अपनी बात

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पुलवामा के बाद, कोई अपने बेटे के रिसेप्शन तीन-तीन जगह कराने में मस्त, तो कोई शहीदों के परिवारों को आनन्द देने में मस्त

भाई दुनिया में एक से एक आदमी है, एक से एक संस्था है, अगर कोई चाह लें कि किसी को मदद करना हैं, तो भला उसकी चाह को कौन रोक सकता हैं, कहा भी गया है, जहां चाह वहां राह और जो कभी अच्छा चाहा नहीं, वह भला किसी का क्या भला चाहेगा? फिलहाल कश्मीर के पुलवामा में जो घटना घटी, उससे कई देशवासी अभी भी व्यथित हैं, कई भारतीय परिवार तो उस हिंसक घटना से प्रभावित शहीद परिवारों के साथ आज भी तन-मन-धन के साथ खड़े हैं,

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चीन लगातार चौथी बार 130 करोड़ भारतीयों के मुंह पर मारा करारा तमाचा, फिर भी भारतीयों की नींद नहीं टूट रही

जिस देश के लोगों में गैरत नाम की चीज नहीं होती, उस देश के लोगों को चीन और पाकिस्तान जैसा चिरकूट देश इसी प्रकार जूतियाता हैं, और वह देश जब तक पूरी तरह नष्ट नहीं हो जाता, जूते खाता हुआ जीवन व्यतीत करता हैं। भारत से बहुत ही छोटा हैं जापान, जहां के नागरिक और वहां की सरकार देश-प्रेम से ऐसे ओत-प्रोत होते हैं कि वे चीन की छाती पर हमेशा कील ठोकते रहते हैं और चीन की हिम्मत नहीं होती कि वह जापान को आंख तरेर कर भी देख सकें।

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देश में पहली बार शिशु हत्या और परित्याग को लेकर सिटिजन्स फाउंडेशन और पा-लोना ने की परिचर्चा आयोजित

हमारा मौजूदा  सिस्टम शिशु हत्या और परित्याग को रोकने के लिए कितना सक्षम है, हम उसका बेहतर इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं, इस लड़ाई में हमारे स्टेकहोल्डर्स कौन-कौन हो सकते हैं, ये तय करना बहुत जरूरी है। उक्त बातें आईसीपीएस डाईरेक्टर डी.के. सक्सेना ने कहीं। वह पा-लो ना और सिटिजन्स फाउंडेशन्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे।

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ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम ने जानेमाने एक्टिविष्ट पत्रकार ललित मुर्मू और पुष्पगीत को दी मौन श्रद्धांजलि

ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम द्वारा झारखण्ड के जाने माने एक्टिविष्ट पत्रकार, जनआंदोलनकारी व सामाजिक कार्यकर्ता ललित मुर्मू के असामयिक निधन पर एक स्मृति सभा का आयोजन रांची के भाकपा माले कार्यालय स्थित महेन्द्र सिंह स्मृति भवन में आयोजित किया गया। जहां ललित मुर्मू की तस्वीर पर माल्यार्पण कर, उन्हें व युवा पत्रकार पुष्पगीत के सम्मान में मौन श्रद्धाजंलि अर्पित की गई।

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बड़ी कम समय में, एक अलग छाप बना ली थी, पत्रकार पुष्पगीत ने, कई पत्रकारों ने दी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि

महत्वपूर्ण यह नहीं कौन कितने दिन जिया, महत्वपूर्ण तो यह है कि वह जितने दिन जिया, कैसे जिया। रांची के हर अच्छे पत्रकारों के दिल में धड़कने वाले पुष्पगीत आज हमारे बीच नहीं हैं. पूरा पत्रकार समाज ही नहीं, बल्कि वे सारे लोग दुखी हैं जो किसी न किसी प्रकार से उनसे जुड़े थे, आज उनके मानवीय गुणों की सर्वत्र चर्चा हो रही है।

