मेरे बेटे को इस बार BJP से टिकट दिला, MLA बनवाइये, क्योंकि मैंने संघ को बहुत कुछ दिया है, क्या समझे
सबसे पहले एक संघ गीत सुनिये, पहले यह गीत संघ की शाखाओं में खुब गाया जाता था, कभी–कभार यह गीत आज भी यत्र-तत्र सुनाई दे जाता हैं, उसके बोल थे… “धर्म के लिए जिये, समाज के लिए जिये, ये धड़कनें, ये श्वास हो, पुण्यभूमि के लिए, कर्मभूमि के लिए…” सच पूछिये, जिसने भी यह गीत लिखा होगा, वह यही सोचकर लिखा होगा कि यह गीत गानेवाले लोग इसके मर्म को समझेंगे और सचमुच देश और समाज से प्यार करना सीखेंगे।
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