‘तुम्हारे लातेहार में बाकी दोनों लौंडे को मिल गया है सैलरी’ क्या IPRD के बोलचाल की यही भाषा है?
अखबारों और चैनलों पर अपने चेहरे चमकाने के लिए रघुवर सरकार के पास पैसे हैं, पर ठेके पर रखे गये आइपीआरडी में कार्यरत एपीआरओ, सोशल मीडिया पब्लिक ऑफिसर, रिसेप्शनिस्ट, कम्प्यूटर ऑपरेटर, साउंड ऑपरेटर को मासिक वेतन देने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं। पिछले साढ़े चार महीने से ये सारे लोग वेतन के लिए तरस रहे हैं, पर वेतन का भुगतान नहीं हो रहा।
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