आंदोलनकारियों ने राज्यपाल से लगाई गुहार, रायसा जलाशय परियोजना को रद्द करने की मांग
झारखण्ड में विकास की नई धारा बह रही है, पर ये विकास की नई धारा झारखण्ड के आदिवासियों-मूलवासियों की जीवनलीला ही समाप्त कर दे रही हैं। सच्चाई है कि झारखण्ड में कई बड़े-बड़े डैम पहले बनाये गये, जिससे करोड़ों आदिवासियों-मूलवासियों का समूह विस्थापन का शिकार हो गया। उन्हें अपने गांव, जमीन, खेत, जंगल आदि से बेदखल कर दिया गया। चांडिल जैसे बड़े डैम से गांवों और किसानों को आज सिंचाई के लिए पानी तक नहीं मिल रहा।
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