बाबा राम-रहीम के गुंडों से ज्यादा दोषी वे नेता और मीडिया के लोग हैं, जो ऐसे कालनेमि पैदा करते हैं

पहले कालनेमियों को हर प्रकार से आगे बढ़ाओगे, जब यहीं कालनेमि प्राथमिक अवस्था में अपने चाल-चरित्र से समाज का नुकसान करना प्रारंभ करेंगे तो आप उन्हें राजनीतिक संरक्षण दोगे, उनके चरण छूओगे, सत्ता सुख पाने के लिए इनसे मदद भी लोगे, संग-संग सेल्फी लोगे। यहीं नहीं नेता तो नेता, मीडिया भी इनसे आर्थिक मदद लेकर अपनी शक्ति में इजाफा करेगा तो ऐसे में समाज में रह रहे वैसे लोग जो ये सब शुरु से ही देखते रहे हैं

पहले कालनेमियों को हर प्रकार से आगे बढ़ाओगे, जब यहीं कालनेमि प्राथमिक अवस्था में अपने चाल-चरित्र से समाज का नुकसान करना प्रारंभ करेंगे तो आप उन्हें राजनीतिक संरक्षण दोगे, उनके चरण छूओगे, सत्ता सुख पाने के लिए इनसे मदद भी लोगे, संग-संग सेल्फी लोगे। यहीं नहीं नेता तो नेता, मीडिया भी इनसे आर्थिक मदद लेकर अपनी शक्ति में इजाफा करेगा तो ऐसे में समाज में रह रहे वैसे लोग जो ये सब शुरु से ही देखते रहे हैं, उनके सामान्य से मस्तिष्क पर क्या प्रभाव पडेगा?  वह तो यहीं समझेगा कि अरे ये कालनेमि नहीं है, ये तो महान संत हैं, ठीक वैसे ही जैसे भारत में पूर्व के संत रहे हैं?

भाई सामान्य जनता क्या जानती है कि गुरुनानक, गुरुगोविन्द सिंह, रविदास, मीराबाई, स्वामी विवेकानन्द, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी दयानन्द क्या थे?  आपने तो धर्मनिरपेक्षता के नाम पर धर्म के असली स्वरुप बन कर उभरे, हमारे सत्य पर आश्रित आध्यात्मिक संतों की पढ़ाई ही बंद करा दी, आपको लगता है कि इन लोगों के जीवनी पढाने से देश में धार्मिक माहौल खराब हो जायेगा, आपको तो राम और कृष्ण में हिन्दुत्व दिखाई पड़ता है, इनको भी आपने पढ़ाना बंद कर दिया, जब आपकी ऐसी घटियास्तर की सोच होगी तो भला बाबा राम रहीम जैसे लोगों की दुकानदारी क्यों न चलेगी?

कल की घटना तो साफ बताती है कि एक कालनेमि में कितनी हुनर होती है, वह कैसे स्वहित के लिए पूरे समाज को आग में झोंक सकता है। भला संत भी कहीं खुन-खराबे की बात करता है। संत पर तो आप जितने दाग लगा दों, वह हंस-हंस कर सहेगा और चूंकि वह संत है, इसलिए वह आध्यात्मिक शक्तियों से उस दाग को धोने का प्रयास करेगा, लेकिन जब संत कालनेमि हैं, तो उसे आध्यात्मिकता से क्या मतलब?

फिलहाल जो देश की स्थिति है, कौन नहीं जानता कि पूरा देश कालनेमियों के चपेट में है। जरा सुबह-सुबह कोई भी टीवी खोलिये, इन चैनलों ने नकली बाबाओं, ढोंगियों से पैसे लेकर उनका चेहरा चमकाना शुरु कर दिया है, ये अपने चैनल का स्लॉट इन ढोंगियों का बेचते है, और ये ढोंगी इन्हें मनमुताबिक पैसे देकर, अपना जब चेहरा चमका लेते है, तो इनकी औकात बतानी शुरु करते हैं, फिर चैनलों द्वारा इन ढोंगियों की ब्लैकमेलिंग शुरु होती है, जो ब्लैकमेंलिंग करने में सफल हो जाता है, वह फिर इन ढोंगियों से मनमुताबिक पैसे उठाता है और ये ढोंगी देते भी हैं। जरा देखिये, विभिन्न चैनलों की हालात, अब तो डिस्कशन के लिए भी ये ढोंगी पैसे देते हैं, और मीडियाकर्मी लेते हैं। यहीं हाल अखबारों का हैं, अगर आप रांची में हैं, तो यहां भी आप देखेंगे कि कई प्रतिष्ठित अखबार, इसी प्रकार की अनैतिक हरकत करते हैं, कई रेडियो चैनल्स, या क्षेत्रीय चैनल भी प्रतिदिन इसी प्रकार की हरकत कर समाज को गर्त में ले जा रहे हैं। ऐसे में यह कहना कि बाबा राम रहीम के भक्तों ने हिंसा फैलायी, पूर्णतः गलत हैं। इसके लिए दोषी वे नेता और मीडिया के लोग हैं, जिन्होंने वर्षों से इस प्रकार के कुकर्म कर इनलोगों का ऐसा माइंडवाश कर दिया कि ये आदमी न होकर, कालनेमियों के भक्त बन गये और जब  कालनेमि के ये भक्त बनेंगे तो क्या होगा, वहीं होगा, जो कल देखने में आया।

कल बहुत सारे चैनल के एंकर, हरियाणा के मुख्यमंत्री को भला-बुरा कह रहे थे, जोर-जोर से गला फाड़कर चिल्ला रहे थे, कि उनकी ओबी भान जला दिया गया, कैमरामैन और रिपोर्टरों को मार पड़ी, पर ये स्वयं बताये कि इसके लिए दोषी कौन है, अरे करोगे तुम तो भरेगा कौन?

