पुलवामा के बाद, कोई अपने बेटे के रिसेप्शन तीन-तीन जगह कराने में मस्त, तो कोई शहीदों के परिवारों को आनन्द देने में मस्त
भाई दुनिया में एक से एक आदमी है, एक से एक संस्था है, अगर कोई चाह लें कि किसी को मदद करना हैं, तो भला उसकी चाह को कौन रोक सकता हैं, कहा भी गया है, जहां चाह वहां राह और जो कभी अच्छा चाहा नहीं, वह भला किसी का क्या भला चाहेगा? फिलहाल कश्मीर के पुलवामा में जो घटना घटी, उससे कई देशवासी अभी भी व्यथित हैं, कई भारतीय परिवार तो उस हिंसक घटना से प्रभावित शहीद परिवारों के साथ आज भी तन-मन-धन के साथ खड़े हैं,
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