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राज्य सरकार की नाकामी से पूरे राज्य में तबाही, आधा दर्जन की मौत, बाजारों में पसरा सन्नाटा

इन दिनों हो रही भारी वर्षा ने राजधानी रांची समेत पूरे झारखण्ड में तबाही मचा दी है। रांची के कई इलाकों में घरों में पानी प्रवेश कर गया है। राजधानी रांची के कई इलाकों में बाढ़ सा दृश्य है। बच्चों के स्कूल बंद करा दिये गये है। बाजारों में सन्नाटा पसरा है। भारी बारिश ने पशुओं के चारा पर भी संकट खड़ा कर दिया है। इस बारिश ने राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही कई योजनाओं की भी पोल खोल कर रख दी है।

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मद्रास हाइकोर्ट ने कहा सप्ताह में एक बार वंदे मातरम् गाना अनिवार्य

मद्रास हाइकोर्ट ने एक बहुत बड़ा फैसला सुनाया है। मद्रास हाइकोर्ट ने कहा है कि राज्य के सभी स्कूलों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में सप्ताह में कम से कम एक बार वंदे मातरम गाना अनिवार्य है। कोर्ट का यह भी कहना है कि राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों, निजी कंपनियों में भी महीने में एक बार राष्ट्रगीत अवश्य बजना चाहिए।

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झारखण्ड में भारी वर्षा, स्कूल बंद, पुल-पुलिये बहे, भारी तबाही

झारखण्ड में पिछले चार दिनों से हो रही भारी बारिश ने भारी तबाही मचा दिये है, भारी वर्षा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने स्कूल को बंद करने का आदेश जारी किया है, जन-जीवन अस्त व्यस्त है, सड़कों-बाजारों में सन्नाटा पसरा है, घर में लोग दुबके है, निकल वहीं रहा हैं, जिसे ज्यादा जरुरी कोई काम आ गया है, सरकारी कार्यालयों में भी इस भारी बारिश के प्रभाव है। मुख्य मार्गों पर पानी बह रहा है, कई गांव टापूओं में बदल गये है

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मुख्यमंत्री रघुवर दास का छत्तीसगढ़ प्रेम छलका, अब टच स्टोन के हवाले गरीबों का निवाला

क्या झारखण्ड की जनता इतनी गई गुजरी हैं कि, वह अपने भाई-बहनों को ठीक से खाना भी नहीं खिला सकती?  यह सवाल मैं इसलिये उठा रहा हूं क्योंकि रघुवर सरकार ने खिलाने-पिलाने के लिए भी एक नई कंपनी को हायर कर लिया है, जो शर्मनाक है। राज्य की भोली-भाली जनता को शायद ही मालूम है कि रघुवर सरकार ने पिछली मंगलवार की कैबिनेट में मुख्यमंत्री दाल भात योजना का नाम बदलकर मुख्यमंत्री कैंटीन योजना रख दिया और इसका जिम्मा सौंप दिया छतीसगढ़ की कंपनी मेसर्स टच स्टोन फाउँडेशन को।

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प्रभात खबर तुम कहां हो, जिम्मेदारी तो तुम्हारी भी बनती है…

प्रभात खबर तुम कहां हो? क्या तुम्हारी जिम्मेदारी नहीं बनती? क्या तुम्हारे यहां काम करनेवाले तुम्हारे मालिक, संपादक, पत्रकार एवं कर्मचारी गाय का दूध नहीं पीते? क्या तुम्हारे घर में गाय के गोबर का उपयोग नहीं होता?  क्या तुम्हारे घर में कोई भी संस्कार होते है, उसमें गाय के उपलों का उपयोग नहीं होता? क्या तुम्हारे यहां के लोग गाय के चमड़े से बने जूते, चप्पल या बैग या अन्य सामग्रियों का उपयोग नहीं करते?  क्या तुम मनुष्य नहीं हो?

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वनरक्षियों को नियुक्ति पत्र देने के बहाने अपना चेहरा चमकाने की कोशिश

क्या मुख्यमंत्री रघुवर दास बता सकते है कि जिन वनरक्षियों को वे नियुक्ति पत्र दे रहे हैं, वे उनकी कृपा से इस पद पर नियुक्त हो रहे है, कि नियुक्तिपत्र धारकों ने वनरक्षियों के लिए आयोजित परीक्षा में अपनी मेहनत से सफलता पाई है और जब अपने मेहनत से उन्होंने सफलता पाई तो इसका श्रेय वे स्वयं क्यों ले रहे हैं। इस प्रकार के आयोजन कराकर, इससे क्या मैसेज देना चाहते हैं।

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झारखण्ड में रघुवर की नई कंपनी की ब्रांडिंग से जनता कन्फ्यूज्ड

नई मंडली रांची आकर सीएम रघुवर दास की ब्रांडिंग में लग गई है। सीएम रघुवर दास भी नई मंडली की मूर्खतारुपी हरकतों से बहुत प्रसन्न है, इतने प्रसन्न है कि पूछिये मत। सूचना एवं जनसम्पर्क के वरीय अधिकारियों को कह दिया गया है कि आप अपना मुंह-कान सब बंद रखिये और ये जो नई मूर्ख मंडली आयी है, उसके आगे नतमस्तक हो जाये, वो जो करें, बस हां में हां मिलाइये, इससे ज्यादा कुछ करना नहीं है।

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हरिवंश ने गाया – बसो मेरे नैनन में नीतीश कुमार…

व्यक्ति स्वार्थ में कितना नीचे गिरता है? एक दल द्वारा पत्रकार से सांसद बनने के बाद कैसे कोई पत्रकार अपनी पत्रकारिता के स्वर्णिम काल को अपने ही हाथों से धू-धू कर जलाता है? उसके सुंदर उदाहरण है – हरिवंश।कल तक प्रभात खबर को शिखर पर ले जानेवाले और दैनिक भास्कर, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण जैसे अखबारों को धूल चटानेवाला, यह व्यक्ति आज दैनिक भास्कर के पन्नों पर दीख रहा है,

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तेजस्वी ने जो कल मीडिया के लिए गुंडा शब्द का प्रयोग किया, वह गलत नहीं था…

एक तरह से देखा जाय तो कल बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव के सुरक्षाकर्मियों ने जो पत्रकारों के साथ किया, वह एक तरह से ठीक ही किया और जो तेजस्वी प्रसाद यादव ने पत्रकारों के लिए गुंडे शब्द का प्रयोग किया, वह भी सहीं था। यह मैं इसलिए कह रहा हूं कि जिस चैनल के कैमरामैन की सुरक्षाकर्मियों द्वारा पिटाई हुई

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जो किसान आत्महत्या करें, वह किसान हो ही नहीं सकता…

किसान न हत्या करता है और न ही आत्महत्या। वह प्राणदाता है, वह अन्नदाता है, वह पूरे विश्व को अपने खून-पसीने से अन्न उपजा कर सभी का भरण-पोषण करता है, अगर वह आत्महत्या करने लगे, तो यह पूरे देश का दुर्भाग्य है, विश्व का दुर्भाग्य है और इस पाप से विश्व का कोई मानव बच नही सकता, क्योंकि जिसके अन्न खाकर वह जी रहा है, उसके सुख-दुख की जिम्मेवारी भी उसी की है, पर यह सोच आदर्श जीवन की पराकाष्ठा है…

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