जिस प्रशासन ने रांची के पत्रकारों को अपमानित किया, उसी से जाकर PTI के इंदुकांत ने हाथ मिलाया

इंदुकांत दीक्षित के इस हरकत पर वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र सोरेन ने अपने फेसबुक पर लिखा “ मैं जानता हूं कि हमारे अंदर का इंसान मर चुका है, पर जब तक सांसे चल रही है, तब तक कुछ तो बोलिये, कुछ कीजिये, इसका मतलब यह नहीं कि क्रिकेट खेलिये, एक वरिष्ठ पत्रकार ने आज दिल तोड़ दिया।” कुछ पत्रकारों ने तो इस क्रिकेट आयोजन पर भी सवाल उठाए कि जो स्टेडियम हॉकी के लिए जाना जाता है, वहां क्रिकेट कैसे हो सकता है?

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर रांची के मोराबादी स्थित एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम में आयोजित होनेवाले मीडिया एकादश वर्सेज जिला प्रशासन एकादश मैत्री क्रिकेट मैच, डीसी एकादश वर्सेज डीडीसी एकादश क्रिकेट मैच में परिवर्तित हो गया। मीडिया एकादश वर्सेज जिला प्रशासन एकादश मैत्री क्रिकेट मैच का डीसी एकादश वर्सेज डीडीसी एकादश क्रिकेट मैच में परिवर्तित होना इस बात का संकेत है कि रांची के पत्रकारों ने बहुत दिनों के बाद अपने सम्मान को लेकर एक निर्णायक लड़ाई लड़ने को ठानी है, और ये लड़ाई मुकाम तक पहुंचेगी, जिसकी आहट अब यहां के छोटे-मंझौले पत्रकारों को अभी से ही सुनाई देने लगी है, हालांकि अभी भी कई अखबारों/चैनलों के संपादकों और मालिकों के रहमोकरम पर जीवन-बसर करने को मजबूर, ये छोटे-मंझौले पत्रकार अपने सम्मान को लेकर सशंकित है।

रांची प्रेस क्लब के बैनर तले, अपने सम्मान को पुनः प्राप्त करने के लिए संघर्षरत इन छोटे-मंझौले पत्रकारों को देख विद्रोही24.कॉम को भी आशा बंधी है, कि ये संघर्ष गुल खिलायेगा तथा सत्ता में बैठे राजनीतिज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा उन दलाल टाइप पत्रकारों को भी बतायेगा कि पत्रकार और पत्रकारिता क्या है? खुशी इस बात की है इस संघर्ष में अब धीरे-धीरे वे लोग भी खुलने लगे हैं, जो विज्ञापन के लालच तथा अपना पी-आर बनाने के चक्कर में अपने जमीर को मारने के लिए जाने जाते हैं, फिर भी इनमें से एक दो ऐसे हैं, जिन्होंने ठान ली है कि वे कुकर्म करना नहीं छोंड़ेगे, अपने पत्रकार भाइयों के सम्मान के साथ खेलेंगे तथा अपने विरोधियों के हाथ मजबूत करेंगे।

रांची प्रेस क्लब के उपाध्यक्ष सुरेन्द्र सोरेन ने विद्रोही24.कॉम को बताया कि जहां मीडिया एकादश वर्सेज जिला प्रशासन एकादश मैच होना था, वहां प्रेस क्लब के पदाधिकारी और अन्य मीडिया के साथी इस कार्यक्रम का विरोध करने के लिए जुटे थे, तथा इस कार्यक्रम में भाग लेने आ रहे पत्रकारों को इस मैत्री क्रिकेट मैच में भाग लेने से मना कर रहे थे, इंदुकांत दीक्षित को छोड़कर सभी ने इस बात को स्वीकार किया कि कल जिस प्रकार पत्रकारों की पिटाई की गई, उनके सम्मान के साथ खेला गया, ऐसे हाल में इस प्रकार के मैत्री क्रिकेट मैच में शामिल होने से मैत्री नहीं हो सकती उसके लिए जिला प्रशासन और सरकार दोनों को दिल बड़ा करना होगा।

पर इंदुकांत दीक्षित ने अपने स्वभावानुसार पत्रकार मित्रों के अनुनय-विनय को हवा में उड़ाते हुए एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम में प्रशासन द्वारा मिले क्रिकेट मैच के पोशाक को धारण कर मुस्कुराते हुए जिला प्रशासन का साथ दिया। जिसकी एक स्वर से रांची के करीब-करीब सभी पत्रकारों ने कड़ी आलोचना की है। पीटीआई के इस संवाददाता के खिलाफ नारे भी बुलंद हुए, नारा था – “जो मैच खेलेगा, वो दलाल कहलायेगा।” इसी बीच वहां बड़ी संख्या में मौजूद पत्रकारों ने रांची प्रेस क्लब से पीटीआई के इस संवाददाता के खिलाफ एक्शन लेने का अनुरोध किया था, रांची प्रेस क्लब से इसकी सदस्यता रद्द करने की मांग की। जिस पर रांची प्रेस क्लब के पदाधिकारियों का कहना था कि जब यह मुद्दा रांची प्रेस क्लब के पास आयेगा तो इस पर विचार किया जा सकता है।

इंदुकांत दीक्षित के इस हरकत पर वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र सोरेन ने अपने फेसबुक पर लिखा “ मैं जानता हूं कि हमारे अंदर का इंसान मर चुका है, पर जब तक सांसे चल रही है, तब तक कुछ तो बोलिये, कुछ कीजिये, इसका मतलब यह नहीं कि क्रिकेट खेलिये, एक वरिष्ठ पत्रकार ने आज दिल तोड़ दिया।”  कुछ पत्रकारों ने तो इस क्रिकेट आयोजन पर भी सवाल उठाए कि जो स्टेडियम हॉकी के लिए जाना जाता है, वहां क्रिकेट कैसे हो सकता है? ये तो वहीं बात हो गई कि तरनताल में कोई कबड्डी मैच करा दें।

कुल मिलाकर आज के मैच में बड़ी संख्या में पत्रकारों की मौजूदगी के बावजूद मैत्री क्रिकेट मैच का बहिष्कार स्थानीय जिला प्रशासन को यह सोचने पर जरुर मजबूर कर दिया होगा कि उन्होंने गलतियां की है, हालांकि जिला प्रशासन ने पत्रकारों में फूट डालो शासन करो की नीति का खुब सदुपयोग करने की ठानी, पर खुशी इस बात की है कि इस नीति का समर्थन करने में उन्हें सिर्फ और सिर्फ पीटीआई के संवाददाता इन्दुकांत दीक्षित का ही साथ मिला, जिसे रांची या पूरे झारखण्ड में कोई पत्रकार भाव ही नहीं देता।

Krishna Bihari Mishra

One thought on “जिस प्रशासन ने रांची के पत्रकारों को अपमानित किया, उसी से जाकर PTI के इंदुकांत ने हाथ मिलाया

  1. समाज को एक मार्गदर्शक के रूप में पत्रकारिता को जाना जाता है। परंतु वर्तमान में लोकतंत्र के चारो स्तम्भ व्यक्तिगत लाभ का जीवन पंसन्द करते हैं। तद्नुसार आम नागरिक एवं देश की स्थिति बद्दतर होते जा रही है। दुर्भाग्यपूर्ण …😢

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