भीड़ त दीखी पर छठि मइया ना दिखाई दीहे…
अल कर, बल कर, छठ पर आर्टिकल, लिख चल… अल कर, बल कर, छठ पर, अलबल बोल चल… अल कर, बल कर, छठ पर रिपोर्टिंग कर चल… टीवी पर अनाप-शनाप बक चल…एक बार फिर, पिछले कई दिनों से हमारे आंख-कान दोनों पक गये… अखबारों और टीवी चैनलों तथा गुगुल पुराणों ने छठ महापर्व की धज्जियां उड़ानी शुरु कर दी है… जितने अखबार, उतनी बुद्धि, जितने टीवी उतनी बक-बक और सभी ने अपने ज्ञान से छठ की ऐसी-तैसी करनी शुरु कर दी
Read More