सीएम की फिसली जुबान, सदन में माघ महीने को फागुन बताया

विधानसभा के बजट सत्र का अंतिम दिन, मुख्यमंत्री अपना समापन भाषण दे रहे थे और इसी दरम्यान उन्होंने कह डाला कि आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि है, फागुन महीना दस्तक दे चुका हैं, यहीं नहीं वे फागुन की मस्ती में डूबते दीखे।

विधानसभा के बजट सत्र का अंतिम दिन, मुख्यमंत्री अपना समापन भाषण दे रहे थे और इसी दरम्यान उन्होंने कह डाला कि आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि है, फागुन महीना दस्तक दे चुका हैं, यहीं नहीं वे फागुन की मस्ती में डूबते दीखे, पर उन्हें नहीं मालूम कि अभी फागुन नहीं, बल्कि माघ का महीना चल रहा हैं, और अभी फागुन आने में कुछ दिन शेष है।

ये कोई पहली बार नहीं, कई बार सीएम रघुवर दास की जुबान, फिसलती रही हैं। इस बार इन्होंने सदन में माघ की जगह फाल्गुन कह डाला, जब सीएम माघ की जगह फागुन का प्रयोग किये तो कई पत्रकारों को इसके बारे में जानकारी ही नहीं थी कि सीएम ने यह क्या कह डाला और न ही सत्तापक्ष के विधायकों को यह मालूम था कि सीएम ने अपने भाषण में क्या कह डाला? इसका मूल कारण है कि कई लोगों को अपने देश के महीनों के बारे में जानकारी ही नहीं, कि वर्तमान में हिन्दी का कौन सा महीना चल रहा है?  ज्यादातर लोग अंग्रेजी महीने से ही काम चलाते है।

सच्चाई यह है कि अगर फाल्गुन शुक्लपक्ष चतुर्दशी आज होता तो आज के दिन होलिकादहन हो रहा होता और विधानसभा में छुट्टी रहती, खुद सीएम होली की बधाई दे रहे होते, कई लोगों ने इस पर चुटकी पर ली, जब सीएम ने फाल्गुन शुक्लपक्ष चतुर्दशी कह ही डाला है तो चलिए कल होलिकादहन और परसो होली मना ही ली जाये।

Krishna Bihari Mishra

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Wed Jan 31 , 2018
झारखण्ड में ज्यादातर विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे चाहते हैं कि झारखण्ड में विधानसभा चुनाव तक मुख्यमंत्री के रुप में रघुवर दास बने रहे, क्योंकि ये जितने दिन मुख्यमंत्री बने रहेंगे, विपक्षी दलों की जीत की प्रतिशतता उतनी ही बढ़ती जायेगी। कल की ही बात है, विधानसभा में विपक्षी दलों के नेताओं के चेहरे खिले हुए थे। जब हमने चेहरे खिलने का राज पुछा तो सभी ने एक स्वर से कहा कि, बस रघुवर की कृपा है।

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