Author: Krishna Bihari Mishra

अपनी बात

काश के के सोन की जगह, झारखण्ड के स्वास्थ्य सचिव आज भी नितिन मदन कुलकर्णी होते…

“पूर्व स्वास्थ्य सचिव डा. नितिन मदन कुलकर्णी मुखर और हरदिल अजीज थे। वे झारखण्ड की स्वास्थ्य सेवा को उच्च स्तर पर ले जाने को प्रयासरत रहे हैं। कोरोना काल में उनकी सुझ-बुझ का नतीजा ही रहा कि झारखण्ड की स्थिति बेहतर रही। वे धनबाद के मुद्दे पर भी त्वरित कार्रवाई करते थे, पर के के सोन वैसे नहीं हैं।” यह कहना है एक युवा समाजसेवी अंकित राजगढ़िया का।

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बाल कोना

परमहंस योगानन्द का योग, अंतिम नहीं है बल्कि यह प्रवेश द्वार है, उस परमपिता परमेश्वर तक पहुचंने का…

जय गुरु। पहली बार रांची मेरा पदार्पण 4 जून 1985 को हुआ था, क्योंकि 5 जून को मेरी शादी रांची में थी। मेरी पत्नी उस वक्त योगदा सत्संग विद्यालय की नौंवी कक्षा की छात्रा थी, उनके हाथों में कई बार योगी कथामृत मैंने देखा था, पर कभी पढ़ नहीं सका। उसी समय से कभी कभार योगदा सत्संग आश्रम में आना – जाना लगा रहा, कभी योगदा सत्संग द्वारा चलाये जा रहे औषधालय गया तो कभी योगदा सत्संग द्वारा चलाये जा रहे मोतियाबिंद के आपरेशन में शामिल हुआ।

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अपनी बात

शाबाश बिहार के माननीयों, अब बस सदन में चाकूबाजी और गोलियां ही चलाना शेष रह गया हैं, उसे भी पूरा कर बिहारवासियों का मनोबल बढ़ा ही दीजिये

सीधा सा सवाल है बिहार के विपक्षी माननीयों से, अगर सदन में आपकी बातें नहीं मानी जायेगी, तो क्या आप सदन और सदन के बाहर गुंडागर्दी का सहारा लेंगे? आप तय करेंगे कि सरकार क्या करें या न करें? आप सदन को अपनी गुंडागर्दी के बल पर बंधक बनाने का प्रयास करेंगे? यह सोच आपके अंदर कहां से आ गई? और जब आ ही गई, आपने वो सब कर ही डाला तो जरा, पटना से प्रकाशित आज का अखबार देख लीजिये और उन अखबारों से हो सकें तो अपना-अपना चेहरा ढंकने का प्रयास कीजिये,

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अपनी बात

झारखण्ड विधानसभा के बजट सत्र की समाप्ति के बाद, सदन को लेकर क्या सोचते हैं CPI ML MLA विनोद सिंह

दिनांक – 22 मार्च, झारखण्ड विधानसभा। पहली घटना – मंत्री जोबा मांझी के एक जवाब से असंतुष्ट होकर, केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्तापक्ष के लोग भी हंगामा करते हैं, वेल में आ धमकते हैं। मामला एचइसी की खाली जमीन रैयतों को लौटाने के बजाय, ऊंची कीमत पर बाहरी लोगों को बेचने से संबंधित था। दूसरी घटना – आलोक चौरसिया के तारांकित प्रश्न कि पलामू स्थित आयुक्त कार्यालय में सचिव-कर्मचारी के खाली पदों को कब भरा जायेगा? राज्य का एक भी मंत्री खड़ा होकर जवाब तक नहीं दिया,

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राजनीति

लीजिये महगामा की कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय का विधानसभा की यूट्यूब चैनल से वक्तव्य ही गायब

महगामा की कांग्रेस विधायक, सामान्य प्रयोजन समिति, सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति एवं झारखण्ड अधिविद्य परिषद की सदस्य दीपिका पांडेय सिंह ने झारखण्ड विधानसभा के अध्यक्ष रवीन्द्र महतो को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि विधानसभा की कार्यवाही से संबंधित विडियो क्लिप से छेड़-छाड़ किया जा रहा है और जो लोग इसमें शामिल है, उन्हें चिह्नित कर दंडित किया जाय।

