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पं. नेहरु से इतनी नफरत क्यों, जनाब? सिर्फ इसलिए कि उनके नाम स्मरण कर लेने से…

देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. नेहरु से इतनी नफरत क्यों, जनाब? सिर्फ इसलिए कि उनके नाम स्मरण कर लेने से भाजपा के वोट बैंक के प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। आखिर राजनीति में एक दूसरे को दुश्मन मान लेने का प्रचलन, आपको नहीं लगता कि आनेवाले समय में भाजपा के लिए भी यहीं खतरा उत्पन्न करेगा, जबकि भारतीय संस्कृति में कहा गया है कि मरणोपरांत अगर आपका कोई शत्रु भी हैं, तो उसके प्रति भाव बदल देना चाहिए।

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रांची के पत्रकार जानना चाहते हैं कि इन्दुकांत प्रशासनिक अधिकारी है या कर्मचारी या चपरासी?

झारखण्ड राज्य स्थापना दिवस के दिन रांची के मोराबादी मैदान में पत्रकारों और छायाकारों की पुलिस द्वारा की गई पिटाई को लेकर रांची से दिल्ली तक बवाल मचा है, पर रांची के इक्के-दूक्के अखबार/चैनल/एजेंसियों में कार्य कर रहे इक्के-दूक्के लोग गद्दारी से बाज नहीं आ रहे, वे वहीं कर रहे हैं, जिससे पत्रकारों का यह आंदोलन प्रभावित हो जाये, पर ऐसा हो नहीं पा रहा, जिसको लेकर वे आक्रोशित हैं।

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शर्मनाकः जिस पुलिस अधिकारी पर पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप, उसे मिला जांच टीम का नेतृत्व

जिस पुलिस अधिकारी के खिलाफ लालपुर थाना में आक्रोशित पत्रकारों ने प्राथमिकी दर्ज कराई, उसी को जांच टीम का नेतृत्व मिला है। झारखण्ड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मोराबादी मैदान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान समाचार कवरेज करने गये पत्रकारों पर हुए लाठीचार्ज की घटना की जांच के लिए स्थानीय प्रशासन ने एक जांच टीम गठित की है।

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जिस प्रशासन ने रांची के पत्रकारों को अपमानित किया, उसी से जाकर PTI के इंदुकांत ने हाथ मिलाया

इंदुकांत दीक्षित के इस हरकत पर वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र सोरेन ने अपने फेसबुक पर लिखा “ मैं जानता हूं कि हमारे अंदर का इंसान मर चुका है, पर जब तक सांसे चल रही है, तब तक कुछ तो बोलिये, कुछ कीजिये, इसका मतलब यह नहीं कि क्रिकेट खेलिये, एक वरिष्ठ पत्रकार ने आज दिल तोड़ दिया।” कुछ पत्रकारों ने तो इस क्रिकेट आयोजन पर भी सवाल उठाए कि जो स्टेडियम हॉकी के लिए जाना जाता है, वहां क्रिकेट कैसे हो सकता है?

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सांस्कृतिक कार्यक्रम से भी जनता ने बनाई दूरियां, खाली रही कुर्सियां, पिटाई के बावजूद नहीं सुधरे पत्रकार

झारखण्ड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मोराबादी मैदान में रघुवर सरकार द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम से भी आम जनता ने दूरियां बना ली। बड़ी संख्या में कार्यक्रम स्थल पर कुर्सियां खाली पड़ी रह गई। सांध्य वेला में शुरु हुए इस कार्यक्रम में सांसदों, विधायकों, अधिकारियों की उपस्थिति भी कम रही। आश्चर्य इस बात की रही कि सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक सुरेश वाडेकर और सुप्रसिद्ध पार्श्वगायिका कविता कृष्णमूर्ति के कार्यक्रम होने के बावजूद सांस्कृतिक कार्यक्रम का बुरा हाल रहा।

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समाचार कवरेज करने गये पत्रकारों को झारखण्ड पुलिस ने जमकर पीटा, रांची प्रेस क्लब मौन

रांची के मोराबादी मैदान में झारखण्ड राज्य स्थापना दिवस कार्यक्रम का समाचार संकलन करने गये रांची के विभिन्न मीडिया संस्थानों में कार्यरत पत्रकारों-छायाकारों को झारखण्ड पुलिस ने जमकर पीटा। आश्चर्य है कि जिनके हाथों में कैमरे थे, उनको पुलिसकर्मियों ने ज्यादा अपना निशाना बनाया। उनके हाथ-पैर तोड़ने की अच्छी प्रबंध झारखण्ड पुलिस ने की थी, पर इनके हाथ-पैर तो नहीं टूटे, लेकिन इन पत्रकारों-छायाकारों की हालत तो जरुर पस्त कर दी।

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CM रघुवर की लाख बंदिशों के बावजूद पारा शिक्षकों ने दिखाई धमक, हंगामे की भेंट चढ़ा स्थापना दिवस

रांची के मोराबादी मैदान में आज झारखण्ड स्थापना दिवस का मुख्य कार्यक्रम चल रहा था। मुख्यमंत्री रघुवर दास, अपनी आदत के अनुसार, विकास और सवा तीन करोड़ जनता की सेवा का रट लगाते रहे, और इसी कार्यक्रम में पारा शिक्षक रह-रहकर हंगामा करते रहे। आश्चर्य यह रहा कि पूरे राज्य में पारा शिक्षकों को मोराबादी मैदान रांची तक नहीं पहुंचने देने के लिए पूरे राज्य की पुलिस लगी थी,

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DVC की सरकार को धमकी, करो बकाये का भुगतान, नहीं तो झारखण्ड में फैलेगा 16 नवम्बर से अंधियारा

झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य को अंधकार युग में ले जाने की पूरी तैयारी कर ली है। झारखण्ड के धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, मुसाबनी (पूर्वी सिंहभूम) आदि शहरों के लोग कल से लोड शेडिंग के शिकार होंगे, क्योंकि डीवीसी का राज्य सरकार पर 3527 करोड़ का बकाया है, जिस बकाया को भरने में राज्य सरकार के पसीने छूट रहे हैं।

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बिरसा के परिवारों को सम्मान से वंचित रखनेवाले, CM रघुवर को स्थापना दिवस मनाने का अधिकार नहीं

झारखण्ड अपने स्थापना के 18 वें वर्ष में हैं। दुर्भाग्य इस झारखण्ड का है कि इस राज्य में वर्तमान में चल रही रघुवर सरकार ने स्वयं के द्वारा लिये गये निर्णयों से राज्य की जनता के स्वाभिमान को सर्वाधिक ठेस पहुंचाया, ऐसे-ऐसे निर्णय लिये, जिन निर्णयों को सुन और देख यहां की जनता अपना माथा पकड़ ली। जिस भाजपा के नेता जातिवाद से स्वयं को अलग रखते थे, इस राज्य के मुख्यमंत्री ने ऐसा जातिवाद फैलाया।

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काश, झारखण्ड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू भी छठव्रतियों को छठव्रत की शुभकामनाएं देती…

कितना अच्छा होता, जब झारखण्ड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू भी राज्य में रह रहे छठव्रतियों और उनके परिवारों को छठव्रत की शुभकामनाएं देती। हमें समझ नहीं आ रहा कि राज्य में रहनेवाले करोड़ों छठव्रतियों एवं उनके परिवारों को अगर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू छठव्रत की बधाई दे देती तो उनका क्या चला जाता, क्या घट जाता?

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