Author: Krishna Bihari Mishra

अपनी बात

जरा सोचिये, जिस राज्य का मुख्यमंत्री एक पीड़ित पिता को भरी सभा में…

जरा सोचिये, जिस राज्य का मुख्यमंत्री एक पीड़ित पिता को भरी सभा में जलील करता हो, क्या उस राज्य की पुलिस, अपना दुखड़ा सुनाने गई जनता के साथ सम्मान से पेश आयेगी?  हमें लगता है कि झारखण्ड की जनता, वो वाकया नहीं भूली होगी कि एक पिता, जिसकी बेटी के साथ अपराधियों ने दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी, वह न्याय मांगने सीएम रघुवर दास के पास गया था और उसके साथ सीएम रघुवर दास ने ऐसा बर्ताव किया कि पूरे झारखण्ड का सर शर्म से झुक गया, हद तो तब हो गई कि इस घटना के लिए न तो किसी भाजपा नेता ने माफी मांगी और न ही मुख्यमंत्री रघुवर दास ने और न ही किसी विपक्षी दल के नेताओं ने इस हरकत के लिए सीएम का प्रतिरोध किया…

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अपराध

झारखण्ड पुलिस पर कालिख पुत गई, अब कितना भी पोचारा करिये, नहीं धुलेगा…

अब आप कितना भी पोचारा करिये, झारखण्ड पुलिस के माथे पर जो कल कालिख पुती है, उस कालिख को आप मिटा नहीं सकते। शिव सरोज कुमार ने जो सवाल उठाये है, उसके सवाल पर कोई अंगुली नहीं उठा सकता। जनता देख रही है, कि बड़ी तेजी से झारखण्ड पुलिस और राज्य सरकार इस मामले को मैनेज करने में लगी है, कुछ समाचार पत्र तो इतनी जल्दी मैनेज हो जायेंगे, यहां की जनता को पता ही नहीं था,

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अपराध

आखिर मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार अजय कुमार पर कार्रवाई कब होगी?

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पिछले जून महीने में, अपने प्रेस सलाहकार अजय कुमार और एडीजी अनुराग गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश संबंधित विभाग को दिया था, दो महीने बीत गये, आखिर इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी? हम आपको बता दे कि इन पर राज्यसभा चुनाव 2016 में गड़बड़ी करने की शिकायत है। इनके खिलाफ मिली शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इनके खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था, जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस पर अपनी मंजूरी भी दे दी।

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राजनीति

शिव सरोज की आत्महत्या प्रकरण से उबला रांची, सरकार और पुलिसकर्मियों पर निकला जनाक्रोश

धनबाद के शिव सरोज द्वारा सेवा सदन के ठीक सामने आत्महत्या कर लेने तथा आत्महत्या के लिए चुटिया थाना प्रभारी और रांची के सिटी डीएसपी को दोषी ठहराने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। नगर विकास मंत्री चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह ने इस घटना को अत्यंत दुखद, दुर्भाग्यपूर्ण, खेदजनक एवं सरकारी व्यवस्था के लिए कलंक बताया है, तथा मुख्यमंत्री रघुवर दास से इस घटना की किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

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अपनी बात

अभिनन्दन करिये, माननीया राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का…

सचमुच झारखण्ड की जनता भाग्यशाली सिद्ध हो रही हैं, क्योंकि झारखण्ड को राज्यपाल के रुप में श्रीमती द्रौपदी मुर्मू मिली है। जो बड़े ही साहस के साथ सत्य को सत्य कह रही है। याद करिये कुछ महीने पहले उन्होंने सीएनटी/एसपीटी विधेयक पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते हुए, उसे पुनर्विचार के लिए राज्य सरकार को वापस भेज दिया था। आज स्थिति यह है कि इस सीएनटी/एसपीटी मुद्दे पर सरकार स्वतः बैकफुट पर आ रही है, वो सरकार, जो यहां की जनता को यह कहकर ललकार रही थी कि “रघुकुल रीति सदा चलि आई”। उस सरकार का जनता को ललकार और फूंफकार दोनों बंद हैं।

