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सावधान, अगर मेरे खिलाफ बोला तो IPRD MEDIA व्हाट्सअपग्रुप से हटवा दूंगा…

एक है – अजय नाथ झा, उप निदेशक, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग। कहने को तो, इन्हें मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यक्रमों से संबंधित समाचार को सजा-संवारकर मीडिया तक पहुंचाने के लिए दुमका से रांची बुलाया गया है और यह काम किया है झारखण्ड की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने, जिनके वे कृपापात्र है। मुख्य सचिव के कृपापात्र होने के कारण ये ध्यान रखते है कि मुख्यमंत्री के समाचार छपने-छपाने में भले ही कोताही हो जाये, पर मुख्य सचिव के समाचार छपने-छपाने में कोई कोताही न बरती जाये।

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IPRD MEDIA व्हाट्सअप ग्रुप एक खास IAS वर्ग के लिए तो काम नहीं कर रहा…

इन दिनों जिस प्रकार से आइपीआरडी मीडिया का संचालन हो रहा है, उससे साफ लग रहा है कि यह व्हाट्सअप ग्रुप राज्य सरकार का नहीं, बल्कि एक खास आईएएस समुदाय को लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रहा है।

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पाकिस्तान-बांगलादेश के नागरिक भारत के मुरीद, भारत में मिली उन्हें बेहतर चिकित्सीय सुविधा

पाकिस्तान और बांगलादेश में भारत की धूम है। ऐसी धूम कभी नहीं देखी गई। आम तौर पर बांगलादेश में तो नहीं, पर पाकिस्तान में जहां भी कहीं भारत विरोध की बात होती है, तो पूरा देश भारत के विरोध में खड़ा हो जाता है, पर इधर एक नई बात देखने को मिल रही है, पाकिस्तानियों और बांगलादेशियों के सुर बदले है, आखिर ऐसा क्या हुआ कि इन पड़ोस के देशों में भारत के बारे में लोगों का नजरिया बदलता जा रहा है।

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झारखण्ड के जनसम्पर्क निदेशालय में पहली बार यौन उत्पीड़न आंतरिक शिकायत समिति का गठन

बड़ी खबर। रांची के सूचना भवन स्थित सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग मुख्यालय के जनसम्पर्क निदेशालय में विभागीय स्तर पर यौन उत्पीड़न आंतरिक शिकायत समिति का गठन किया गया है, जिसका अध्यक्ष शालिनी वर्मा, उप निदेशक, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग को बनाया गया है। उक्त गठित समिति को सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के प्रधान सचिव, संजय कुमार ने सहमति भी प्रदान कर दी है।

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राज्य सरकार की नाकामी से पूरे राज्य में तबाही, आधा दर्जन की मौत, बाजारों में पसरा सन्नाटा

इन दिनों हो रही भारी वर्षा ने राजधानी रांची समेत पूरे झारखण्ड में तबाही मचा दी है। रांची के कई इलाकों में घरों में पानी प्रवेश कर गया है। राजधानी रांची के कई इलाकों में बाढ़ सा दृश्य है। बच्चों के स्कूल बंद करा दिये गये है। बाजारों में सन्नाटा पसरा है। भारी बारिश ने पशुओं के चारा पर भी संकट खड़ा कर दिया है। इस बारिश ने राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही कई योजनाओं की भी पोल खोल कर रख दी है।

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मद्रास हाइकोर्ट ने कहा सप्ताह में एक बार वंदे मातरम् गाना अनिवार्य

मद्रास हाइकोर्ट ने एक बहुत बड़ा फैसला सुनाया है। मद्रास हाइकोर्ट ने कहा है कि राज्य के सभी स्कूलों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में सप्ताह में कम से कम एक बार वंदे मातरम गाना अनिवार्य है। कोर्ट का यह भी कहना है कि राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों, निजी कंपनियों में भी महीने में एक बार राष्ट्रगीत अवश्य बजना चाहिए।

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झारखण्ड में भारी वर्षा, स्कूल बंद, पुल-पुलिये बहे, भारी तबाही

झारखण्ड में पिछले चार दिनों से हो रही भारी बारिश ने भारी तबाही मचा दिये है, भारी वर्षा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने स्कूल को बंद करने का आदेश जारी किया है, जन-जीवन अस्त व्यस्त है, सड़कों-बाजारों में सन्नाटा पसरा है, घर में लोग दुबके है, निकल वहीं रहा हैं, जिसे ज्यादा जरुरी कोई काम आ गया है, सरकारी कार्यालयों में भी इस भारी बारिश के प्रभाव है। मुख्य मार्गों पर पानी बह रहा है, कई गांव टापूओं में बदल गये है

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मुख्यमंत्री रघुवर दास का छत्तीसगढ़ प्रेम छलका, अब टच स्टोन के हवाले गरीबों का निवाला

क्या झारखण्ड की जनता इतनी गई गुजरी हैं कि, वह अपने भाई-बहनों को ठीक से खाना भी नहीं खिला सकती?  यह सवाल मैं इसलिये उठा रहा हूं क्योंकि रघुवर सरकार ने खिलाने-पिलाने के लिए भी एक नई कंपनी को हायर कर लिया है, जो शर्मनाक है। राज्य की भोली-भाली जनता को शायद ही मालूम है कि रघुवर सरकार ने पिछली मंगलवार की कैबिनेट में मुख्यमंत्री दाल भात योजना का नाम बदलकर मुख्यमंत्री कैंटीन योजना रख दिया और इसका जिम्मा सौंप दिया छतीसगढ़ की कंपनी मेसर्स टच स्टोन फाउँडेशन को।

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प्रभात खबर तुम कहां हो, जिम्मेदारी तो तुम्हारी भी बनती है…

प्रभात खबर तुम कहां हो? क्या तुम्हारी जिम्मेदारी नहीं बनती? क्या तुम्हारे यहां काम करनेवाले तुम्हारे मालिक, संपादक, पत्रकार एवं कर्मचारी गाय का दूध नहीं पीते? क्या तुम्हारे घर में गाय के गोबर का उपयोग नहीं होता?  क्या तुम्हारे घर में कोई भी संस्कार होते है, उसमें गाय के उपलों का उपयोग नहीं होता? क्या तुम्हारे यहां के लोग गाय के चमड़े से बने जूते, चप्पल या बैग या अन्य सामग्रियों का उपयोग नहीं करते?  क्या तुम मनुष्य नहीं हो?

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वनरक्षियों को नियुक्ति पत्र देने के बहाने अपना चेहरा चमकाने की कोशिश

क्या मुख्यमंत्री रघुवर दास बता सकते है कि जिन वनरक्षियों को वे नियुक्ति पत्र दे रहे हैं, वे उनकी कृपा से इस पद पर नियुक्त हो रहे है, कि नियुक्तिपत्र धारकों ने वनरक्षियों के लिए आयोजित परीक्षा में अपनी मेहनत से सफलता पाई है और जब अपने मेहनत से उन्होंने सफलता पाई तो इसका श्रेय वे स्वयं क्यों ले रहे हैं। इस प्रकार के आयोजन कराकर, इससे क्या मैसेज देना चाहते हैं।

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