CM रघुवर नाराज न हो जाये, इसलिए अर्जुन मुंडा से दूरियां बना रहे भाजपा नेता व कार्यकर्ता

अर्जुन मुंडा को केन्द्र की मोदी सरकार भले ही केन्द्र में जनजातीय मंत्रालय सौंप दें, उन्हें कैबिनेट मंत्री बना दें, पर राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास को शायद अर्जुन मुंडा अभी भी फूंटी आंख नहीं सुहाते, जब भी समय मिलता है, वे उन्हें किनारे करने या उनके पर कतरने में लगे रहते हैं, ये अलग बात है कि वे जब किसी कार्यक्रम में एक दूसरे से मिलते हैं, तो एक दूसरे को दिखाने के लिए बनावटी मुस्कान अपने-अपने चेहरे पर ले ही आते हैं।

अर्जुन मुंडा को केन्द्र की मोदी सरकार भले ही केन्द्र में जनजातीय मंत्रालय सौंप दें, उन्हें कैबिनेट मंत्री बना दें, पर राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास को शायद अर्जुन मुंडा अभी भी फूंटी आंख नहीं सुहाते, जब भी समय मिलता है, वे उन्हें किनारे करने या उनके पर कतरने में लगे रहते हैं, ये अलग बात है कि वे जब किसी कार्यक्रम में एक दूसरे से मिलते हैं, तो एक दूसरे को दिखाने के लिए बनावटी मुस्कान अपने-अपने चेहरे पर ले ही आते हैं।

राजनीतिक पंडितों की माने तो रघुवर दास के लिए वर्तमान में मुख्यमंत्री पद को लेकर अगर कोई उनके सामने बड़ा खतरा है, तो वे हैं अर्जुन मुंडा, जिनकी पकड़ भाजपा कार्यकर्ताओं व नेताओं में आज भी इतना है कि अर्जुन मुंडा का सिर्फ इशारा ही काफी है और भाजपा कार्यकर्ता उनके सम्मान में सड़कों पर। जिसकी जानकारी राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास को हैं, इसलिए उन्हें जब भी कभी समय मिलता है, वे अर्जुन मुंडा को किनारे करने में लगे ही रहते हैं।

जरा देखिये कल की ही बात है, कल विश्व आदिवासी दिवस था, जनजातीय मंत्रालय संभाल रहे अर्जुन मुंडा रांची की सड़कों पर पदयात्रा के लिए निकलनेवाले थे, बताया जाता है कि यह कार्यक्रम भारत मुंडा समाज की ओर से था, अर्जुन मुंडा अपने तय कार्यक्रम के अनुसार राजेन्द्र चौक से निकले और अब्दुल बारी पार्क मैदान तक पहुंचे, जिसमें भाजपा के बड़े नेता व कार्यकर्ताओं का समूह गायब था।

कहने को यह भी कहा जा सकता है कि चूंकि एक संगठन का कार्यक्रम था, इसलिए उसमें भाजपा के बड़े नेता व कार्यकर्ता नहीं थे, पर जो राजनीतिक पंडित हैं, वे जानते हैं कि मामला कुछ दुसरा ही है, भाजपा में स्पष्ट रुप से गुटबाजी चरम पर है, पर ये अलग बात है कि यह बाहर में दिखता नहीं हैं, पर ये गुटबाजी ऐसा है कि आनेवाले समय में गुल भी खिला देगा।

राजनीतिक पंडित मानते है कि राज्य में रघुवर दास ने जनता में अपना विश्वास खो दिया है, चाहे वह कितना भी विज्ञापन का सहारा लेकर, करोड़ों लूटाकर चेहरा क्यों न चमका लें। रघुवर कैबिनेट में ही शामिल कई मंत्री मुख्यमंत्री रघुवर दास की सोच और उनकी तथाकथित विकास की नीतियों पर अगूंलिया उठा चुके हैं, जिसकी जानकारी केन्द्र तक को हैं, पर केन्द्र फिलहाल आसन्न विधानसभा चुनाव को देखते हुए, इन गुटबाजी पर अंकुश लगाकर फिर से यहां भाजपा की सरकार बनाने के लिए ज्यादा दिमाग लगा रही हैं, पर उन्हें सफलता मिलेगी, यह कहा नहीं जा सकता।

कल जिस प्रकार से अर्जुन मुंडा ने पदयात्रा किया और जिस प्रकार से रघुवर गुट में शामिल बड़े-बड़े भाजपा नेताओं ने इस पदयात्रा से किनारा किया, वह बताता है कि रघुवर दास को अर्जुन मुंडा से कितना भय है, इसी भय में उन्होंने उन भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं को भी कसना शुरु किया है, जो अर्जुन मुंडा के तरफ साफ्ट कार्नर रखते हैं।

इधर भाजपा में ही शामिल कई नेता व कार्यकर्ता है, जो सच्चाई को जानते है कि वे फिलहाल सीएम रघुवर दास नाराज न हो जाये, इसलिए अर्जुन मुंडा से दूरियां बनानी शुरु कर दी है, जिसकी जानकारी अर्जुन मुंडा को भी है, लेकिन वे इन बातों को दरकिनार कर, अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं, जानकार बताते है कि अगर अर्जुन मुंडा ने भाजपा की कमान विधानसभा चुनाव में अच्छी तरह संभाल ली तो भाजपा कुछ बेहतर स्थिति में आ सकती है।

और अगर ये सारा कमान रघुवर दास के पक्ष में गया तो जान लीजिये, भाजपा एक-एक सीट के लिए तरस जायेगी। इधर भाजपा कार्यकर्ता व नेता कसमसाहट में हैं कि वे ऐसे हालात में क्या करें, अर्जुन मुंडा के पक्ष में जाते हैं तो रघुवर नाराज और रघुवर के पक्ष में गये तो अर्जुन नाराज। दूसरी ओर कुछ नेता व कार्यकर्ता बीच का मार्ग अपना रहे हैं, यानी ना काहू से दोस्ती और न काहू से वैर।

कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें आभास हो गया है कि केन्द्र फिलहाल वस्तुस्थिति को समझ चुका है और आनेवाले समय में कुछ ऐसा भी निर्णय ले सकता है, जो किसी ने कल्पना भी नहीं की हो, और अगर ऐसा हो गया तो फिर खतरा ज्यादा सीएम रघुवर को ही होगा, न कि अर्जुन को। विश्व आदिवासी दिवस पर जिस प्रकार से अर्जुन मुंडा के पदयात्रा में भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं ने दूरियां बना दी, वो सब कुछ कह देता है कि भाजपा में फिलहाल सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा।

Krishna Bihari Mishra

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