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जिनके पास प्रतिभा नहीं होती, वह तेजस्वी की तरह टीवी डिबेट से दूर रहने का विपक्ष से अनुरोध करता है

पता नहीं आजकल के नेताओं व पत्रकारों को क्या हो गया हैं? वे जनता को या अपने मतदाताओं को इतना बेवकूफ क्यों समझते हैं? शायद उन्हें आभास हो गया है कि वर्तमान में चैनलों का जो रुख हैं, उससे कहीं उनका नुकसान न हो जाये, जबकि सच्चाई यह है कि जनता खूब जानती है कि मीडिया कैसे और कब-कब किसके इशारे पर डांस कर चुकी हैं और कौन-कौन नेता अपने इशारे पर इन्हें डांस करवाया है।

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CM रघुवर के बेटे के शाही रिसेप्शन में कई लोगों को नहीं मिला खाना, कई पत्रकारों ने लिया रेस्टोरेंट का सहारा

10 मार्च को जमशेदपुर में मुख्यमंत्री रघुवर दास के बेटे ललित दास की शादी के रिसेप्शन की एक छोटी सी विडियो खूब वायरल हो रही है, जो विद्रोही 24.कॉम के हाथ भी लगी है, इस विडियो में साफ दिख रहा है कि सीएम रघुवर के बेटे के रिसेप्सन में भाग लेने के लिए आये लोग खाली प्लेट लेकर विभिन्न स्टॉलों पर दौड़ लगा रहे हैं, पर उन्हें भोजन नहीं मिल रहा, हार-थक कर वे घर लौट रहे हैं,

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नहीं रहे ललित मुर्मू, एक सच्चे पत्रकार, एक सच्चे झारखण्ड आंदोलनकारी के रुप में वे सदैव याद किये जायेंगे

आज मैं बहुत व्यथित हूं, इतना व्यथित पहले कभी नहीं रहा। सबेरे उठते ही रतन तिर्की के फेसबुक वॉल से खबर मिली, ललित मुर्मू नहीं रहे। एक ऐसा इन्सान, एक ऐसा पत्रकार, एक ऐसा राजनीतिक कार्यकर्ता, एक ऐसा सामाजिक कार्यकर्ता, जो उसूलों के लिए जिंदगी भर लड़ता रहा, पर कभी अपने उसूलों से समझौता नहीं किया। आज दुनिया में नहीं है। जीना क्या है? कोई ललित मुर्मू से सीखे, बेहद सरल जिंदगी और सब के लिए जीने की कला वे खूब जानते थे।

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चार दिन की चांदनी, फिर अंधेरी रात यानी रांची में पब्लिक साइकिल शेयरिंग सेवा भी पूरी तरह ध्वस्त

भाई ये तो मानना ही पड़ेगा कि रांचीवासियों को अच्छी चीजें, अच्छी सेवाएं नहीं चाहिए और अगर अच्छी चीजें मिल भी गई तो वे उसका ऐसा कबाड़ा निकालेंगे कि वह योजना ही पूरी तरह ध्वस्त हो जायेगी। जरा देखिये न, रांची में 3 मार्च को एक बहुत ही सुंदर सेवा लागू की गई, वह सेवा थी – पब्लिक साइकिल शेयरिंग सेवा।

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महागठबंधन के भय से थर-थर कांपती भाजपा, आजसू के चरण पकड़े, गिरिडीह सीट की सुदेश के हवाले

पता नहीं, भाजपा सुप्रीमो को कौन ज्ञान दे रहा है? पर जो भी ज्ञान दे रहा है, उसकी बुद्धि पर हमें तरस आ रही है और तरस आ रही है भाजपा सुप्रीमो अमित शाह पर भी। भाई, जो व्यक्ति अपनी विधानसभा सीट नहीं निकाल सकता, वो लोकसभा की सीट क्या खाक निकालेगा? जो भाजपा के समर्थन के बावजूद सिल्ली विधानसभा सीट पर दम तोड़ देता है, वह गिरिडीह सीट को कैसे अपने पक्ष में कर लेगा?

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