बाबू लाल मरांडी इस कविता के भाव को समझिये, अचल रहा जो अपने पथ पर, लाख मुसीबत आने में…
1959 में बनी “कागज के फूल” का यह गीत, जिसे कैफी आजमी ने लिखा, मो. रफी ने गाया, धुन सचिन देव बर्मन ने बनाई। आज झारखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री एवं झाविमो सुप्रीमो बाबू लाल मरांडी पर खूब फिट बैठता है, इन्होंने जिस-जिस पर ज्यादा विश्वास किया, उसी ने इनके पीठ पर छूरा घोपने में कोई कसर नहीं छोड़ी, जिसकी कोई औकात नहीं थी,
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