कल जो भी राम रहीम के भक्तों या गुंडों कहिये, क्योंकि इस प्रकार की हरकत गुंडे ही करते है, कुकर्म किये, इससे भक्ति और गुरु-शिष्य की लंबी परंपरा को ही आघात लगा है, क्या गुरु ने यहीं कहा था कि हम जब जेल जाये तो तुम जानवर बन जाना, क्योंकि ये सभी जानवर ही तो थे, और जिन जानवरों ने ऐसा किया, उसका गुरु भी महाजानवर होगा, इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता। बहुत अच्छा सौदा किया कल, राम-रहीम के गुंडों ने। 30 लोगों को मार दिये, 250 से ज्यादा लोगों को घायल कर दिया। सैकड़ों वाहन और कई दर्जन सरकारी भवनों में आग लगा दिया, ट्रेन की बॉगियों को आग के हवाले कर दिया। आप तो ऐसी हरकत कर रहे थे, जैसे लग रहा था, आप विदेशी शक्तियों से लड़ रहे हो, भारत में रहकर, भारत के कानून की धज्जियां उड़ाना, कहां से सीख लिया, मूर्खों।

हमारा मानना है कि कल के कांड के लिए अगर कोई दोषी है, तो वह हैं हरियाणा की राज्य सरकार। मुख्यमंत्री खट्टर को चाहिये कि वह तत्काल नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे दें, क्योंकि इनके राज्य में बार-बार ऐसी हिंसक आंदोलन हो रहे है, जिससे मानवता ही कांप जा रही हैं,

दुसरी दोषी मीडिया हैं, जो ऐसे कालनेमियों को पालती-पोषती और उसका अपने हित में महिमामंडन करते हुए, देश की जनता को बरगलाती है, देश की सामान्य जनता का मानसिक शोषण करती है। तीसरा दोषी है, यहां की शिक्षा व्यवस्था जो धर्मनिरपेक्षता के नाम जो भारत में अच्छे और सच्चे संत हुए, उनके बारे में यहां के बच्चों को पढ़ाया नहीं, अगर पढ़ाया होता, तो देश की ये हाल नहीं होती। आज पूरे देश में जो ढोंगियों ने मीडिया की मदद से अपने चेहरे चमकाकर महल खड़ा किया है।

संत तो समस्याओं का अंत करता है। संत का स्वभाव और जीवन तो पेड़ों और नदियों की तरह होता है, संत तो वैरागी होता है, पर हमारे यहां तो संत व्यापार कर रहे हैं, दवा का कारोबार, योग का कारोबार, महिलाओं के सौंदर्य-संसाधन का व्यापार, यहीं नहीं अब तो कई संत बहुत बड़े-बड़े राजनीतिज्ञों को मात दे रहे हैं, कई संत तो टीवी चैनल में आकर टीवी की टीआरपी बढ़ा रहे हैं, जो संत ऐसे कर्म करें, यकीन मानिये, ये संत नहीं महाढोंगी हैं, राम-रहीम, आसाराम इसके प्रत्यक्ष उदाहरण है, संभालिये अपने आपको, संभालिये अपने देश को, नहीं तो इस देश को कालनेमियों के आगे झोंककर ये नेता और मीडिया के लोग मजे ले रहे हैं, और अपने-अपने हिस्से का देश लूट रहे हैं, क्योंकि ये देश आपका भी है।

कल जो उच्च न्यायालय का रोल रहा, उसकी जितनी प्रशंसा की जाय कम है। कोर्ट ने पीड़िता को न्याय दिलाकर सिद्ध किया कि कोई भी व्यक्ति, चाहे उसके पास गुंडों की संख्या लाखों-करोड़ों में क्यों न हो, वह भारतीय न्यायिक व्यवस्था को प्रभावित नहीं कर सकता। न्यायालय में दोषी करार दिये जाने के बाद जिस प्रकार से राम-रहीम के गुंडों ने कोहराम मचाना शुरु किया और इसके ठीक बाद इस घटना का संज्ञान लेते हुए, पूरी तबाही की भरपाई, बाबा राम-रहीम के लोगों से कराने का जो आदेश कोर्ट ने दिया, वह काबिले तारीफ है। कोर्ट ने डेरा की सारी संपत्ति को सील करने का आदेश देकर लोगों के भय को बहुत हद तक कम किया। यहीं नहीं कोर्ट ने संपत्तियों को पूरी लिस्ट तैयार करने और उसे बेचने और ट्रांसफर करने पर भी रोक लगा दी है, हम उक्त पीड़िता का भी अभिनन्दन करेंगे, जिसने इस सत्य को उजागर करने में अपनी सारी शक्ति लगा दी। हम महसूस कर सकते हैं कि उक्त महिला को न्यायालय तक आने और इतनी लंबी लड़ाई लड़ने में कितने मुश्किलों का सामना करना पड़ा होगा, पर सत्य तो सत्य ही है। हमारे देश का तो ये ध्येय वाक्य ही है – सत्यमेव जयते।

 

Krishna Bihari Mishra

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