती नहीं और अब ये बात कोई भूलेगा नहीं कि जो चला गया उसके अधूरे सपनों को कोई और नहीं बल्कि उसकी जीवनसंगिनी ही पूरा करेगी। आपलोग सोच रहे होंगे कि मैं किसकी बात कर रही हूं। इस कोरोना काल में प्रति पल अपने मित्रों, परिचितों, शुभचिंतकों को खोते रहने के माहौल में कुछ लोगों का यूं चले जाना बहुत खल गया। झारखण्ड से 35 पत्रकारों को कोरोना ने छीन लिया। सबको तो नहीं जानती मगर दो लोग थे जिन्हें जानती थी, जिनसे जुड़ी थी। ये दोनों ऐसे चले गए कि मैं नि:शब्द और निस्तब्ध रह गई।

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अपराध

“दवाई दोस्त” को ठिकाने लगाने का काम शुरु, गरीबों से जीने का अधिकार मतलब सस्ती दवाएं छीनने की भी कोशिश

“दवाई दोस्त” नाम ही काफी है। जिन्हें सस्ती दवाइयां चाहिए, उपयोगी दवाइयां चाहिए, वे दवाई दोस्त प्रतिष्ठान का ही रुख करते हैं। अब तो झारखण्ड के निम्नवर्गीय व मध्यमवर्गीय परिवारों की पहली और अंतिम पसंद हो  गई है – दवाई दोस्त। जो लोग अपनी बिमारियों के कारण दवाओं के बिना एक पल भी नहीं रह सकते, उनके लिए दवाई दोस्त किसी संजीवनी से कम नहीं, क्योंकि जो दवाएं बाजार में एक सौ रुपये में मिलती है, वो दवाएं यहां मात्र पन्द्रह रुपये में आपको मिल जायेंगी।

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