धन्य है ‘प्रभात खबर’, धन्य है उसकी रघुवर भक्ति, भाजपा भक्ति और अब ओम माथुर भक्ति

भाई अगर सरकार और सत्तारुढ़ दल की चापलूसी व भक्ति कोई सीखना चाहे तो वह रांची से प्रकाशित ‘प्रभात खबर’ से अवश्य सीख सकता है। कैसे सरकार पर डोरे डालने चाहिए? कैसे जब मुंहमांगी मुराद सरकार पूरी करें तो उसकी भक्ति में कैसे लोट-पोट होना चाहिए? कैसे सत्तारुढ़ दल के अपरिचित व प्रमुख नेताओं पर डोरे डालने चाहिए? पीआर बनानी चाहिए, तो वह सिर्फ और सिर्फ प्रभात खबर से सीखें।

भाई अगर सरकार और सत्तारुढ़ दल की चापलूसी भक्ति कोई सीखना चाहे तो वह रांची से प्रकाशितप्रभात खबर’ से अवश्य सीख सकता है। कैसे सरकार पर डोरे डालने चाहिए? कैसे जब मुंहमांगी मुराद सरकार पूरी करें तो उसकी भक्ति में कैसे लोटपोट होना चाहिए? कैसे सत्तारुढ़ दल के अपरिचित प्रमुख नेताओं पर डोरे डालने चाहिए? पीआर बनानी चाहिए, तो वह सिर्फ और सिर्फ प्रभात खबर से सीखें।

जो बच्चे विभिन्न शिक्षण संस्थानों में पत्रकारिता का कोर्स कर रहे हैं, और ये सब सीखना चाहते हैं तो बस उन्हें तुरन्तप्रभात खबर’ के शरण में चला जाना चाहिए, वे इसके बाद आला दर्जे का परम भक्त जरुर बन जायेंगे, इससे उनकी दालरोटी ही नहीं बल्कि उनकी जिंदगी फाइव स्टार होटलों वाली जरुर हो जायेगी। वे गोवा के समुद्र तट पर सत्तारुढ़ दल के महान नेताओं के साथ पवित्र स्नान विभिन्न देशविदेश की यात्रा भी कर सकतें हैं।

पत्रकारिता में रुचि रखनेवाले, जान लें कि भक्ति का प्रर्दशन करना भी सामान्य बात नहीं, किसी नेता के साथ स्वयं को जोड़ना, सेल्फी लेना, हाथ मिलाना और उनके साथ फोटो खिंचवाकर उसे फेसबुक पर डालना अपने परिजनों को दिखाना, गर्व महसूस करना यहीं तो असली जिंदगी हैं। पत्रकारिता के पुरोधा पराड़कर, विद्यार्थी जैसे लोग तो बेकार के लोग थे, उन्होंने पत्रकार रहकर भी जिंदगी नहीं जिया, असली जिंदगी तो आज के ये पत्रकार जी रहे हैं, क्यों सही कही न?

जरा आज का यानी 25 अगस्त काप्रभात खबर’ पृष्ठ संख्या 13, पृष्ठ राजपाट प्रभात उलटिये। थोड़ा उपर में बीच में जो फोटो छापा गया है। उसे ध्यान से देखिये। आपको उसका भाजपा भक्ति, रघुवर भक्ति, ओम माथुर भक्ति स्पष्ट रुप से दीख जायेगा। साथ ही वह भी दीखेगा, कि प्रभात खबर के मन में क्या चल रहा है? और इसके माध्यम से जनता को क्या और भाजपा के नेताओं को क्या कहना चाह रहा है?

प्रथम दृष्टया इस फोटो को ध्यान से देखिये। फोटो के उपर में लिखा है कार्यकर्ता और संगठन सर्वोपरि, राजनीतिक संस्कार। और फिर जितने लोग फोटो में दिख रहे हैं, सभी के नाम और उनके पद उसने दिये हैं। नीचे कैप्शन है इस तस्वीर को देखे। बैठक की अध्यक्षता विधानसभा चुनाव प्रभारी ओम माथुर कर रहे हैं, संगठन के पदाधिकारी साथ है, मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री साथ में किनारे बैठे है, शायद भाजपा का यही संस्कार इसे अन्य दलों से अलग करता है, जहां पद से ज्यादा संगठन और कार्यकर्ता महत्वपूर्ण है।

यानी इस अखबार ने केवल एक फोटो के माध्यम से और उपर के टैग तथा नीचे के कैप्शन से पूरे झारखण्ड में जनता और अन्य दलों के कार्यकर्ताओं को बता दिया कि भारत में भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है, जो महान है, उसके जैसा कोई नहीं? लेकिन इसी प्रभात खबर से पूछिये कि हे महान अखबार के महान संपादक, आप ये बताओ कि इसी भाजपा में धनबाद की एक महिला जो भाजपा जिला मंत्री हैं, नाम उसका कमला कुमारी है, उसने भाजपा के ही बाघमारा विधायक ढुलू महतो पर यौन शोषण का आरोप लगाया। 

उसके खिलाफ वह थाना गई, उसने आंदोलन किया, भाजपा विधायक ढुलू महतो के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं हुई और इसी प्रकार की घटना झाविमो नेता प्रदीप यादव के साथ हुई तो जल्द प्राथमिकी और आज वो व्यक्ति जेल की सलाखों के पीछे क्यों हैं? यहीं कि प्रदीप यादव विपक्ष में हैं और ढुलू सत्तापक्ष के साथ हैं, नहीं तो और फिर क्या है? और इस मुद्दे पर प्रभात खबर ने क्या रोल अदा किया? ऐसे एक नहीं अनेक उदाहरण है?

कहने का तात्पर्य हैं कि आपको दो पेज का रविवार को विज्ञापन क्या मिलने लगा, आप भक्ति में उतर गये और पत्रकारिता धर्म से स्वयं को विमुख कर लिया। इस प्रकार के कैप्शन कहकर आप क्या भाजपा का प्रचार नहीं कर रहे, क्या यहीं पत्रकारिता है? क्या ये झारखण्ड की गरीब आदिवासीमूलवासी जनता के साथ धोखाधड़ी नहीं? क्या आपही के उस ध्येय वाक्यअखबार नहीं आंदोलन’ का आप अपने ही हाथों से जनाजा नहीं निकाल रहे? अरे जरा सोचिये कि मरियेगा तो ईश्वर से आप आंखे मिला सकते है?

अरे हां आपसे ये सवाल मैंने गलत कर दिया, आप तो खुद को नास्तिक और वामपंथी कहकर पतली गली से निकल जाइयेगा। ठीक है निकलिये, मैं भी देख रहा हूं, ईश्वर भी देख रहा है और जनता भी देख रही हैं, अंततः निर्णय होगा और वह निर्णय क्या आयेगा, शायद आपको पता नहीं? ऐसा नहीं कि जिस चीज का आप फायदा आज उठा रहे हैं, वो फायदा किसी ने पूर्व में नहीं उठाया, उन्होंने भी उठाया है, और आज उनकी क्या स्थिति है? सभी को पता है, इसलिए वक्त का इन्तजार सभी को हैं कि वो वक्त आपके साथ क्या गुल खिलाता है?

Krishna Bihari Mishra

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