मि. PM, अपने CM की प्रशंसा करने तथा विरोधियों की आलोचना करने के पूर्व राज्य की सच्चाई तो जान लें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज पलामू में थे, वे मंडल डैम का शिलान्यास करने आये थे, चूंकि अब पूरा देश चुनावी माहौल में धीरे-धीरे डूब रहा है, वे भी इसका लाभ लेना चाह रहे हैं, वे यहां भी कांग्रेस पर खुब बरसे, वे अपने सीएम रघुवर दास की खूब तारीफ करते है, पर वे भूल जाते है कि यहां के सीएम रघुवर दास ने किसानों के नाकों में दम कर दिया है, इनके राज्य में किसान आत्महत्या तक कर चुके हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज पलामू में थे, वे मंडल डैम का शिलान्यास करने आये थे, चूंकि अब पूरा देश चुनावी माहौल में धीरे-धीरे डूब रहा है, वे भी इसका लाभ लेना चाह रहे हैं, वे यहां भी कांग्रेस पर खुब बरसे, वे अपने सीएम रघुवर दास की खूब तारीफ करते है, पर वे भूल जाते है कि यहां के सीएम रघुवर दास ने किसानों के नाकों में दम कर दिया है, इनके राज्य में किसान आत्महत्या तक कर चुके हैं।

यही नहीं 2016-17 में किसानों को 130 रुपये, 2017-18 में 150 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बोनस का भुगतान हुआ था, इस बार 200 रुपये की दर से बोनस भुगतान की बात मंत्री सरयू राय ने उठाई, पर सच्चाई यह है कि राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास किसानों को 50 रुपये से ज्यादा बोनस, इस बार देने के पक्ष में ही नहीं हैं, जिसको लेकर कैबिनेट की बैठक में एक मंत्री सीपी सिंह ने यहां तक कह दिया कि इससे अच्छा है कि किसानों को बोनस ही न दी जाये।

मुख्यमंत्री रघुवर दास आज भी बोनस भुगतान की फाइल को निबटाने में देरी लगा रहे हैं, वे नहीं चाहते कि किसानों को दो सौ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिले। जिसको लेकर राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने सीएम रघुवर दास को पत्र भी लिखा कि वे जल्द फाइल को निबटाएं, पर अभी भी देरी की जा रही है, अब जिस राज्य में ऐसी सोच का मुख्यमंत्री हो, जो किसानों की महत्वपूर्ण फाइलों को दबा दें, वह भी त्वरित निर्णय नहीं ले।

यही नहीं, किसानों को पिछले दो सालों से भी कम बोनस देने का इरादा रखता हो, वह सरकार कितना किसान हितैषी है? और वह पीएम जो ऐसे सीएम की प्रशंसा करते नहीं थकता हो, ऐसे में क्या पलामू में पीएम मोदी की सभा में आये किसानों को यह नहीं पता चला होगा कि उसके पीएम ने, सीएम के सामने ही उसके आंखों में धूल झोंक दी।

जितनी दलालियां प्रधानमंत्री आवास योजना में हैें, वैसी कही नहीं

आप कहते है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में कहीं कोई दलाली या बिचौलिया नहीं हैं, तो फिर गिरिडीह के उदनाबाद के मुखिया पर करीब चार दर्जन लोगों ने पांच-पांच हजार रुपये घूस लेने का आरोप कैसे लगा दिया? उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन क्यों किया? प्रमाण आपके सामने हैं, जरा देख लीजिये, आपकी आंखे खुल जायेगी।

आप जिस उज्जवला योजना की बात करते हैं, वह उज्जवला योजना भी यहां फेल है, जरा पता लगा लीजिये, जिन गरीबों के पास खाने को नहीं हैं, जहां लोग भूख से मरने की स्थिति में हैं, वहां पांच सौ रुपये का सिलिंडर भरवाने कौन जायेगा? आपके द्वारा झारखण्ड में शुरु की गई आयुष्मान योजना का भी यहीं हाल है, कई अस्पतालों ने तो अभी से ही हाथ उठा दिये हैं, कई समाचार पत्रों में तो ऐसी खबरें हर एक दो-दिनों में प्रकाशित हो जा रही है।

सीएम जनता से किये वादे पूरे नहीं कर पाते, पर पीएम के मुख से उनके लिए रस ही टपकते हैं

