बड़ी कम समय में, एक अलग छाप बना ली थी, पत्रकार पुष्पगीत ने, कई पत्रकारों ने दी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि

महत्वपूर्ण यह नहीं कौन कितने दिन जिया, महत्वपूर्ण तो यह है कि वह जितने दिन जिया, कैसे जिया। रांची के हर अच्छे पत्रकारों के दिल में धड़कने वाले पुष्पगीत आज हमारे बीच नहीं हैं. पूरा पत्रकार समाज ही नहीं, बल्कि वे सारे लोग दुखी हैं जो किसी न किसी प्रकार से उनसे जुड़े थे, आज उनके मानवीय गुणों की सर्वत्र चर्चा हो रही है।

कहा भी जाता है कः जीवति? कीर्तियस्य सः जीवति। जिसकी कीर्ति है, वह जीवित है। स्थूल से सुक्ष्म अवस्था को प्राप्त कर लिये पुष्पगीत कभी मर ही नहीं सकते, वे तो उन सबके लिए प्रेरणास्रोत हो गये, जो मुश्किलों में भी हर प्रकार की समस्या का हल निकाल लेते हैं।

दैनिक भास्कर में हमारी एक बार उनसे मुलाकात हुई, जब वे पहली बार कैंसर को परास्त कर लौटे थे, उनकी कई खबरें हमारे आंखों से होकर गुजरी, खासकर ‘कैंसर डे’ पर लिखी उनकी रिपोर्ट बहुत ही मार्मिक है, उनके शब्द “मैं पुष्पगीत, दो माह पहले पता चला कि मुझे ब्लड कैंसर है। अब दोनो किडनी फेल हो चुकी है…” कभी मौका मिले तो इस पूरे समाचार को पढ़िये, आप जीना सीख लेंगे।

सचमुच कुछ मायनों में सोशल साइट ने क्रांति ला दी है, अब समाचार को जानने के लिए न तो रेडियो-टीवी व अखबार की जरुरत है, बस फेसबुक घुमाइये, आपके आस-पास और जरुरी के खबर हाजिर। संजय कृष्ण के फेसबुक वॉल से हमें यह दुखद समाचार मिला, और उसके बाद से तो पुष्पगीत के चाहनेवालों की एक लंबी शृंखला चल पड़ी। हिन्दुस्तान में कार्यरत पत्रकार अखिलेश कुमार सिंह और सन्नी शारद ने भी अपने ढंग से भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता सुबोध कांत सहाय ने भी पुष्पगीत के निधन पर हार्दिक संवेदना प्रकट की है।

श्रद्धांजलि देनेवालों में रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह और उनकी टीम के नाम भी शामिल है, पर रांची से प्रकाशित ‘बिरसा का गांडीव’ ने स्मृति शेषः अनिल प्रसाद ‘पुष्पगीत’ – अब नहीं दिखेगी चेहरे पर वो शरारती मुस्कान के माध्यम से जो अमर कांत ने भावभीनी श्रद्धाजंलि दी है, वह बहुत ही मार्मिक है।

पुष्पगीत के बारे में लोग बताते है कि जब भी मेडिकल रिपोर्टिंग की बात आयेगी, वे शीर्ष पर होंगे, रिम्स में आये कई लाचार-गरीब परिवारो को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दिलाने में वे कभी पीछे नहीं रहे, यहीं नहीं डाक्टरों के बीच भी उनकी लोकप्रियता किसी से कम नहीं थी। पुष्पगीत को करीब दो साल पहले ब्लड कैंसर की शिकायत मिली थी, और उस वक्त उन्होंने ब्लड कैंसर पर विजय भी प्राप्त की, पर जब उनके जीवन में दुबारा गॉलब्लेडर कैंसर के रुप में आया, तब शायद उन्हें आभास हो गया कि शायद जिंदगी उनसे दगा करेगी। बताया जाता है कि दो दिन पूर्व ही वे वेल्लोर से लौटे थे, डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था, और आज उन्होंने रिम्स में अंतिम सांस ली।

पुष्पगीत नहीं है, पर उनके किये गये कार्य, सदैव पुष्पित-पल्लवित रहेंगे। कई पत्रकारों ने इस दुखद वेला में उनके परिवार को आर्थिक मदद पहुंचाने का बीड़ा उठाया है, यह अंति प्रशंसनीय व दैवीय कार्य हैं, लोगों को मुक्तकंठ से इस सेवा कार्य में लग जाना चाहिए। कई पत्रकारों ने अपने-अपने सोशल साइट पर लिखा है कि “दैनिक भास्कर के वरीय पत्रकार पुष्पगीत का लंबी बीमारी के बाद आज सुबह निधन हो गया। इस दुख की घड़ी में जो भी पत्रकार बंधु और अन्य लोग उन्हें आर्थिक सहयोग करना चाहते हैं, वे रिम्स कैंपस के इलाहाबाद बैंक में स्थित उनकी पत्नी के नाम से बैंक खाता संख्या – 59043 3350 98, IFSC Code – ALLAO213111, SARITA DEVI के नाम से सहयोग कर सकते हैं।”  मैं तो कहूंगा कि अगर आप भी कुछ सहयोग कर सकें तो करें, क्योंकि इससे बड़ा नेक काम दुसरा कुछ हो ही नहीं सकता।