राज्यपाल के परेड निरीक्षण समय माइक फेल, मची अफरातफरी, डीसी ने लगाई क्लास

झारखण्ड की राजधानी रांची के मोराबादी मैदान में आयोजित भारतीय गणतंत्र दिवस परेड के दौरान उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के माइक ने काम करना बंद कर दिया। जब माइक काम करना बंद किया, उस वक्त राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू परेड का निरीक्षण करने के लिए निकल रही थी। बताया जाता है कि जैसे ही उद्घोषिका ने इस संबंध में माइक द्वारा जानकारी देने की कोशिश की, माइक ने काम करना बंद कर दिया।

झारखण्ड की राजधानी रांची के मोराबादी मैदान में आयोजित भारतीय गणतंत्र दिवस परेड के दौरान उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के माइक ने काम करना बंद कर दिया। जब माइक काम करना बंद किया, उस वक्त राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू परेड का निरीक्षण करने के लिए निकल रही थी। बताया जाता है कि जैसे ही उद्घोषिका ने इस संबंध में माइक द्वारा जानकारी देने की कोशिश की, माइक ने काम करना बंद कर दिया। माइक के काम नहीं करने से इसी बीच अफरातफरी का माहौल हो गया। अचानक माइक के काम नहीं करने, तथा राज्यपाल द्वारा परेड निरीक्षण के लिए निकल जाने से वहां ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के होश उड़ गये।

डीसी ने तुरंत सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के अधिकारियों की क्लास लगाई और कहा कि इसे जल्द ठीक करें, अगर जल्द ठीक नही हुआ तो आपलोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, आप समझ लीजिये। बताया जाता है कि ये सारा काम सूचना भवन में चल रहे सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के मातहत ही किया जाता है, जहां इस प्रकार की चीजों पर ध्यान देने की परंपरा विलुप्त होती जा रही हैं, यहां ऐसे अधिकारियों के दलों को जमावड़ा हो गया हैं, जो राज्यपाल व मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों को भी हल्के में लेता है, जिसका परिणाम कल गणतंत्र दिवस के दिन देखने को मिला।

इसी बीच सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर इस गड़बड़ी को ठीक किया तब जाकर उद्घोषिका द्वारा उद्घोषणा प्रारंभ हुआ और उधर राज्यपाल परेड निरीक्षण के लिए चल पड़ी। इधर पांच मिनट तक माइक के खराब रहने के बाद, माइक के ठीक होने पर वहा ड्यूटी में तैनात अधिकारियों ने राहत की सांस ली।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जिन लोगों ने राज्यपाल के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम तथा भारतीय गणतंत्र दिवस के इस पुनीत कार्यक्रम को हल्के में लेने का प्रयास किया तथा माइक जैसी चीजों को ठीक से नहीं देखा और नहीं उसकी जांच की, ऐसे लोगों पर स्थानीय प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए पर ऐसे लोगों पर इस राज्य सरकार में कड़ी कार्रवाई होगी, उन्हें दंडित किया जायेगा, ऐसा संभव नहीं दीखता, क्योंकि यहां तो ऐसे लोगों को बचाने की परंपरा प्रारंभ हो गई हैं।

Krishna Bihari Mishra

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आम तौर पर लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की अहमियत ज्यादा होती है, पर झारखण्ड में जनप्रतिनिधियों की कोई इज्जत नहीं, यहां नौकरशाही हावी है। हद तो तब देखी जा रही हैं कि सीएमओ और मुख्य सचिव के इशारे पर सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग इस प्रकार से मुख्य सचिव की न्यूज संप्रेषित कर रहा है, जैसे लगता है कि यहां मुख्य सचिव ही सर्वेसर्वा है, बाकी किसी की कोई औकात ही नहीं।

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