Author: Krishna Bihari Mishra

अपनी बात

धिक्कार है, ऐसी सोच पर और ऐसी सकारात्मक पत्रकारिता पर

आजकल मुख्यमंत्री रघुवर दास अपनी हर बातों में सकारात्मक पत्रकारिता की बात करते हैं, उनके आगे-पीछे चलनेवाले भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़े अधिकारियों का दल तथा उनकी बातों में सिर्फ हां में हां मिलानेवाले पत्रकारों की टीम भी सकारात्मक पत्रकारिता की बात आजकल कुछ ज्यादा ही करने लगे है।

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राजनीति

विपक्ष चाहता है कि झारखण्ड में मुख्यमंत्री के रुप में रघुवर दास बने रहे, ताकि…

झारखण्ड में ज्यादातर विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे चाहते हैं कि झारखण्ड में विधानसभा चुनाव तक मुख्यमंत्री के रुप में रघुवर दास बने रहे, क्योंकि ये जितने दिन मुख्यमंत्री बने रहेंगे, विपक्षी दलों की जीत की प्रतिशतता उतनी ही बढ़ती जायेगी। कल की ही बात है, विधानसभा में विपक्षी दलों के नेताओं के चेहरे खिले हुए थे। जब हमने चेहरे खिलने का राज पुछा तो सभी ने एक स्वर से कहा कि, बस रघुवर की कृपा है।

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अपनी बात

सीएम की फिसली जुबान, सदन में माघ महीने को फागुन बताया

विधानसभा के बजट सत्र का अंतिम दिन, मुख्यमंत्री अपना समापन भाषण दे रहे थे और इसी दरम्यान उन्होंने कह डाला कि आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि है, फागुन महीना दस्तक दे चुका हैं, यहीं नहीं वे फागुन की मस्ती में डूबते दीखे।

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राजनीति

शर्मनाक, अधिकारियों को बचाने में सदन को नहीं चलने दी सरकार

एक बार फिर विधानसभा का बजट सत्र अपने समय से एक सप्ताह पूर्व ही अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। इसकी जानकारी सभी को कल ही हो गई थी। कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में ही यह सुनिश्चित हो गया था कि आज सत्र का अवसान हो जायेगा।

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राजनीति

हेमन्त सोरेन ने स्पीकर पर सदन को एकतरफा चलाने का लगाया गंभीर आरोप

आज उस समय स्थिति गंभीर हो गई, जब नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन ने अध्यक्ष पर ही अविश्वास जताते हुए कह डाला, कि अध्यक्ष महोदय आप सदन को एकतरफा चला रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष का ये कहना था कि सदन हंगामे में डूब गया और फिर स्पीकर ने सदन को दोपहर 12.15 तक स्थगित कर दिया। अब सवाल उठता है कि क्या सचमुच स्पीकर सदन को एकतरफा चला रहे हैं? या स्पीकर पर लगाया गया आरोप निराधार है?

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राजनीति

चाय बेचना, पकौड़ा बेचना सही और केला बेचना, स्कूटर बनाना गलत कैसे?

2014 लोकसभा चुनाव। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के कोने-कोने में जाकर चुनावी सभा को संबोधित कर रहे हैं। उस चुनावी सभा में बता रहे है कि वे कैसे अपने बचपन के दिनों में गरीबी देखी हैं। चाय बेचकर जीवन चलाया है। जनता इनके इस भाषण को सुनकर द्रवित होती है। वह समझती है कि कोई गरीब का बेटा, चाय बेचनेवाला आज प्रधानमंत्री बनने जा रहा है।

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राजनीति

झारखण्ड के विकास की फिक्र छोड़िये, अपनी जाति की जनसंख्या बढ़ाइये, मिलेगा लाभ

झारखण्ड के सीएम हैं – रघुवर दास। भगवान ने इन्हें शायद बड़ी फुर्सत में बनाया है, तभी तो अपनी जाति के सम्मेलन में जनसंख्या के आधार पर, आरक्षण देने पर विचार की बातें करते हैं, और दूसरे लोगों को कहते है कि केला बेचने व स्कुटर दुकान में काम करने के लिए जनसंख्या नहीं बढ़ाएं। एक ही दिन में, खुद ही के बयान को एकसिरे से नकार देने की कला, अगर किसी को सीखना हो तो मुख्यमंत्री रघुवर दास से सीखे।

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राजनीति

जातीयता के मुद्दे पर भाजपा बेनकाब, CM रघुवर ने शुरु की जातिवादी राजनीति

महात्मा गांधी जब तक जिन्दा रहे, जात-पात, अस्पृश्यता, छुआछूत से आजीवन लड़ते रहे। सामाजिक समरसता के लिए उनका जीवन एक संदेश हैं, उनके इस बहुमूल्य जीवन पद्धति से बलिहारी होकर रवीन्द्र नाथ ठाकुर ने उन्हें महात्मा घोषित किया, और आज उस महात्मा को जाति में तौला जा रहा हैं, उन्हें एक जाति विशेष का बताया जा रहा है, और उस जातीय रैली में भाजपा का नेता, राज्य का मुख्यमंत्री भाग लेकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हैं,

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राजनीति

राज्य सरकार की नजरों में लोकसभा उपाध्यक्ष रह चुके कड़िया मुंडा की कोई इज्जत नहीं

आम तौर पर लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की अहमियत ज्यादा होती है, पर झारखण्ड में जनप्रतिनिधियों की कोई इज्जत नहीं, यहां नौकरशाही हावी है। हद तो तब देखी जा रही हैं कि सीएमओ और मुख्य सचिव के इशारे पर सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग इस प्रकार से मुख्य सचिव की न्यूज संप्रेषित कर रहा है, जैसे लगता है कि यहां मुख्य सचिव ही सर्वेसर्वा है, बाकी किसी की कोई औकात ही नहीं।

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अपनी बात

राज्यपाल के परेड निरीक्षण समय माइक फेल, मची अफरातफरी, डीसी ने लगाई क्लास

झारखण्ड की राजधानी रांची के मोराबादी मैदान में आयोजित भारतीय गणतंत्र दिवस परेड के दौरान उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के माइक ने काम करना बंद कर दिया। जब माइक काम करना बंद किया, उस वक्त राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू परेड का निरीक्षण करने के लिए निकल रही थी। बताया जाता है कि जैसे ही उद्घोषिका ने इस संबंध में माइक द्वारा जानकारी देने की कोशिश की, माइक ने काम करना बंद कर दिया।

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