भला गोविंदा, कान्हा की मटकी क्यों फोड़ेंगे?
अरे भाई कान्हा कब से मटकी लेकर इठलाने लगे? कि गोविंदाओं को कान्हा की मटकी फोड़ने की जरुरत पड़ गई। क्या गोविंदा और कान्हा, अलग-अलग हैं, सुबह से माथा खराब हो गया हैं मेरा। एक अखबार है, आंदोलनवाला। इसमें गजब की होनहारों की टीम हैं, जो बेसिर-पैर की हेडिंग लगा देती है और जनता कन्फ्यूज्ड।
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