कमाल है, जिस अपने सीएम की आप प्रशंसा करते है कि वे बहुत ही कर्तव्यनिष्ठ है, जरा उनसे ही पूछिये कि उन्होंने इसी पलामू में कभी जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर 2018 तक प्रत्येक गांव में 24 घंटे बिजली नहीं पहुंचाया, तो वे 2019 में वोट मांगने नहीं आयेंगे, अब आप सीएम रघुवर दास से पूछ लीजिये कि कितने गांवों में 24 घंटे बिजली है, अरे आप राजधानी रांची में ही बिजली की स्थिति देख लीजिये, पता लग जायेगा।

मंडल डैम से बिहार को सर्वाधिक फायदा, पर बिहार के नेताओं को इससे कोई मतलब ही नहीं

लोग तो बताते है कि इस मंडल डैम से सर्वाधिक किसी राज्य को फायदा होना है तो वह बिहार है, पर यहां हो क्या रहा हैं? मंडल डैम से जिस राज्य के किसानों को सर्वाधिक फायदा होनेवाला है, उस बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज के पलामू में आयोजित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम से गायब हैं, और न ही उनका कोई प्रतिनिधि यहां दिखाई पड़ा हैं, पूरा कार्यक्रम भाजपा के लिए, भाजपा के द्वारा और भाजपा को समर्पित है।

यही नहीं इधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीतीश कुमार और अपने होनहार मुख्यमंत्री रघुवर दास की प्रशंसा कर रहे थे, और उधर नीतीश कुमार के प्रिय पात्र लोग भाजपा के ही नीतियों की धज्जियां उड़ा रहे थे। राममंदिर तथा तीन तलाक पर भाजपा के लिए दीवारें खड़ी कर रहे थे, यानी जदयू फिर वहीं नीति पर चलने लगी कि भाजपा के साथ चलेंगे भी और उसे परेशान भी करेंगे, उसके राह में रोड़ें भी अटकायेंगे ताकि उसके लोग ज्यादा उछल नहीं सके।

कमाल है पांच साल पूर्व जिस नीतीश कुमार को नजरंदाज कर पीएम मोदी ने बिहार में धमाल मचा दिया था, आज पीएम मोदी, स्वयं नीतीश कुमार के आगे नतमस्तक है, यहां तक की अपनी कई स्थानों पर जीती हुई सीटों को जदयू के आगे समर्पण कर दिया है, बेचारे करें भी तो क्या करें, कोई चारा भी नहीं दिख रहा और सच्चाई यह भी है कि जैसे ही चुनाव परिणाम आयेंगे, नीतीश कुमार जो बिहार में विभिन्न राजनीतिक दलों में पलटू कुमार के नाम से विख्यात हैं, भाजपा की औकात दिखा देंगे।

भाई प्रशासन हो तो पलामू जैसा, जो पीएम की सभा में भीड़ लाने के लिए पसीने बहा दे

इधऱ बधाई दीजिये, पलामू जिला प्रशासन को भी, जिसने ईमानदारी से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस कार्यक्रम में, भीड़ इकट्ठी करने के लिए अपना पसीना बहाया है, भीड़ बटोर-बटोरकर मंगवाई है, क्योंकि ये सब कार्यक्रम भीड़ को दिखाने के लिए ही तो आयोजित होते हैं, जिला प्रशासन द्वारा इस भीड़ को इक्ट्ठा करने के लिए चलाये गये विशेष अभियान में, पलामू के निजी स्कूलों पर प्रशासन का दबाव साफ दिखा है, उन्होंने अपने यहां चलनेवाली बसों को बड़े प्रेम से प्रशासन को सौंप दिये है, जिसका झलक यहां खूब देखने को मिला।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भीड़ को देखकर गदगद हैं, उन्हें लगता है कि उनका जादू आज भी 2014 की तरह बरकरार हैं, पर उन्हें नहीं पता कि जैसे ही चुनाव आयेगा, और आचार संहिता लागू होगी, जो प्रशासन उनके लिए भीड़ बटोर-बटोर कर ला रहा हैं, वह सहयोग उस वक्त नहीं दे पायेगा, क्योंकि प्रशासन और चुनाव के समय का वक्त में काफी अंतर होता है।

ऐसे भी उस वक्त स्थानीय प्रशासन को पता चल चुका होगा कि तालाब में कमल सूख रहे हैं, पता तो उन्हें आज भी हैं, पर बेचारे क्या करें, राज्य के होनहार मुख्यमंत्री कुछ कर न दें, इसका डर तो सारे प्रशासनिक अधिकारी को रहता है क्योंकि बाल-बच्चे और बीवी किसको नहीं हैं। हां जो ईमानदार या कर्तव्यनिष्ठ होते हैं, वे इन सबकी परवाह नहीं करते, वे तो सिर्फ संविधान और देश ही देखते हैं।

Krishna Bihari Mishra

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