एक छोटे से राज्य का एक बहुत बड़ा नेता सबके मन को हर कर दुनिया को अलविदा कर दिया

जो दुनिया में आये हैं, उन्हें एक न एक दिन जाना ही हैं, पर कैसे जाना हैं, इसका निर्धारण उन्हें स्वयं करना है, उनके कैसे और किस प्रकार जाने का निर्धारण, कोई दुसरा नहीं कर सकता। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व रक्षा मंत्री तथा वर्तमान में गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का आज निधन हो गया और उनके निधन का समाचार सुनते ही पूरा देश शोकाकुल हो गया।

जो दुनिया में आये हैं, उन्हें एक एक दिन जाना ही हैं, पर कैसे जाना हैं, इसका निर्धारण उन्हें स्वयं करना है, उनके कैसे और किस प्रकार जाने का निर्धारण, कोई दुसरा नहीं कर सकता। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व रक्षा मंत्री तथा वर्तमान में गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का आज निधन हो गया और उनके निधन का समाचार सुनते ही पूरा देश शोकाकुल हो गया।

आखिर मनोहर पर्रिकर ने देश को क्या दिया? कि पूरा देश शोकाकुल हैं, उसका उत्तर हैं, उन्होंने वर्तमान युवा पीढ़ी को बताया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में जिया जाता है? कैसे दरवाजे पर चुपके से आये कैंसर बनकर आई मौत को चुनौती दिया जाता है? कैसे मौत आने के पूर्व बचे एकएक पल को देश के लिए समर्पित किया जाता है।

सचमुच एपीजे अब्दुल कलाम के बाद मनोहर पर्रिकर ही एकमात्र ऐसे व्यक्तित्व है, जिनके आगे देश नतमस्तक है। मनोहर पर्रिकर से सादगी, ईमानदारी और विपरीत परिस्थितियों में भी चेहरे पर हल्की मुस्कान बिखेरे रहना तो कोई सीख ही सकता है। कमाल है, कई विपक्षी दल के नेताओं ने उन पर कीचड़ उछालने की कई बार कोशिश की, पर शायद ही कोई होगा, जो इस बात को मानने को तैयार होगा कि मनोहर पर्रिकर पर कोई दाग होंगे, ये होता हैं जनता का किसी नेता पर विश्वास, जो मनोहर पर्रिकर ने कमाया।

आज जबकि भाजपा में ही कई ऐसे नेता हैं, जिन्होंने पं. दीन दयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद को ठेंगा दिखाकर, एकमेव धन कमाने की विद्या को ही अंगीकृत कर लिया, उस भाजपा में आज भी मनोहर पर्रिकर जैसे लोग हैं, ये देश भाजपा के लिए सुखद संदेश है।कल तक गोवा सिर्फ अपने समुद्रीय तटों उसके सौंदर्य के लिए पर्यटन के लिए जाना जाता था, पर आनेवाले समय में यह गोवा मनोहर पर्रिकर जैसे नेताओं से भी जाना जायेगा। 

यानी एक छोटा सा प्रान्त, जहां से निकलकर मनोहर पर्रिकर ने रक्षा मंत्रालय संभाला, जब गोवा में भाजपा को बहुमत से कम सीटें मिली तो उन्होंने इस विपरीत परिस्थितियों में भी भाजपा को गोवा में बहुमत के करीब ला ही दिया, हालांकि इसके लिए उन पर कई लोगों ने आरोप भी लगाए, पर वे आरोप राजनीतिक ही ठहरे।

चाहे पारिवारिक दायित्व हो, या सामाजिक या प्रांतीय या राष्ट्रीय, प्रत्येक दायित्वों को बखुबी निभाना कोई मनोहर पर्रिकर से सीखें। जहां आज का नेता केवल अपने लिए धन कमाने तथा अपने परिवार के लिए अच्छाखासा बैंकबैलेंस बनाने में ज्यादा दिमाग लगाता है, वहां मनोहर पर्रिकर ने सिर्फ यहीं देखा कि वे अपने देश को कैसे मजबूत करें, अपने गोवा को और कैसे सुंदर बनाएं ताकि गोवा के सम्मान में कोई दाग लगे। सचमुच मनोहर पर्रिकर जी आपने जो विपरीत परिस्थितियों में जो सेवा की एक बड़ी लकीर खींची हैं, शायद ही उस लकीर को कोई पार कर पायेगा।

Krishna Bihari Mishra

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Mon Mar 18 , 2019
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