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अपराध

शिव सरोज ने की आत्महत्या, पुलिस पर गंभीर आरोप, सीएम और पीएम से भी पूछे सवाल…

धनबाद के शिव सरोज ने रांची के सेवा सदन अस्पताल के ठीक सामने की पार्किंग में आत्महत्या कर ली है? आत्महत्या के पूर्व उसने पुलिस के कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पीएमओ-डीजी को अपना सुसाइड नोट भी भेजा है, जो आज के रांची से प्रकाशित दैनिक जागरण अखबार में छपे है। उसने कुछ सवाल भी उठाये है, जिसका जवाब राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास और पुलिस महानिदेशक को देना ही चाहिए, पर क्या ये माननीय उसके सवालों का जवाब दे पायेंगे? क्या इतना नैतिक साहस राज्य के मुख्यमंत्री या पुलिस महानिदेशक को है?

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अपराध

रांची बन रहा आत्महत्या करनेवाले नागरिकों का शहर

जिस शहर को झरनों के शहर के नाम से जाना, जाना चाहिए, जिस शहर को मंदिरों के शहर के नाम से जाना, जाना चाहिए। आज वह आत्महत्या करनेवाले नागरिकों के नाम से जाना जा रहा है। इन दिनों आत्महत्या करनेवालो की रफ्तार बढ़ सी गई है, हालात यह है कि एक ही दिन में दो-दो आत्महत्याएं हो रही है और पूरा शहर सोया हुआ है।

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राजनीति

बाबूलाल मरांडी ने कहा CNT/SPT संशोधन विधेयक लाने का प्रयास बंद करे रघुवर सरकार

राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री रघुवर सरकार को पत्र लिखकर आगाह किया है कि वो सीएनटी/एसपीटी संशोधन विधेयक को नये सिरे से लाने का प्रयास न करें। उन्होंने कहा कि सीएनटी/एसपीटी संशोधन के लिए कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, क्योंकि आजादी से पूर्व जो भी यहां संघर्ष हुए है, वे जमीन को लेकर ही हुए, जिसके परिणामस्वरुप सीएनटी/एसपीटी एक्ट का गठन हुआ।

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राजनीति

चूंकि वे माननीय है, इसलिए उन्हें करोड़ों की जमीन कौड़ियों में प्राप्त करने का अधिकार हैं…

क्या हमारे माननीय इतने दरिद्र है कि वे अपने से, अपने लिए एक जमीन का टूकड़ा नहीं खरीद सकते?
क्या हमारे यहां के माननीयों को रहने के लिए झारखण्ड में कहीं भी जमीन का टूकड़ा नहीं है?
क्या हमारे माननीयों को रांची में जमीन लेना अतिआवश्यक है? क्या रांची में जमीन नहीं रहने पर, वे सम्मानपूर्वक दूसरी जगह जीवित नहीं रह सकते?
क्या वे बिना सरकारी सहयोग के अपना घर नहीं बना सकते?

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धर्म

ज्यादा इतराइये मत रघुवर का काम है कानून बनाना और फिर उसे अमल में नहीं लाना

झारखण्ड सरकार ने जबरन धर्मांतरण को संज्ञेय अपराध माना है। कैबिनेट ने इसकी मंजूरी भी दे दी है। कैबिनेट के इस मंजूरी के बाद से, झारखण्ड में बहुत लोग इतरा रहे हैं। ये इतरानेवाले वे लोग हैं, जो कई वर्षों से झारखण्ड में चल रहे धर्मांतरण पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। झारखण्ड में धर्मांतरण के ज्यादातर शिकार आदिवासी है, क्योंकि गरीबी के शिकार इन भोलेभाले आदिवासियों को धर्म के मूल स्वरुप का पता हीं नहीं है,

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