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अपनी बात

मैं नई भाजपा हूं, दलबदलूओं, मौकापरस्त, सिद्धान्तविहीन राजनीतिज्ञों का यहां स्वागत हैं, हमारे निष्ठावान कार्यकर्ता आपको सफलता दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है

क्या आप दलबदलू हैं? मौकापरस्त हैं? सिद्धान्तविहीन राजनीति में विश्वास रखते हैं? ब्राह्मणविरोधी राजनीति को सही में अंजाम देना चाहते हैं? तो किधर घुम रहे हैं? कहां और क्यों समय नष्ट कर रहे हैं? भाजपा के शीर्षस्थ नेता व पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता आपको अपने कंधे पर रखकर संसद व विधानसभा में आपको पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अगर आपको विश्वास नहीं हैं तो हमारे पास कई उदाहरण है।

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अपनी बात

जब अपने ही, सरकार की कार्यशैली पर अंगूली उठाने लगे, तो इसे समझने की कोशिश करिये हेमन्त जी

जब अपने ही, सरकार की कार्यशैली पर अंगूली उठाने लगे, तो इसे समझने की कोशिश करिये हेमन्त जी। इसका मतलब साफ है कि पार्टी में सब कुछ ठीकठाक नहीं चल रहा, जिसका प्रतिबिम्ब सदन में दिख रहा है। लोबिन हेम्ब्रम तो खुलकर बोल रहे हैं, लेकिन झामुमो में ऐसे कई नेता व विधायक हैं, जो अंदर ही अंदर सरकार की कार्यशैली से इतने नाराज है कि मौके की तलाश में है कि कब वे मुक्त होकर, पार्टी के खिलाफ आवाज बुलंद कर दें।

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अपनी बात

अगर बाबू लाल को समाज और मानवशास्त्र, तो हेमन्त सोरेन को भी एकलव्य का दृष्टांत देते वक्त गुहराज और शबरी को भी पढ़ लेना चाहिए

आदिवासियों को हिन्दू बतानेवाले बाबू लाल मरांडी को समाज और मानवशास्त्र पढ़ लेना चाहिए, तो राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को भी महाभारत के एकलव्य का दृष्टांत देने के साथ-साथ, उसके पूर्व की रामायण की रचना में उद्धृत शृंगवेरपुर के राजा गुहराज और भीलनी शबरी को भी पढ़ लेना चाहिए, अगर ये पढ़ लें तो उन्हें भी पता चल जायेगा कि आज जिन्हें वे आदिवासी बता रहे हैं, उनका रामायण अथवा महाभारत काल में धर्म क्या था?

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अपनी बात

अब कोविशील्ड की खुराक 6-8 सप्ताह के अंतराल पर, भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने की घोषणा

अपनी 20 वीं मीटिंग में कोविड 19 को लेकर, नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेन एवं नेशनल टेक्नीकल एडवायजरी ग्रुप ऑन इम्यूनिजेशन ने उभरते वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कोविशिल्ड की दो खुराकों के बीच अंतराल को लेकर नई बातों को सभी के सामने रखा हैं। इस बैठक के दौरान बात यह आई कि कोविशील्ड की एक खुराक 4-6 सप्ताह के बीच के बजाय, 6-8 सप्ताह के अंतराल पर दी जाये।

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धर्म

104 वर्ष योगदा सत्संग सोसाइटी के, जहां लोग पूर्ण ध्यान के दर्शन और जीवन के ज्ञान से होते हैं लाभान्वित

योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाईएसएस) का 104 वां स्थापना दिवस 22 मार्च को है। इसी दिन परमहंस योगानन्द (1893 — 1952)  ने 1917 में भारत में कई सहस्राब्दियों पूर्व अद्भुत हुए पवित्र आध्यात्मिक विज्ञान, क्रियायोग की सार्वभौमिक शिक्षा को उपलब्ध कराने के लिए योगदा सत्संग सोसाइटी की स्थापना की थी। इन धर्म-निरपेक्ष शिक्षाओं में, सर्वांगीण सफलता और समृद्धि के साथ-साथ, जीवन के अंतिम लक्ष्य – आत्मा का परमात्मा से मिलन – के लिए ध्यान की विधियों का एक पूर्ण दर्शन और जीवन शैली का ज्ञान सम्मिलित है।

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