रांची के पत्रकार जानना चाहते हैं कि इन्दुकांत प्रशासनिक अधिकारी है या कर्मचारी या चपरासी?

झारखण्ड राज्य स्थापना दिवस के दिन रांची के मोराबादी मैदान में पत्रकारों और छायाकारों की पुलिस द्वारा की गई पिटाई को लेकर रांची से दिल्ली तक बवाल मचा है, पर रांची के इक्के-दूक्के अखबार/चैनल/एजेंसियों में कार्य कर रहे इक्के-दूक्के लोग गद्दारी से बाज नहीं आ रहे, वे वहीं कर रहे हैं, जिससे पत्रकारों का यह आंदोलन प्रभावित हो जाये, पर ऐसा हो नहीं पा रहा, जिसको लेकर वे आक्रोशित हैं।

झारखण्ड राज्य स्थापना दिवस के दिन रांची के मोराबादी मैदान में पत्रकारों और छायाकारों की पुलिस द्वारा की गई पिटाई को लेकर रांची से दिल्ली तक बवाल मचा है, पर रांची के इक्के-दूक्के अखबार/चैनल/एजेंसियों में कार्य कर रहे इक्के-दूक्के लोग गद्दारी से बाज नहीं आ रहे, वे वहीं कर रहे हैं, जिससे पत्रकारों का यह आंदोलन प्रभावित हो जाये, पर ऐसा हो नहीं पा रहा, जिसको लेकर वे आक्रोशित हैं।

हालांकि जिनके इशारों पर ये काम कर रहे हैं, उन लोगों को भी कल पता चल गया, ऐसे लोगों की पत्रकारिता जगत में कोई औकात नहीं, बल्कि ये मात्र शो-पीस है, नहीं तो कल का मैच, जो मीडिया एकादश और जिला प्रशासन एकादश के बीच होना था, वो बदलकर डीसी एकादश वर्सेज डीडीसी एकादश नहीं होता, तथा मैच की छीछालेदर भी नहीं होती।

इधर कल डीसी एकादश वर्सेज डीडीसी एकादश के बीच संपन्न हुए मैच के बाद जिला प्रशासन द्वारा जारी किये गये प्रेस रिलीज में, पीटीआई के संवाददाता इंदुकांत दीक्षित को मिले ‘मैन ऑफ द मैच’ का समाचार सुनकर, रांची के कई पत्रकार हतप्रभ रह गये। इन पत्रकारों का कहना था कि  मैच तो डीसी एकादश और डीडीसी एकादश के बीच था, ऐसे में पीटीआई के संवाददाता को ‘मैन ऑफ द मैच’ का खिताब कैसे मिल गया?  क्या पीटीआई के संवाददाता इंदुकांत दीक्षित ने पत्रकारिता छोड़ दी और झारखण्ड सरकार के पदाधिकारी/कर्मचारी बन गये?

इन पत्रकारों का कहना था कि जिला प्रशासन से यहां के पत्रकार जानना चाहते हैं कि फिलहाल इंदुकांत दीक्षित रांची जिला प्रशासन के अंतर्गत प्रशासनिक अधिकारी है या कर्मचारी या चपरासी? क्योंकि मैच तो डीसी एकादश और डीडीसी एकादश के बीच खेला गया था।  इधर पीटीआई के इस संवाददाता के पत्रकार विरोधी रवैये से पूरे रांची ही नहीं बल्कि झारखण्ड के सारे पत्रकार गुस्से में हैं।

इसी बीच प्रभात खबर ने पारा टीचरों और पत्रकारों के खिलाफ हुए पुलिसिया जुल्म के विरोध में ‘आक्रोश’ नाम से एक विशेष पृष्ठ जनता को समर्पित कर दिया। उधर एनडीटीवी ने भी पत्रकारों के साथ हुए इस जुल्म को अपने समाचार में कल प्रमुख स्थान दिया है, जिसकी सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। दुसरी ओर पूरे रांची में, सारा विपक्ष पत्रकारों और पारा टीचरों के साथ हुए पुलिसिया जुल्म के खिलाफ सड़कों पर उतर चुका है, तथा इस घटना को रघुवर सरकार के लिए ‘आखिरी कील’  बता रहा है।

Krishna Bihari Mishra

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