अपनी बात

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चेहरा देखकर आता है CM का बयान, पूरे राज्य में सिस्टम फेल, जनता सरकार से नाराज

याद करिये 31 अक्टूबर। एक फरियादी ने गुमला की छात्रा के अपहरण का मामला मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में सीएम के समक्ष सीधी बात कार्यक्रम में उठाया था। मुख्यमंत्री इस मामले में इतने आग बबूला हो गये, कि उन्होंने सीधे गुमला के एसपी से पूछ दिया कि आपको किसने आइपीएस बना दिया?  यहीं नहीं सुबह उसे खरी-खोटी सुनाई और शाम होते-होते सजा भी सुना दिया और उसे गुमला एसपी से हटाकर सीआइडी का एसपी बना दिया।

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रांची में सड़क जाम के नाम पर दहशत फैलाने की कोशिश, जनाक्रोश फैलने की संभावना

नाच न जाने आंगन टेढ़ा। जी हां, ये लोकोक्ति आप बचपन से सुनते आये होंगे। शायद इस लोकोक्ति को जमीन पर उतारने का फैसला झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अक्षरशः ले लिया हैं। उन्हें, उनके उच्चाधिकारियों और रांची के एक-दो अखबारों ने अपने दिव्य ज्ञान से ऐसे माया-जाल में फंसा लिया हैं, जैसे लगता हो, कि वे मुख्यमंत्री के सबसे बड़े शुभचिन्तक हैं।

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सड़क जाम – सीएम के इमेज को नष्ट करने की कहीं कोई सुनियोजित साजिश तो नहीं

रांची का अरगोरा चौक, दिन के 10 बजे, जहां जाम होने का सवाल ही नहीं उठता और वहां सड़क जाम हो जाय, ये बात कुछ पचती नहीं, जहां जाम होना चाहिए जैसे कर्बला चौक और वहां से गाड़ियां बिना किसी दिक्कत के आराम से निकलती चली जाये, ये भी बात कुछ पचती नहीं। सीएम का काफिला, एक नहीं, कई बार सड़क जाम में फंस जाये, ये बात कुछ पचती नहीं। आज हम जान-बूझकर दो से तीन बार रांची की सड़कों पर निकले,

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रांची प्रेस क्लब कोर कमेटी के मेंम्बरों की मनमानी के विरुद्ध मुकेश कल जायेंगे कोर्ट

रांची प्रेस क्लब की सदस्यता का विवाद थमता नहीं दीख रहा। राजनामा.कॉम के संपादक मुकेश भारतीय ने कहा है कि उन्होंने द रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष बलबीर दत्त तथा कोर कमेटी के सदस्य रजत कुमार गुप्ता को लिखित तौर पर सूचना दे दी है कि उन्हें रांची प्रेस क्लब का सदस्य न बनाकर उन्हें चुनाव लड़ने से वंचित किया गया है, जो गलत है, ऐसे हालत में उनके पास अब एक ही विकल्प बचा है कि वे न्यायालय की शरण में जाये।

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यहां पे सब जाम-जाम हैं, झारखण्ड के सीएम हैरान हैं, रांची की सड़क जाम-जाम हैं

जब घर में लगी आग, तो चलो आग बुझाने के लिए कुएँ खोदे। पूरी राजधानी की जनता सड़क जाम से तबाह है। सड़क जाम से मुक्ति पाने के लिए, प्रतिदिन नये-नये तरीके ईजाद हो रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही। जब से मुख्यमंत्री स्वयं रोड जाम में फंसने लगे हैं, तो उनके अंदर दिव्यज्ञान का प्रार्दुभाव हुआ। प्रतिदिन सड़क जाम को लेकर बैठकों का जो दौर प्रारंभ हुआ।

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गांव न हो गया बच्चा हो गया, जिसको देखो वह उसे गोद लेने की ही बात कर रहा

गांव न हो गया कि एक बच्चा हो गया, जिसको देखों वह गांव गोद लेने को कह रहा हैं। जी हां, एक बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सासंदों को एक – एक गांव गोद लेने को क्या कह दिया, अब सीएम रघुवर दास भी ये कहने लगे कि हर अधिकारी एक गांव को गोद ले लें। भाई, क्या अधिकारियों को अब कोई काम नहीं रह गया, अब वे एक गांव गोद लेंगे, तब जाकर गांव का विकास होगा?

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बिना फार्म भरे रांची प्रेस क्लब के सदस्य बन गये पद्मश्री बलबीर, शरण, हरिनारायण और नीलू

अगर कोई लड़का बिना मैट्रिक का फार्म भरे, मैट्रिक की परीक्षा पास कर जाये, तो आपको कैसा लगेगा? आप आश्चर्य अवश्य करेंगे, कि भला बिना मैट्रिक का फार्म भरें, कोई मैट्रिक की परीक्षा कैसे पास कर सकता है? ठीक उसी तरह जैसे बिना मैट्रिक का फार्म भरे, कोई लड़का मैट्रिक की परीक्षा पास नहीं कर सकता, वैसे ही कोई भी पत्रकार बिना सदस्यता फार्म भरे, किसी भी संस्थान का सदस्य कैसे बन सकता है?

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जनाब झारखण्ड के CM दो बार सड़क जाम में क्या फंस गये, उन्हें दिव्य ज्ञान प्राप्त हो गया

कमाल है, जब अपने पर आई तो लगे बैठक करने, कानून का राज स्थापित करने, ट्रैफिककर्मियों को बर्खास्त करने और जब इन्हीं समस्याओं से जनता त्रस्त थी, तो इनको कोई लेना-देना नहीं था। झारखण्ड बनने के बाद कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों, यहां तक की नगर-विकास मंत्रालय तक संभाल चुके रघुवर दास, आज मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गये, पर जरा देखिये, इनके क्रियाकलापों को, इनको जनता की कोई फिक्र नहीं, फिक्र सिर्फ अपनी है।

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बलबीर एंड कंपनी के हालत पस्त, ईंट से ईंट बजाने की तैयारी, रघुवर सरकार पर भी उठे सवाल

सूत्र बताते है कि चूंकि 881 सदस्यों में बलबीर एंड कंपनी के लोगों का नाम नहीं है, जिन्होंने सदस्यता हेतु आवेदन नहीं जमा किया, अब वे चाहते है कि बैकडोर से या नियमों में फेरबदल कर, सदस्यता प्राप्त कर लें, पर ऐसा संभव होता नहीं दीख रहा, क्योंकि जिन लोगों ने सदस्यता हेतु आंदोलन किया, और जिनकी बलबीर एंड कंपनी ने कभी सुनने का काम नहीं किया और न ही सम्मान दिया, अंतिम-अंतिम समय तक नाक रगड़वाने की कोशिश की।

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झारखण्ड में सड़क जाम करनेवाले ही, सड़क जाम होने का रोना रोते हैं

बेटे या बेटी की जब भी शादी होगी तो वह सड़कों पर ही संपन्न होती हैं, जरा देखिये बेटे या बेटी वाले बारात को सड़क पर उतारकर घंटों नंगा नाच करेंगे, यही नहीं अब तो इन बारातों में अपने घर की महिलाओं को नचवाना भी फैशन हो गया हैं, ऐसे में सड़क जाम होगी ही। सड़क पर ही नमाज पढ़ना और अपनी शक्ति प्रदर्शित करना, की हम भी एक बहुत बड़ी ताकत में हैं, हमसे पंगा मत लेना, यह भी सड़कों पर ही संपन्न होता है, ऐसे में सड़क जाम होगी ही।

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